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Alert: पाकिस्तान में अब इस बीमारी का संकट, भारत एक दशक पहले ही कर चुका है निदान

Mon, 18 Aug 2025 09:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • सोमवार (18 अगस्त) को एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में पोलियो वायरस के दो नए मामले सामने आए हैं, जिससे इस साल देश में इस घातक बीमारी से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
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पाकिस्तान में फिर रिपोर्ट किए गए पोलियो के मामले - फोटो : Adobe Stock
जनजागरूकता और प्रभावी मेडिकल साइंस के बदौलत भारत ने एक दशक पहले बेहद संक्रामक पोलियो संक्रमण पर काबू पा लिया था। 13 जनवरी 2011 को पश्चिम बंगाल में संक्रमण का आखिरी केस रिपोर्ट किया गया था। 27 मार्च 2014 को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने भारत को पोलियो-फ्री घोषित कर दिया। भारत ने अपने अथक प्रयासों और व्यापक वैक्सीनेशन कार्यक्रम के जरिए पोलियो से मुक्ति पा ली, हालांकि पड़ोसी देश पाकिस्तान अब भी इस बीमारी की मार झेल रहा है। 

दुनियाभर में अब दो देश ही बचे हैं जहां पर पोलिया रोग एंडेमिक स्टेज में बना हुआ है वह है- पाकिस्तान और अफगानिस्तान। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में फिर से पोलियो संक्रमण के मामले रिपोर्ट किए गए हैं।

सोमवार (18 अगस्त) को एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान में पोलियो वायरस के दो नए मामले सामने आए हैं, जिससे इस साल इस घातक बीमारी से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़कर 21 हो गई है।
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पोलियो के कारण विकलांगता का खतरा - फोटो : Freepik.com

पाकिस्तान में पोलियो के मामले 

स्थानीय जियो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ये नए मामले खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के कोहिस्तान लोअर जिले और सिंध प्रांत के बादिन जिले में रिपोर्ट किए गए हैं। खैबर पख्तूनख्वा में पीड़ित बच्ची छह साल की बच्ची है, जबकि सिंध में एक 21 महीने की बच्ची इस बीमारी से संक्रमित हुई है।

इसके साथ ही साल 2025 में देश में पोलियो के कुल मामलों की संख्या 21 हो गई है, जिसमें खैबर पख्तूनख्वा से 13 और सिंध से छह मामले शामिल हैं। देश के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र से भी एक-एक मामला दर्ज किया गया है।
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पोलियो से बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी - फोटो : Freepik.com
हर साल पाकिस्तान में सामने आ रहे हैं पोलियो के केस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस घातक बीमारी के उन्मूलन के लिए अधिकारियों द्वारा किए गए प्रयासों के बावजूद देश में पोलियो के मामले बढ़ रहे हैं। देश में बार-बार बढ़ते मामलों को देखते हुए देश में 1 से 7 सितंबर तक राष्ट्रीय पोलियो टीकाकरण अभियान चलाया जाएगा, जिसका लक्ष्य सभी प्रांतों और क्षेत्रों के 99 जिलों में पांच वर्ष से कम आयु के 2.8 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो से बचाना है।

पाकिस्तान में 2023 में छह और 2021 में केवल एक मामला दर्ज किया गया। हालांकि, देश में 2024 में पोलियो वायरस में तेजी से उछाल देखा गया जब 74 मामले सामने आए। 

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पोलियो से बचाव के लिए वैक्सीन ड्रॉप जरूरी - फोटो : Adobe Stock
अशिक्षा की वजह पीलियो की खुराक पिलाने से बचते हैं लोग

मेडिकल एक्सपर्ट्स कहते हैं, अशिक्षा और लोगों में जागरूकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में लोग बच्चों को पोलियों की खुराक नहीं पिलाते हैं जिसके कारण यहां ये संक्रामक रोग लगातार जोखिम बढ़ाता रहा है।

कई बार इस तरह के मामलों को लेकर अधिकारियों ने सख्त कदम भी उठाए थे। एक स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, क्वेटा प्रशासन ने फरवरी में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था जिन्होंने अपने बच्चों को पोलियो का टीका लगवाने से मना कर दिया था। जिला प्रशासन के अनुसार, बार-बार चेतावनी के बावजूद माता-पिता बच्चों को पोलियो की खुराक नहीं पिलाते हैं।
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पोलियो की खुराक - फोटो : Freepik.com
गंभीर मामलों में हो सकता है लकवा

पोलियो रोग, पोलियोमाइलाइटिस नामक वायरस के कारण होता है। यह वायरस संक्रमितों के गले और आंतों में पाया जाता है।
  • संक्रमित व्यक्ति के मल के संपर्क में आने के कारण इसके संक्रमण का खतरा सबसे अधिक होता है, छींक या खांसी से निकलने वाली बूंदों से भी यह दूसरे व्यक्ति में संक्रमण का कारण बन सकता है।
  • इसके लगभग 70 फीसदी मामले एसिम्टोमैटिक या हल्के लक्षणों वाले होते हैं।
  • पोलियो वायरस के संक्रमण की गंभीर स्थितियों में इसका असर रीढ़ की हड्डी और मस्तिष्क पर भी हो सकता है, जिसके कारण संक्रमितों में लकवा होने का जोखिम रहता है।


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स्रोत और संदर्भ
Poliomyelitis (polio)


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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