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Cancer Risk: भारतीय महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के साथ इस घातक कैंसर का भी बढ़ रहा है खतरा, हो जाइए सावधान

Mon, 18 Aug 2025 09:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और ग्लोबोकैन के 2022 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल महिलाओं में कैंसर के नए मामलों में ब्रेस्ट कैंसर के केस सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते हैं। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है।
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महिलाओं में कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
कैंसर का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है, सभी उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं। भारतीय आबादी में भी कैंसर के मामलों में तेजी से देखी जा रही वृद्धि चिंता बढ़ाने वाली है। 

कई शोध इस बात को लेकर अलर्ट करते रहे हैं कि भारतीय महिलाओं में भी ये बीमारी बड़ा संकट बनकर उभर रही है। महिलाओं में ब्रेस्ट यानी स्तन कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा देखा जाता रहा है, इसके अलावा हाल के वर्षों में सर्वाइकल कैंसर के मामलों में भी तेजी से उछाल आया है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और ग्लोबोकैन के साल 2022 के आंकड़े बताते हैं कि भारत में हर साल महिलाओं में कैंसर के नए मामलों में ब्रेस्ट कैंसर के केस सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते हैं। इसके अलावा सर्वाइकल कैंसर का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। अकेले साल 2022 में ब्रेस्ट कैंसर के लगभग 1.92 लाख नए केस और सर्वाइकल कैंसर के करीब 1.28 लाख नए केस दर्ज किए गए।
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वैश्विक स्तर पर कैंसर के बढ़ते मामले - फोटो : Freepik.com

भारतीय महिलाओं में कैंसर का बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, इन कैंसर के बढ़ते मामलों के लिए सबसे बड़ा कारण है समय पर कैंसर के लक्षणों की पहचान नहीं हो पाती है, जिससे इसके गंभीर रूप लेने और शरीर में फैलने का खतरा अधिक हो सकता है।  

ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षण जैसे स्तन में गांठ या बदलाव को महिलाएं अक्सर नजरअंदाज कर देती हैं। वहीं सर्वाइकल कैंसर का सबसे बड़ा कारण है ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी संक्रमण) जिसे वैक्सीन और नियमित जांच से काफी हद तक रोका जा सकता है।

हालांकि  जागरूकता की कमी और स्क्रीनिंग की लोगों तक आसान पहुंच न हो पाने की वजह से ज्यादातर महिलाओं में इन कैंसर का निदान और इलाज देरी से हो पाता है। 
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ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
ब्रेस्ट कैंसर क्यों बढ़ रहा है?

स्तन का कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला कैंसर है। अध्ययनों से पता चलता है कि भारत में हर 28 में से 1 महिला को ब्रेस्ट कैंसर होता है। इसके बढ़ने के कई कारण हैं। मोटापा और अनियमित जीवनशैली ब्रेस्ट कैंसर के बड़े कारण हैं। इसके अलावा लंबे समय तक हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियां लेना भी जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। 

डॉक्टर बताते हैं, भारत में समस्या यह है कि महिलाएं शुरुआती लक्षण जैसे स्तन में गांठ, दर्द या असामान्य बदलाव को नजरअंदाज कर देती हैं। यही कारण है कि अधिकतर केस देर से पकड़ में आते हैं।

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सर्वाइकल कैंसर के जोखिम कारक - फोटो : Freepik.com
सर्वाइकल कैंसर क्यों होता है?

सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय के निचले हिस्से (गर्भाशय ग्रीवा) में होता है। भारत में यह महिलाओं में दूसरा सबसे आम कैंसर है। इसकी बड़ी वजह है एचपीवी का संक्रमण। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में हर साल 1.23 लाख से ज्यादा महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से पीड़ित होती हैं। एचपीवी का संक्रमण आमतौर पर यौन संपर्क से फैलता है। अगर समय पर इसका इलाज न हो तो यह गर्भाशय की कोशिकाओं को कैंसर में बदल देता है।

शोध बताते हैं कि बहुत कम उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। जिन महिलाओं की इम्युनिटी कमजोर होती है, उनमें भी एचपीवी संक्रमण होने का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
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कैंसर का खतरा और बचाव के तरीके - फोटो : Adobe stock photos
कैसे बचें, क्या हैं रोकथाम के उपाय?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन दोनों कैंसर को पूरी तरह से रोका तो नहीं जा सकता, लेकिन समय पर जांच और जीवनशैली को सुधारकर खतरा कम किया जा सकता है।
  • ब्रेस्ट कैंसर के लिए मैमोग्राफी और सेल्फ-ब्रेस्ट एग्जाम जरूरी है। वहीं सर्वाइकल कैंसर के लिए पैप स्मीयर टेस्ट और एचपीवी टेस्ट करवाना चाहिए।
  • सर्वाइकल कैंसर से बचाव का सबसे सुरक्षित तरीका एचपीवी वैक्सीन है। इसे 9–26 साल तक की लड़कियों और महिलाओं को डॉक्टर की सलाह पर जरूर लगवाना चाहिए।
दोनों कैंसर से बचाव के लिए संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और मोटापे की रोकथाम जरूरी है। धूम्रपान और शराब से दूरी बनाना भी कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है। 



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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