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Painkiller Side Effects: क्या आप भी तुरंत पेन किलर खा लेते हैं? जान लीजिए ये कितना खतरनाक है

Mon, 13 Jul 2026 10:42 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Painkiller Side Effects: बहुत से लोगों को आपने देखा होगा कि वो थोड़े से दर्द में भी तुरंत ही पेन किलर खा लेते हैं। ये दर्द से तो राहत दिला देता है, लेकिन शरीर को काफी नुकसान पहुंचाता है। आइए इसी बारे में हम आपको आज जानकारी देंगे। 
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पेन किलर खाने के नुकसान - फोटो : AI
Painkiller Side Effects: सिरदर्द, बदन दर्द, कमर दर्द या दांत में हल्का दर्द होते ही कई लोग बिना डॉक्टर की सलाह के तुरंत पेन किलर खा लेते हैं। दर्द से तुरंत राहत मिलने के कारण यह आदत आम होती जा रही है, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार पेन किलर का बार-बार या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। 

खासकर लंबे समय तक बिना सलाह के दवाएं लेने से शरीर पर बुरा असर पड़ सकता है। कई पेन किलर पेट में अल्सर, ब्लीडिंग और किडनी की कार्यक्षमता कम होने का खतरा भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए दर्द के कारण को समझना और उसी के अनुसार इलाज कराना ज्यादा जरूरी है। 

अगर दर्द बार-बार हो रहा है या लंबे समय तक बना रहता है, तो केवल पेन किलर पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर विकल्प है।
 
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पेन किलर खाने के नुकसान - फोटो : AI
थोड़े से दर्द में बार-बार पेन किलर खाना क्यों हो सकता है खतरनाक?

1. किडनी को नुकसान

दर्द निवारक दवाओं, खासकर NSAIDs (जैसे इबुप्रोफेन, डाइक्लोफेनाक और नेप्रोक्सेन) का बार-बार या लंबे समय तक सेवन किडनी में रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। इससे किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और उसकी कार्यक्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। पहले से किडनी की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज से जूझ रहे लोगों में यह खतरा और बढ़ जाता है। इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के नियमित रूप से पेन किलर लेने से बचना चाहिए।

 2. पेट में अल्सर और ब्लीडिंग

कई दर्द निवारक दवाएं पेट की अंदरूनी परत (स्टमक लाइनिंग) को नुकसान पहुंचा सकती हैं। इससे एसिडिटी, पेट में जलन, गैस्ट्रिक अल्सर और गंभीर मामलों में आंतरिक ब्लीडिंग का खतरा बढ़ सकता है। यदि दवा खाली पेट ली जाए या लंबे समय तक लगातार इस्तेमाल की जाए, तो जोखिम और अधिक बढ़ जाता है। जिन लोगों को पहले से अल्सर या पेट संबंधी समस्या है, उन्हें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

 
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पेन किलर खाने के नुकसान - फोटो : AI
 3. लिवर पर असर

कुछ पेन किलर, विशेष रूप से पैरासिटामोल, यदि तय मात्रा से अधिक या लंबे समय तक ली जाए, तो लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। शराब का सेवन करने वाले या पहले से लिवर की बीमारी से पीड़ित लोगों में यह जोखिम और बढ़ जाता है। इसलिए किसी भी दर्द निवारक दवा की निर्धारित खुराक से अधिक सेवन नहीं करना चाहिए।

4. दिल की बीमारी का खतरा

कुछ NSAIDs का लंबे समय तक उपयोग उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक और स्ट्रोक के जोखिम को बढ़ा सकता है। यह खतरा खासकर उन लोगों में अधिक होता है जो पहले से हृदय रोग, हाई बीपी या कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे हैं। यदि दर्द लंबे समय तक बना रहता है, तो बार-बार पेन किलर लेने के बजाय डॉक्टर से कारण की जांच कराना बेहतर होता है।

 

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पेन किलर खाने के नुकसान - फोटो : AI
 5. दर्द का असली कारण छिप जाता है

पेन किलर केवल दर्द को अस्थायी रूप से कम करती है, लेकिन बीमारी का इलाज नहीं करती। लगातार दर्द होने पर बार-बार दवा लेने से बीमारी के असली कारण का पता लगाने में देरी हो सकती है। कई बार जोड़ों का दर्द, लगातार सिरदर्द या पेट दर्द किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी हो सकता है, इसलिए केवल दर्द दबाने के बजाय सही जांच और उपचार जरूरी है।

6. एलर्जी और अन्य साइड इफेक्ट्स

कुछ लोगों में पेन किलर लेने के बाद एलर्जी की प्रतिक्रिया हो सकती है। इसके लक्षणों में त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, सूजन, सांस लेने में कठिनाई, मतली, उल्टी या चक्कर आना शामिल हो सकते हैं। गंभीर एलर्जी होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। यदि किसी दवा से पहले एलर्जी हो चुकी है, तो वही दवा दोबारा बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए।

 
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पेन किलर खाने के नुकसान - फोटो : AI
दर्द होने पर क्या करें?
 
  •  बिना डॉक्टर की सलाह के बार-बार पेन किलर न लें।
  •  पर्याप्त आराम करें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
  • हल्के दर्द में गर्म या ठंडी सिकाई फायदेमंद हो सकती है।
  • लगातार या तेज दर्द होने पर डॉक्टर से जांच कराएं।
  • दवा हमेशा निर्धारित खुराक और अवधि के अनुसार ही लें।

 
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पेन किलर खाने के नुकसान - फोटो : AI
 किन लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?
 
  •  किडनी रोग के मरीज
  •  लिवर की बीमारी वाले लोग
  •  पेट के अल्सर या ब्लीडिंग की समस्या वाले मरीज
  •  गर्भवती महिलाएं (डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं)
  •  बुजुर्ग और हृदय रोगी

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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