हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा
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हृदय रोगों का खतरा
ओजोन सिर्फ सांस की समस्याओं के लिए ही नहीं हृदय स्वास्थ्य के लिए भी दिक्कतें बढ़ा सकता है। ये गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है और रक्त में सूक्ष्म स्तर पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का कारण पैदा करती है। इससे रक्त वाहिकाओं में सूजन होती है और ब्लड प्रेशर अस्थिर हो सकता है। ओजोन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती है जिससे दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि ओजोन के बढ़े स्तर वाले दिनों में अस्पतालों में हृदयाघात और स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी जाती है।
मस्तिष्क पर इसका असर
शोध से पता चलता है कि वातावरण में ओजोन का बढ़ा हुआ स्तर मस्तिष्क की सेहत को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। ओजोन के कारण दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है। सांस के जरिए जब ये गैस शरीर में प्रवेश करती है तो इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में क्षति हो सकती है, जो स्मरण शक्ति, ध्यान और निर्णय क्षमता पर असर डालती है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका प्रभाव अधिक देखा गया है। ये बुजुर्गों में अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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