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Air Pollution: दिल्ली की हवा में घुला 'जहर', हार्ट और ब्रेन के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें

Thu, 09 Oct 2025 07:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओजोन का अधिक स्तर कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों को जन्म देने वाला हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सर्तकता बरतने की जरूरत होती है। आइए इससे होने वाले दुष्प्रभावों को जान लेते हैं। 
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वायु प्रदूषण हो सकता है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
Air Pollution: पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने के चलते अक्तूबर-नवंबर के महीनों में हर साल राजधानी दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। प्रदूषण को तमाम अध्ययनों में सेहत के लिए गंभीर समस्याएं बढ़ाने वाला पाया गया है। हवा में मौजूद बेहद छोटे कण (PM2.5) हमारी सांस के साथ सीधे फेफड़ों में चले जाते हैं और वहां से खून में मिल जाते हैं। इससे न सिर्फ सांस की समस्या बल्कि हृदय रोग और दीर्घकालिक स्थिति में कैंसर तक का खतरा हो सकता है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की ताजा रिपोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर और मुंबई में ग्राउंड लेवल ओजोन प्रदूषण के खतरनाक स्तर को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इस पर गहरी चिंता जताते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है।सीपीसीबी की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली-एनसीआर के 57 में से 25 निगरानी स्टेशनों पर आठ घंटे की सीमा से अधिक समय तक ओजोन प्रदूषण रहा, जबकि मुंबई के 45 में से 22 स्टेशनों पर भी यही स्थिति देखी गई।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ओजोन का अधिक स्तर कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों को जन्म देने वाला हो सकता है, जिसको लेकर सभी लोगों को सर्तकता बरतने की जरूरत होती है। आइए इससे होने वाले दुष्प्रभावों को जान लेते हैं। 
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प्रदूषण हो सकता है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
पहले ओजोन गैस के बारे में जानिए

ओजोन एक गैस है जो आसमान मौजूद होती है और हमें सूरज की हानिकारक किरणों से बचाती है, लेकिन धरती पर इसका बढ़ता स्तर खतरनाक हो सकता है। वैसे तो यह सीधे किसी स्रोत से नहीं निकलता, बल्कि वाहनों, उद्योगों और बिजलीघरों से निकलने वाली नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोआक्साइड (सीओ) के सूरज की रोशनी में रासायनिक प्रतिक्रिया से बनता है। यह गैस बहुत प्रतिक्रियाशील होती है और हवा में लंबी दूरी तक फैल सकती है।

शोधकर्ता बताते हैं इस का बढ़ता स्तर सांस की बीमारियों, विशेष रूप से अस्थमा और दमा को बढ़ावा देती है, साथ ही फसलों को नुकसान पहुंचाकर खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालती है।
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फेफड़े और ब्रेन पर असर - फोटो : Freepik.com
ओजोन का बढ़ता स्तर हो सकता है खतरनाक

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि गर्मी और सूरज की रोशनी ओजोन निर्माण को तेज करती है, जिससे शहरी क्षेत्रों में हॉटस्पॉट बन रहे हैं। लंबे समय तक ओजोन का बढ़ा हुआ स्तर संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। 

ओजोन गैस श्वसन तंत्र के लिए सबसे हानिकारक प्रदूषकों में से एक है। यह फेफड़ों की भीतरी परत में जलन पैदा करती है और सूजन का कारण बनती है। ओजोन प्रदूषण वाले वातावरण में रहने से सांस के माध्यम से शरीर में जाकर सांस फूलना, सीने में दर्द, खांसी, गले में जलन और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षण दिखने लगते हैं।
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हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : adobe stock photos
हृदय रोगों का खतरा 

ओजोन सिर्फ  सांस की समस्याओं के लिए ही नहीं हृदय स्वास्थ्य के लिए भी दिक्कतें बढ़ा सकता है। ये गैस सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करती है और रक्त में सूक्ष्म स्तर पर ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस का कारण पैदा करती है। इससे रक्त वाहिकाओं में सूजन होती है और ब्लड प्रेशर अस्थिर हो सकता है। ओजोन के लंबे समय तक संपर्क में रहने से हृदय की धड़कनें अनियंत्रित हो सकती है जिससे दिल के दौरे का जोखिम बढ़ जाता है। अध्ययनों से पता चला है कि ओजोन के बढ़े स्तर वाले दिनों में अस्पतालों में हृदयाघात और स्ट्रोक के मामलों में वृद्धि देखी जाती है।


मस्तिष्क पर इसका असर

शोध से पता चलता है कि वातावरण में ओजोन का बढ़ा हुआ स्तर मस्तिष्क की सेहत को भी गंभीर रूप से प्रभावित कर सकती है। ओजोन के कारण  दिमाग में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ जाता है। सांस के जरिए जब ये गैस  शरीर में प्रवेश करती है तो इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में क्षति हो सकती है, जो स्मरण शक्ति, ध्यान और निर्णय क्षमता पर असर डालती है। बच्चों और बुजुर्गों में इसका प्रभाव अधिक देखा गया है। ये बुजुर्गों में अल्जाइमर या डिमेंशिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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