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Bone Problem: इस बीमारी के कारण बस करवट बदलने या खांसने से भी टूट सकती हैं हड्डियां, आपको भी तो नहीं है खतरा?

Fri, 03 Apr 2026 06:50 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हमारी हड्डियां हर 10 साल में खुद को नया बनाती हैं, लेकिन 30 की उम्र के बाद हर साल 1% हड्डियों का घनत्व कम होने लगता है। शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिले, कैल्शियम की मात्रा कम हो तो कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है।
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हड्डियों की समस्या - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने हमारी सेहत को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। इसका हड्डियों की सेहत पर भी नकारात्मक असर देखा जा रहा है। लिहाजा कम उम्र के लोगों में जोड़ों में दर्द, हड्डियों की कमजोरी सहित कई अन्य तरह की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।

हड्डियों से संबंधित कई समस्याएं इतनी खतरनाक हो सकती हैं जिसके कारण आपके छींकने-खांसने या फिर करवट बदलने पर भी फ्रैक्चर होने का खतरा बढ़ जाता है। ऑस्टियोपोरोसिस ऐसी ही गंभीर समस्या है जिसका जोखिम बढ़ता जा रहा है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पहले माना जाता था कि हड्डियों का कमजोर होना बढ़ती उम्र की निशानी है, हालांकि अब कम उम्र वाले लोग भी इसका शिकार होते जा रहे हैं। ऑस्टियोपोरोसिस होती क्या है, किन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है और आप इससे कैसे सुरक्षित रह सकते हैं? आइए इसके बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।
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ऑस्टियोपोरोसिस का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
ऑस्टियोपोरोसिस और इसका जोखिम

हेल्थ रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऑस्टियोपोरोसिस एक गंभीर वैश्विक स्वास्थ्य संकट है, जो 200 मिलियन (20 करोड़) से अधिक लोगों को प्रभावित करता है। इतना ही नहीं इसके कारण हर साल 90 लाख से अधिक फ्रैक्चर होते हैं। 50 वर्ष से अधिक आयु की हर तीन में से एक महिला और हर पांच में से एक पुरुष में इसका खतरा देखा जा रहा है।
 
  • ऑस्टियोपोरोसिस धीरे-धीरे आपकी हड्डियों को कमजोर करता जाता है। इससे आपको बिना पता चले ही आपकी हड्डियां टूटने का खतरा बढ़ जाता है। 
  • अगर आपकी उम्र 65 साल से ज्यादा है या आपके परिवार में किसी को ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या रही है, तो खतरा और भी ज्यादा हो सकता है। 
  • वैसे तो 50 से कम उम्र के लोगों में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या होना दुर्लभ है, पर खराब लाइफस्टाइल इसके खतरे को बढ़ाती जा रही है।  
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विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी हो सकती है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
भारत में बढ़ सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हड्डियां भी हमारे शरीर के किसी दूसरे हिस्से की तरह ही जीवित ऊतक हैं। लगभग 30 साल की उम्र तक, हमारा शरीर स्वाभाविक रूप से जितनी मात्रा में हड्डियां खोता है, उससे ज्यादा बनाता है।

35 साल की उम्र के बाद हड्डियों के क्षरण की गति तो थोड़ी बढ़ जाती है पर शरीर द्वारा उन्हें बदलने की गति से कम हो जाती है। इसकी वजह से हड्डियों की डेंसिटी धीरे-धीरे कम होने लगती है।

भारत जैसे देशों में तो कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी एक आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है। ऐसे में यहां हड्डियों की समस्याएं और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी बीमारी का खतरा और अधिक हो सकता है।

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हड्डियों में फ्रैक्चर की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्यों कमजोर होती जा रही हैं हड्डियां?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  युवाओं में आउटडोर गतिविधियों की कमी और स्क्रीन टाइम बढ़ने के कारण शरीर को पर्याप्त धूप नहीं मिल पाती, जिससे विटामिन-डी का स्तर घटता है। विटामिन-डी हमारे शरीर में कैल्शियम के अवशोषण के लिए जरूरी है। 
 
  • इसके अलावा जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक और प्रोसेस्ड फूड का अत्यधिक सेवन शरीर में पोषक तत्वों की कमी पैदा करता है। 
  •  नमक और कैफीन की अधिकता भी कैल्शियम की कमी का कारण बनती है।
  • कई युवा वजन घटाने के लिए बिना विशेषज्ञ की सलाह के डाइटिंग करते हैं, जिससे जरूरी पोषक तत्व नहीं मिल पाते। 
  • नियमित व्यायाम की कमी भी हड्डियों की सेहत के लिए जोखिम बढ़ा देती है। 
  • धूम्रपान और शराब के सेवन की आदत बढ़ती उम्र, हार्मोनल बदलाव और आनुवंशिक कारण भी हड्डियों को कमजोर करने वाले हो सकते हैं।
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ऑस्टियोपोरोसिस के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
करवट लेने से टूट गई हड्डी

पिछले साल चीन में 48 साल की महिला की हड्डी सिर्फ बिस्तर पर करवट लेने से टूट गई। डॉक्टरों के मुताबिक, महिला को विटामिन डी की गंभीर कमी थी, जिससे उसकी हड्डियां बेहद कमजोर हो गई थीं। महिला बचपन से ही धूप से बचती थी, वह कभी आधी बांह की शर्ट नहीं पहनती थी और बाहर निकलने से पहले हमेशा सनस्क्रीन लगाती थी। इससे शरीर में विटामिन-डी और कैल्शियम की गंभीर कमी हो गई थी, जिसके चलते उसे ऑस्टियोपोरोसिस हो गया था।

ग्वांगझो मेडिकल यूनिवर्सिटी के ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जरी विभाग के डायरेक्टर जियांग शियाओबिंग ने बताया, कई लोग सिर से पांव तक खुद को ढककर धूप से बचते हैं, जो सेहत के लिए नुकसानदायक है। धूप से बचना जरूरी है, पर इतना भी नहीं कि आप नई मुसीबत को जन्म दे दें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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