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Organ Donation: अंगदान को बढ़ावा मिले तो बच सकती है लाखों जिंदगियां, केंद्र ने राज्यों को दी ये जरूरी सलाह

Sun, 09 Nov 2025 07:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  •  भारत में हर साल प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों की कमी के कारण करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों का एक बड़ा कारण अंगों की कमी है।
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अंगदान को बढ़ावा देने की पहल - फोटो : Freepik.com
हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के कारण हर साल देशभर में लाखों लोगों की मौत हो जाती है। इसके अलावा देश में मौतों का एक बड़ा कारण समय पर जरूरी अंगों की अनुपलब्धता भी रही है। मेडिकल रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में हर साल प्रत्यारोपण के लिए जरूरी अंगों की कमी के कारण करीब पांच लाख लोगों की मौत हो जाती है। हर दिन कम से कम 15 लोगों की मौतों का एक बड़ा कारण अंगों की कमी है।

अंगदान को महादान माना जाता है। सोचिए, आपकी मृत्यु के बाद आपके अंग किसी और को नई जिंदगी दे सकें, तो क्या इससे बड़ा दान हो सकता है? फिर भी, भारत में हर साल लाखों लोग अंग प्रत्यारोपण के इंतजार में अपनी जान गवां देते हैं। अंग दान करने वालों की संख्या में कमी को इसका बड़ा कारण माना जाता है। 

इस समस्या से निपटने के लिए सरकार समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती रहती है। इसी क्रम में अब केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से सड़क दुर्घटना में जान गंवाने वाले लोगों के अंग और ऊतकों के दान को प्रोत्साहित करने के लिए कदम उठाने को कहा है। 
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ऑर्गन डोनेशन - फोटो : Freepik.com
केंद्र की राज्य सरकारों की सलाह

केंद्र सरकार ने सभी राज्यों से कहा है कि आपात स्थिति में प्रथम प्रतिक्रियाकर्ताओं जैसे पुलिस कर्मियों, एम्बुलेंस चालकों और पैरा-मेडिकल कर्मचारियों के लिए राज्य और जिला स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कराए जाएं ताकि सड़क दुर्घटना पीड़ितों से अंग और ऊतक के दान की सुविधा मिल सके।

राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (नोटो) के निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने एक पत्र में कहा कि, हमारा देश अंगों की गंभीर कमी का सामना कर रहा है, हजारों मरीज विभिन्न अंगों की प्रतीक्षा सूची में हैं। अगर इन्हें समय पर जरूरी अंग प्राप्त हो जाएं तो इससे जान बचाना आसान हो सकता है।

पत्र में कहा गया है कि सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की 'भारत में सड़क दुर्घटनाएं 2023' शीर्षक वाली रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 1.7 लाख लोग मारे गए, जो संभावित अंगदाता हो सकते थे। इनमें से कई संभावित अंगदाता समय पर पहचान न होने और रेफरल न मिलने के कारण अंगदान नहीं कर पाते हैं। 

डॉ.अनिल कुमार ने कहा आपात स्थिति में सबसे पहले सामने आने वाले सहायकर्ता जैसे पुलिसकर्मी, एम्बुलेंस चालक, आपातकालीन चिकित्सा वालों को अगर समय पर प्रतिशिक्षित किया जाए तो अंगदान को बढ़ावा दिया जा सकता है।
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अंग प्रत्यारोपण को बढ़ावा देने की पहल - फोटो : अमर उजाला
18 साल के किशोर के हृदय दान ने बचाई 13 वर्षीय लड़की की जान

भारत में ऑर्गन डोनेशन रेट दुनिया के सबसे कम दरों में से एक है। जागरूकता की कमी, सामाजिक मिथक, धार्मिक भ्रांतियां और प्रक्रिया को लेकर डर को इसका कारण माना जाता है। कई लोग यह नहीं जानते कि मृत्यु के बाद भी उनके अंग जैसे हृदय, लिवर, किडनी, आंखें और फेफड़े किसी और को जीवन दे सकते हैं।

अमर उजाला में सितंबर में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया कि था किस तरह से 18 साल के एक किशोर के हृदय दान से 13 वर्षीय लड़की की जान बचाई गई थी। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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