भारत सहित दुनिया के कई देशों में ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमण का कहर जारी है। देश में पिछले दो हफ्तों से कोरोना के मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है। जनवरी के बाद से पहली बार दैनिक संक्रमण का मामला 10 हजार के आंकड़े को पार कर रहा है। कोरोना के बढ़ते केस ने एक बार फिर से विशेषज्ञों की चिंता काफी बढ़ा दी है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में बढ़ते संक्रमण के लिए ओमिक्रॉन के सब- वैरिएंट को जिम्मेदार माना जा रहा है। अध्ययनों में कोरोना के इस वैरिएंट को काफी अधिक संक्रामकता वाला बताया जाता रहा है, हालांकि इसके कारण लोगों में अन्य वैरिएंट्स की तुलना में गंभीर रोग या वेंटिलेटर पर जाने का खतरा कम है।
संक्रमण के साथ-साथ ठीक हो चुके लोगों में लॉन्ग कोविड का जोखिम भी विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। आमतौर पर अब के डेटा में मुख्यरूप से दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वैरिएंट्स से संक्रमित रह चुके लोगों में लॉन्ग कोविड के मामले देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में एक सवाल यह भी बना हुआ है कि हाल फिलहाल जो लोग ओमिक्रॉन की चपेट में आए हैं उनमें लॉन्ग कोविड होने का कितना खतरा हो सकता है? इस विषय पर किए गए एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बड़ा खुलासा किया है, आइए इस बारे में समझते हैं।