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Obesity Health: अकेले मोटापा इन गंभीर बीमारियों का बढ़ा देता है खतरा, ये स्टडी पढ़कर सन्न रह जाएंगे आप

Fri, 20 Feb 2026 11:24 AM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Obesity Related Health Risks: मोटापा एक ऐसी समस्या है जिससे हमारे देश की एक बड़ी आबादी इससे परेशान है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मोटापा अपने साथ कई तरह की बीमारियों को लेकर आती है। द लैसेंट ने इसी विषय पर एक स्टडी पब्लिश की है, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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मोटापा - फोटो : Adobe stock photos
The Lancet Study On Obesity 2026: हमारे देश की बड़ी आबादी मोटापे की समस्या से जूझ रही है। मोटापा शब्द का नाम सुनते ही दिमाग में सबसे पहले हृदय रोग या डायबिटीज का जोखिम दिमाग में चलने लगता है। हाल ही में 'द लैंसेट' में प्रकाशित फिनलैंड और यूके के 5.4 लाख लोगों पर किए गए एक बड़ी स्टडी ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस अध्ययन के अनुसार मोटापा 925 प्रकार के गंभीर संक्रामक रोगों के खतरे को भी दबे पांव बढ़ा देता है। 

इस स्टडी ने 925 अलग-अलग बीमारियों के कोड्स का अध्ययन किया है। हालांकि सभी 925 के नाम यहां देना संभव नहीं है, लेकिन स्टडी में जिन मुख्य बीमारियों का जिक्र किया गया है उनके बारे में आपको जानना चाहिए।

जब शरीर का वजन बढ़ता है, तो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली सुस्त पड़ जाती है, जिससे व्यक्ति बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। इस स्टडी के अनुसार शरीर में मौजूद 'क्रॉनिक सूजन' मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति को अंदरूनी रूप से इतना कमजोर कर देती है कि सामान्य से दिखने वाले संक्रमण भी उसके लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
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फेफड़े - फोटो : Freepik.com
फेफड़ों और रक्त प्रवाह पर पड़ता है बुरा असर
अध्ययन के मुताबिक, जैसे-जैसे शरीर का वजन बढ़ता है, उसका सबसे पहला असर फेफड़ों की कार्यक्षमता और खून के प्रवाह पर पड़ता है। अधिक वजन होने के कारण श्वसन तंत्र पर दबाव बढ़ता है, जिससे फेफड़े अपनी पूरी क्षमता से काम नहीं कर पाते। इसके चलते निमोनिया और इन्फ्लुएंजा जैसे श्वसन तंत्र के संक्रमणों का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। शरीर में ऑक्सीजन का सही प्रवाह न होना इन बीमारियों को और अधिक घातक बना देता है।

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खून का संक्रमण (प्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock Images
बैक्टीरियल संक्रमण का बढ़ता जोखिम
अध्ययन में पाया गया है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में बैक्टीरियल संक्रमण का खतरा स्वस्थ वजन वाले लोगों की तुलना में कहीं अधिक होता है। इनमें सेप्सिस (खून का संक्रमण), त्वचा और कोमल ऊतकों में होने वाले संक्रमण प्रमुख हैं। रक्त का संक्रमण यानी सेप्सिस एक जानलेवा स्थिति हो सकती है। बढ़ा हुआ वजन शरीर की कोशिकाओं को कमजोर करता है, जिससे बैक्टीरिया आसानी से शरीर के भीतर फैलने लगते हैं और अंगों को नुकसान पहुंचाते हैं।

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यूटीआई - फोटो : Adobe stock photos
मेटाबॉलिक गड़बड़ी और अन्य संक्रमण
वजन बढ़ने से शरीर के भीतर मेटाबॉलिक गड़बड़ी पैदा होती है, जो कीटाणुओं के पनपने के लिए एक अनुकूल वातावरण तैयार करती है। इसके कारण मूत्र मार्ग संक्रमण (UTI) होने की आशंका काफी बढ़ जाती है। शरीर में मौजूद क्रॉनिक सूजन और मेटाबॉलिक असंतुलन बैक्टीरिया और वायरस से लड़ने के बजाय उनके विकास में मदद करते हैं, जिससे सामान्य संक्रमण भी गंभीर रूप ले लेते हैं।
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वेट लॉस जरूरी - फोटो : freepik
बचाव और जागरूकता ही समाधान
अध्ययन में एक और बड़ी बात बताई गई है कि मोटापा शरीर को एक 'प्रो-इंफ्लेमेटरी' अवस्था में डाल देता है, जिससे वैक्सीन का असर भी कम हो सकता है। मोटापे से निपटने के लिए केवल डाइट को सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे एक बीमारी मानकर चिकित्सीय सलाह लेनी चाहिए। अगर आपका वजन नियंत्रित है तो आप न सिर्फ पुरानी बीमारियों से बच सकते हैं, बल्कि अपनी इम्युनिटी को भी मजबूत कर सकते हैं। समय रहते जागना ही आपको इन 900 से अधिक घातक संक्रमणों से बचा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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