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Health Alert: भारत में 'साइलेंट महामारी' बढ़ा रही है सेहत की मुश्किलें, 2050 तक हालात और भी बिगड़ने की चेतावनी

Mon, 26 Jan 2026 09:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

obesity in india: भारत में मोटापा और अधिक वजन वाले लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 में पाया गया कि हर चार में से एक पुरुष या महिला मोटापे का शिकार है, जो गंभीर स्वास्थ्य संकट है।
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भारत में बढ़ता मोटापे का खतरा - फोटो : Adobe stock photos
अधिक वजन या मोटापे की स्थिति मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य संकट बन गई है। भारत में इसका खतरा और भी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में 1 अरब से ज्यादा लोग मोटापे के साथ जी रहे हैं। लगभग हर देश के लिए मोटापा एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बनकर उभरता हुआ देखा जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ये सिर्फ लुक खराब होने की समस्या नहीं हैं, जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनमें डायबिटीज-हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर से लेकर दिमागी क्षमता कमजोर होने तक का खतरा देखा जाता रहा है। 

आंकड़े बताते हैं कि भारत में भी मोटापा और अधिक वजन वाले लोगों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे 5 (NFHS-5, 2019-21) में पाया गया कि हर चार में से एक पुरुष या महिला मोटापे का शिकार है। अगर समय रहते इसे कंट्रोल करने के उपाय न किए गए तो इसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ने की आशंका है। मोटापा के कारण डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर और आर्थराइटिस जैसी बीमारी वाले लोगों की संख्या भी अस्पतालों में तेजी से बढ़ सकती है।
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मोटापे की महामारी को लेकर अलर्ट - फोटो : Adobe stock photos
बढ़ रही है मोटापे की महामारी

द लैंसेट रीजनल हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार भारत में पेट की चर्बी या विसरल फैट का खतरा महिलाओं में 40% और पुरुषों में 12% पाया गया।
 
  • नतीजों से पता चलता है कि 30-49 साल की उम्र की 10 में से 5-6 महिलाएं पेट पर जमा चर्बी की समस्या से पीड़ित हैं।
  • अध्ययनों में पेट पर या आंतों के आसपास जमी चर्बी को सेहत के लिए सबसे ज्यादा नुकसानदायक बताया जाता रहा है।
अमर उजाला से बातचीत में एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ अशरफ हुसैन कहते हैं, मोटापे की समस्या एक तेजी से फैलती महामारी के रूप में बढ़ती जा रही है। शहरों, कस्बों के साथ ये दिक्कत अब गांवों में भी देखी जा रही है, जो देश के स्वास्थ्य परिदृश्य को बदल रही है। जिसे कभी "अमीरों की बीमारी" माना जाता था, वह मोटापा अब हर आय वर्ग में देखा जा रहा है। गड़बड़ खान-पान और सुस्त जीवनशैली के कारण आया यह बदलाव भारत की सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
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पेट की चर्बी बढ़ना खतरनाक - फोटो : Adobe stock
साल 2050 तक हर तीन में से एक भारतीय में मोटापे का संकट

ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज 2021 का अनुमान है कि साल 2050 तक वयस्कों में अधिक वजन और मोटापे में 54% की और बढ़ोतरी हो सकती है। अगर मौजूदा ट्रेंड जारी रहा तो लगभग हर तीन में से एक भारतीय वयस्क मोटापे का शिकार हो सकता है।
 
  • बच्चों और किशोरों में बढ़ती मोटापे की समस्या और भी गंभीर चिंता बनकर उभर रही है। 
  • यूनिसेफ की नॉरिशिंग साउथ एशिया रिपोर्ट 2024 बताती है कि दुनिया भर में अधिक वजन वाले बच्चों की सबसे ज्यादा संख्या भारत में है। 
  • बढ़ता स्क्रीन टाइम, मीठे ड्रिंक्स, पैक्ड स्नैक्स और बाहरी खेलकूद और शारीरिक गतिविधियों में कमी ने बचपन में ही मोटापे के खतरे को बढ़ा दिया है।
  • कम उम्र में मोटापे की स्थिति युवावस्था से पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह पर कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के संकट का कारण बन सकती है।

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बच्चों में अधिक वजन की समस्या - फोटो : Adobe Stock
बच्चे-महिलाएं सभी में बढ़ रहा है खतरा

हाल ही में प्रकाशित हुई अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन 2026 की रिपोर्ट में दिल की बीमारी, स्ट्रोक और कार्डियोवैस्कुलर रोगों के बढ़ते खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि मोटापा और डायबिटीज के मामले बढ़ने के कारण अब लगभग आधे वयस्क दिल की बीमारी के जोखिमों के साथ जी रहे हैं।
 
  • भारत में 30 से 49 साल की आधी से ज्यादा महिलाएं बेली फैट की समस्या का शिकार हैं।
  • ये न सिर्फ उनमें गंभीर क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ाने वाली स्थिति है साथ ही इसका असर प्रजनन स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक रूप से देखा जा रहा है।
  • इसके अलावा विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि 2030 तक भारत में 27 मिलियन से ज्यादा बच्चे और किशोर (5 से 19 साल) मोटापे की चपेट में आ सकते हैं। यह ग्लोबल बोझ का 11 प्रतिशत होगा।
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मोटापा और दिमागी बीमारियों का संबंध - फोटो : Adobe Stock Photo/ Amarujala.com
मोटापा घटा रहा है दिमागी क्षमता

अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि विशेषज्ञों ने चेताया है कि बढ़ते मोटापे की स्थिति किस तरह से हमारी दिमागी क्षमता के लिए खतरा हो सकती है। दुनिया के जाने-माने एक्सपर्ट्स ने कहा है कि ज्यादा वजन होने से डिमेंशिया का खतरा काफी बढ़ जाता है।

मोटापा की स्थिति आपके दिमागी क्षमता को कम करने वाली हो सकती है जिसको लेकर सभी लोगों को पहले से ही सावधानी बरतने की आवश्यकता है। अगर समय रहते वजन कम कर लिया जाए और ब्लड प्रेशर को कंट्रोल कर लेते हैं तो दुनियाभर में  डिमेंशिया के लाखों मामलों को रोका जा सकता है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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स्रोत
Abdominal obesity in India: analysis of the National Family Health Survey-5 (2019–2021) data


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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