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Alert: डायबिटीज वाले 80% मरीजों में देखी जा रही है ये दिक्कत, समय रहते नहीं किया सुधार तो बढ़ सकती है मुसीबत

Sun, 03 Aug 2025 07:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, दुनियाभर में 70-80% टाइप-2 डायबिटीज के मामले मोटापे से जुड़े होते हैं।
  • मोटापे पर नियंत्रण सिर्फ वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि अपने शुगर लेवल, हार्ट-किडनी और पूरी जीवनशैली को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com
भारत में डायबिटीज रोगियों की संख्या साल-दर-साल बढ़ती जा रही है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि साल 2023 तक भारत में मधुमेह से पीड़ित लोगों की संख्या 10.1 करोड़ से अधिक थी। 2050 तक इस आंकड़े के और भी बढ़ने की चेतावनी जारी की गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित जांच के अभाव में बड़ी संख्या में लोग (संभवतः आधे लोग) निदान के बिना ही रह जाते हैं। हाल के वर्षों में 20 से कम उम्र के लोगों में भी इस रोग का खतरा बढ़ता जा रहा है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि डायबिटीज के अधिकतर मामलों के विश्लेषण में पाया गया है कि मोटापाग्रस्त लोगों में इसका जोखिम अधिक देखा जा रहा है। डायबिटीज के 70 फीसदी मरीज मोटापे का शिकार देखे जा रहे हैं। इसका मतलब है कि अगर वजन बढ़ने की समस्या को कंट्रोल कर लिया जाए तो डायबिटीज से बचाव किया जा सकता है।
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मोटापा और डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freeoik.com

मोटापा और डायबिटीज का गहरा संबंध

अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि मोटापा और डायबिटीज का गहरा संबंध है। एक ओर जहां पेट की चर्बी बढ़ती है, वहीं दूसरी ओर शुगर कंट्रोल से बाहर होती जाती है। मोटापा सिर्फ वजन बढ़ने का नहीं, बल्कि मेटाबॉलिक सिस्टम के पूरे संतुलन को बिगाड़ने का संकेत है। यही असंतुलन डायबिटीज का कारण बनता है। 

डॉक्टर कहते हैं, बढ़ी हुई चर्बी, खासकर पेट के आसपास की चर्बी, शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति कम संवेदनशील बना देती है। नतीजतन, ग्लूकोज कोशिकाओं में नहीं जा पाता और खून में शुगर लेवल बढ़ता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन कहता है, दुनियाभर में 70-80% टाइप-2 डायबिटीज के मामले मोटापे से जुड़े होते हैं।
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डायबिटीज का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe stock
क्या कहते हैं डॉक्टर?

दिल्ली स्थित जीटीबी अस्पताल के विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज के 70 फीसदी मरीज मोटापे की समस्या से जूझ रहे हैं। ओपीडी में हर हफ्ते ऐसे करीब 200 नए मरीज सामने आ रहे हैं। अस्पताल के एंडोक्रिनोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. निशांत रायजादा ने अमर उजाला को बताया कि मोटापे की समस्या से जूझने वाले 60-70 फीसदी मरीज डायबिटीज की बीमारी से परेशान हैं। मोटापा होने पर डायबिटीज की बीमारी होने की आशंका अधिक हो जाती है।

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वजन को करें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com
बीएमआई पर दें ध्यान

जिन लोगों का बीएमआई (बॉडी मास इंडेक्स) 30 से ज्यादा है उन्हें मोटा माना जाता है लेकिन भारत में इसका मानक 25 है। इसकी वजह शरीर में फैट का अधिक होना है। बीएमआई की गणना अपने वजन को किलोग्राम में अपनी ऊंचाई के वर्ग से विभाजित कर की जाती है। 

मोटापे की समस्या से बचने के लिए शारीरिक तौर पर सक्रिय रहना जरूरी है। इसके लिए नियमित तौर पर शारीरिक अभ्यास करें। तली-भुनी चीजों का सेवन न करें। खाना भूख से कम खाएं। मीठा कम लें। फल खूब खाएं। पांच-छह साल के बच्चों को शुगर से जुड़े उत्पाद खाने के लिए न दें। ये सुधार आपको डायबिटीज से बचाने में भी मदद करते हैं।
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डायबिटीज और मोटापा दोनों पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
मोटापे पर नियंत्रण बहुत आवश्यक
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोटापे पर नियंत्रण सिर्फ वजन कम करने के लिए नहीं, बल्कि अपने शुगर लेवल, हार्ट-किडनी और पूरी जीवनशैली को स्वस्थ बनाए रखने के लिए जरूरी है। कम उम्र से ही इस तरफ गंभीरता से ध्यान देते रहने की आवश्यकता है।
  • आप खान-पान और लाइफस्टाइल में सुधार करके विशेष लाभ प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए 10-10-10 रूल अपनाएं
  • आहार में उन चीजों को शामिल करें जिनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है जैसे दलिया, ब्राउन राइस, हरी सब्जियां, और प्रोटीन से भरपूर खाना। इन चीजों के सेवन से शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता है।
  • इसके साथ नींद और स्ट्रेस का संतुलन रखें, क्योंकि नींद की कमी और तनाव भी मोटापा और शुगर को बढ़ाते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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