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Alert: धूम्रपान नहीं करते फिर भी सुरक्षित नहीं हैं फेफड़े, ये आदतें चुपचाप पहुंचा रही हैं गंभीर नुकसान

Sun, 03 Aug 2025 07:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वायु प्रदूषण श्वसन संबंधित समस्याओं का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वायु प्रदूषण हर साल लगभग 70 लाख लोगों की जान लेता है। इसमें फेफड़े सबसे पहले प्रभावित होते हैं।
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फेफड़े से संबंधित बीमारियों का खतरा - फोटो : Adobe Stock
फेफड़ों की बीमारियां कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्याओं के रूप में जानी जाती थीं, हालांकि अब कम उम्र के लोग यहां तक कि 30 की उम्र से पहले वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। जब भी फेफड़ों की बीमारी की बात आती है तो इसके लिए सबसे पहले धूम्रपान को जिम्मेदार मान जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अगर आप कभी सिगरेट को छूते भी नहीं, तब भी आपके फेफड़े खतरे में हो सकते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान फेफड़ों के कैंसर का प्रमुख कारण है, जो लगभग 85 प्रतिशत मामलों के लिए जिम्मेदार है, इसलिए तंबाकू का सेवन न करना फेफड़ों के कैंसर को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है। हालांकि फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए यही काफी नहीं है। हमारे आसपास की कुछ सामान्य चीजें जैसे प्रदूषित हवा, अगरबत्ती या किचन का धुआं आपके फेफड़ों को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा रही हैं।

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि इन चीजों का प्रभाव समय के साथ गंभीर हो सकता है और ये फेफड़ों की कार्यक्षमता को कम कर सकती हैं।
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फेफड़े की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में लखनऊ स्थित अस्पताल में कंसल्टेंट पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. रवि प्रकाश सिंह बताते हैं, फेफड़ों की देखभाल का मतलब सिर्फ धूम्रपान से दूरी बना लेना नहीं है। आपको लाइफस्टाइल और अपने आसपास के पर्यावरण और अन्य पारिस्थितिक तंत्रों पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। फेफड़ों को मजबूत बनाने और इन्हें स्वस्थ रखने के लिए रोजाना सांस लेने के व्यायाम, थोड़ी देर वॉक करने की आदत, तरल पदार्थों का सेवन और प्रदूषण से बचने जैसे उपाय जरूरी हैं।

आइए उन स्थितियों के बारे में जानते हैं जो देखने में तो हानिरहित लगती हैं, लेकिन धीरे-धीरे फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती हैं।
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वायु प्रदूषण से फेफड़ों की बीमारी - फोटो : Freepik.com
वायु प्रदूषण के संपर्क में रहना

वायु प्रदूषण श्वसन संबंधित समस्याओं का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, वायु प्रदूषण हर साल लगभग 70 लाख लोगों की जान लेता है। इसमें फेफड़े सबसे पहले प्रभावित होते हैं। प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 और NO₂ जैसी सूक्ष्म कणिकाएं सांस के जरिए फेफड़ों में जाकर सूजन और कैंसर तक पैदा कर सकती हैं।

जिन स्थानों पर प्रदूषण अधिक होता है वहां लंग्स से संबंधित समस्याओं का जोखिम भी अधिक देखा जाता रहा है। 

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फेफड़ों की बीमारी - फोटो : Adobe Stock
घरों का धुआं 

लैंसेट ग्लोबल हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के मुताबिक, लकड़ी, गोबर या कोयले से खाना बनाने वाले घरों में रहने वालों को क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) का खतरा 4 गुना तक बढ़ जाता है। यह धुआं फेफड़ों की वायुमार्ग को नुकसान पहुंचाता  है और सांस लेने की क्षमता को कमजोर बना देता है।

हालांकि सरकार के प्रयासों की मदद से इस तरह के घरेलू धुएं को कंट्रोल करने में विशेष मदद मिली है।
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फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? - फोटो : Freepik.com
इनसे भी होता है खतरा
  • अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन की रिपोर्ट कहती है, रूम फ्रेशनर या सेंटेड कैंडल्स भी आपके फेफड़ों को क्षति पहुंचाने वाले हो सकती हैं। इन उत्पादों में मौजूद फॉर्मलडिहाइड और बेंजीन आदि सांस की बीमारियां बढ़ा सकते हैं।
  • सीडीसी के विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग पैसिव स्मोकिंग (दूसरों के धुएं में सांस लेना) के संपर्क में रहते हैं, उनमें फेफड़ों के कैंसर का खतरा 20–30% तक बढ़ जाता है। बिना सिगरेट पीए भी आप उसी धुएं को अंदर ले रहे होते हैं जो फेफड़ों को नुकसान पहुंचाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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