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लिपिड प्रोफाइल: सिर्फ कोलेस्ट्रॉल की रीडिंग देखकर न हों खुश, दिल की सेहत जानने के लिए इन चीजों पर भी दें ध्यान

Thu, 10 Sep 2026 05:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कोलेस्ट्रॉल की रिपोर्ट में सिर्फ टोटल कोलेस्ट्रॉल की रीडिंग देखना काफी नहीं है। एलडीएल, एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स के साथ ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान जैसी स्थितियां भी हृदय के जोखिमों को प्रभावित करते हैं। 
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लिपिड प्रोफाइल टेस्ट - फोटो : Amarujala.com/AI
दुनियाभर में दिल की बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है, कम उम्र वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। आपने भी कम उम्र में हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट से मौत की खबरें जरूर सुनी होंगी। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों की दिनचर्या, खान-पान गड़बड़ होती जा रही है, इसका दिल की सेहत पर सीधा असर हो रहा है। यही कारण है कि भले ही आपमें अभी कोई दिक्कत न हो या फिर कोई लक्षण न दिख रहे हों, फिर भी नियमित रूप से सेहत की जांच कराते रहना चाहिए।

हार्ट हेल्थ के बारे में जानने के लिए लिपिड प्रोफाइल टेस्ट को सबसे आसान तरीका माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वस्थ व्यस्कों को हर 6 महीने में दिल की सेहत की जांच कराते रहना चाहिए। इससे कोलेस्ट्रॉल,  ट्राइग्लिसराइड्स जैसी कई चीजों की स्थिति का पता चल जाता है।

लिपिड प्रोफाइल की रिपोर्ट हाथ में आते ही ज्यादातर लोगों का ध्यान सबसे पहले टोटल कोलेस्ट्रॉल पर जाता है। अगर यह 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर से कम है तो मान लेते हैं कि दिल पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है। डॉक्टर कहते हैं, सिर्फ कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल में देखकर खुश होने की जरूरत नही हैं, दिल की सेहत के बारे में जानने के लिए कई और बातों का भी ध्यान रखना चाहिए।
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लिपिड प्रोफाइल की समय-समय पर कराएं जांच - फोटो : Freepik.com
दिल की सेहत का कैसे लगाएं अंदाजा?

इसी को लेकर अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि आपकी रिपोर्ट में कोलेस्ट्रॉल नॉर्मल हो फिर भी हार्ट अटैक हो सकता है। 

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, टोटल कोलेस्ट्रॉल को अकेले देखकर हृदय रोगों का खतरा तय नहीं किया जा सकता। एलडीएल, एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स के साथ व्यक्ति की उम्र, ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान और पारिवारिक इतिहास जैसे कई कारक भी जोखिम को प्रभावित करते हैं।
 
  • एलडीएल यानी बैड कोलेस्ट्रॉल धमनियों की दीवारों में जमा होकर उन्हें संकरा कर देता है। 
  • वहीं ट्राइग्लिसराइड्स शरीर में मौजूद एक प्रमुख प्रकार की वसा है। इनका स्तर ज्यादा होने से एलडीएल बढ़ने और गुड कोलेस्ट्रॉल कम कम होने का खतरा हो सकता है।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : freepik.com
सिर्फ टोटल कोलेस्ट्रॉल देखना काफी नहीं

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट में टोटल कोलेस्ट्रॉल के साथ एलडीएल-एचडीएल और ट्राइग्लिसराइड्स से जुड़ी जानकारी शामिल होती है। इसलिए केवल टोटल कोलेस्ट्रॉल देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि दिल कितना सुरक्षित है?
 
  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन भी कहता है कि रिपोर्ट में एलडीएल और बाकी लिपिड प्रोफाइल को भी देखना जरूरी है।

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ब्लड टेस्ट से जानें दिल का हाल - फोटो : Freepik.com
एलडीएल कितना है ये जानिए

एलडीएल धमनियों में जमा होकर एथेरोस्क्लेरोसिस यानी धमनियों में चर्बी जैसी परत बनने की प्रक्रिया को बढ़ा सकता है। इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। वयस्कों में इसका सामान्य स्तर 100mg/dl माना जाता है।
 
  • अगर रिपोर्ट में ये इससे बढ़ा हुआ है तो इससे दिल की सेहत को खतरा हो सकता है। एलडीएल के साथ व्यक्ति की उम्र, डायबिटीज, पहले हार्ट अटैक- स्ट्रोक के साथ दूसरे जोखिमों को देखना भी जरूरी है।
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ट्राइग्लिसराइड बढ़ने की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
ट्राइग्लिसराइड्स को न करें इग्नोर

ट्राइग्लिसराइड्स वैसे तो शरीर में ऊर्जा के भंडारण से जुड़ा फैट है लेकिन इसका स्तर ज्यादा होने पर एलडीएल बढ़ने या गुड कोलेस्ट्रॉल कम होने का खतरा हो सकता है, इससे हृदय की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
 
  • ट्राइग्लिसराइड्स को खानपान में सुधार करके काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि अपने डॉक्टर की सलाह पर जीवन में एक बार लिपोप्रोटीन-ए  की भी जांच जरूर करा लेनी चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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