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महामारी विशेषज्ञ की चेतावनी: कोरोना से भी ज्यादा घातक है यह संक्रमण, करोड़ों लोगों की मौत का बन सकता है कारण

Sat, 02 Oct 2021 04:31 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गंभीर हो सकता है इन्फ्लूएंजा का प्रकोप (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
पूरी दुनिया पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से कोरोना संक्रमण का कहर झेल रही है। पिछले एक दशक में देखे तो कोविड-19, विश्वभर के लिए सबसे घातक बीमारी बनकर सामने आया है। इसका अंदाजा इसी बात लगाया जा सकता है कि पिछले डेढ़ साल में कोरोना संक्रमण के कारण 48.07 लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि इस बीच स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कोरोना से भी घातक संक्रमण के बारे में लोगों को आगाह किया है। संक्रामक रोग विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा समय में कोरोना के साथ फ्लू का भी प्रकोप चल रहा है। फ्लू का संक्रमण कोरोना से ज्यादा घातक हो सकता है, इंसानों के लिए यह एक गंभीर और वास्तविक जोखिम का कारण बना हुआ है।

मिनेसोटा विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंफेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड पॉलिसी के निदेशक प्रोफेसर माइकल ओस्टरहोम कहते हैं, वैश्विक इन्फ्लूएंजा का प्रकोप कोविड महामारी से कहीं अधिक घातक हो सकता है। मॉडल अध्ययनों से संकेत मिलते हैं कि फ्लू का संक्रमण अपने पहले छह महीने में ही 33 मिलियन (3.3 करोड़) से अधिक लोगों की मौत का कारण बन सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक लोगों को इन्फ्लूएंजा संक्रमण को हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। 
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फ्लू का संक्रमण हो सकता है खतरनाक - फोटो : iStock
इन्फ्लूएंजा का खतरा बरकरार
प्रोफेसर माइकल ओस्टरहोम कहते हैं, कोरोना से पहले इन्फ्लूएंजा महामारी मनुष्यों के जोखिम का प्रमुख कारण बनी हुई थी, इसमें फिलहाल कोई बदलाव नहीं आया है। साल 1918 से 2018 के बीच 100 वर्षों के दौरान दुनिया ने चार बार इन्फ्लूएंजा महामारी का प्रकोप झेला है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि इन्फ्लूएंजा महामारी का जोखिम गंभीर और बेहद खतरनाक हो सकता है। इन्फ्लूएंजा की पांचवी महामारी भी आ सकती है, लेकिन कब, इस बारे में फिलहाल कुछ स्पष्ट नहीं कहा जा सकता है। 
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कोरोना से गंभीर हो सकते हैं फ्लू के मामले - फोटो : Pixabay
इन्फ्लूएंजा के कारण हर साल जाती हैं लाखों जानें
विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा कई अन्य संगठनों के साथ-साथ मौसमी फ्लू के खिलाफ टीके विकसित करने के लिए एक रोडमैप के शुभारंभ कार्यक्रम में बोलते हुए ओस्टरहोम ने इन्फ्लूएंजा महामारी के प्रकोप को लेकर चिंता जताई। ओस्टरहोम कहते हैं, ऐसी आशंका है कि इस साल इन्फ्लूएंजा के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
आंकड़ों पर गौर करें तो हर साल औसतन 5 लाख से अधिक लोगों की जान इन्फ्लुएंजा संक्रमण के कारण चली जाती है। निम्न और मध्यम आय वाले देशों में इसका असर ज्यादा देखने को मिलता है। दुनिया ने हर 25 साल में एक बार इन्फ्लूएंजा महामारी झेली है। इसका खतरा अब भी बना हुआ है।

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फ्लू के असरदार टीकों की जरूरत - फोटो : iStock
इन्फ्लुएंजा के खिलाफ प्रभावी टीके की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता है कि समय के साथ इन्फ्लुएंजा का कारण बनने वाले वायरस के वैरिएंट्स में भी बदलाव देखने को मिल रहा है, वहीं वर्तमान फ्लू के टीके पहली बार 1940 के दशक में विकसित की गई तकनीक पर आधारित हैं। डब्ल्यूएचओ में वैक्सीन विशेषज्ञ डॉ मार्टिन फ्रीड कहते हैं कि पिछले 10 वर्षों में टीके के विकास में वृद्धिशील सुधार तो हुआ है लेकिन हमारे पास अभी भी कोई ऐसा एक टीका नहीं है जो लंबे समय तक मजबूती से लोगों को इन्फ्लुएंजा के तमाम वैरिएंट्स से सुरक्षा देता रह सके। इस दिशा में काम करने की आवश्यकता है।
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इन्फ्लुएंजा के गंभीर खतरों से बचाव जरूरी - फोटो : iStock
इन्फ्लूएंजा से लोगों को सुरक्षित रखना आवश्यक
वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह से इन्फ्लुएंजा के गंभीर खतरों के साक्ष्य मिल रहे हैं, इससे बचाव के लिए हमें एक ऐसे वैक्सीन की जरूरत है जो इन्फ्लुएंजा के कारक तमाम वैरिएंट्स को एक साथ लक्षित कर सके और निम्न तथा मध्यम आय वाले देशों में इस्तेमाल किया जा सकता था। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना महामारी से सबक लेते हुए इन्फ्लूएंजा से लोगों के बचाव के लिए तत्काल प्रभावी टीके की आवश्यकता है, जिससे किसी गंभीर खतरे से लोगों को सुरक्षित रखा जा सके।


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नोट:  यह लेख मिनेसोटा विश्वविद्यालय में सेंटर फॉर इंफेक्शियस डिजीज रिसर्च एंड पॉलिसी के निदेशक प्रोफेसर माइकल ओस्टरहोम के संबोधन के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें। 
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