फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Flu Infection: सामान्य माना जाने वाला फ्लू अब बन गया बड़ा खतरा, नए वैरिएंट से इन देशों में मचा हड़कंप

Mon, 19 Jan 2026 07:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अमेरिका और कनाडा में फ्लू की बीमारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टेंशन बढ़ाता जा रहा है। मामलों में बढ़ोतरी के लिए विशेषज्ञ फ्लू के नए वैरिएंट को प्रमुख कारण मान रहे हैं। विशेषज्ञ सभी लोगों को वैक्सीनेशन कराने की सलाह दे रहे हैं।
विज्ञापन
1 of 5
फ्लू के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
आमतौर पर सामान्य मानी जाने वाली सर्दी-खांसी की समस्या और इन्फ्लूएंजा (फ्लू) का संक्रमण अब नई तरह की चिंता बढ़ाते जा रहा है। पिछले साल यूएस-यूके सहित कई देशों में फ्लू के नए वैरिएंट्स का व्यापक असर देखा गया, लिहाजा न सिर्फ अस्पतालों में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी साथ ही कई लोगों की जान भी गई।

दिसंबर से कई देशों में एक बार फिर से फ्लू के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है। पूरे अमेरिका और कनाडा में फ्लू की बीमारी स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टेंशन बढ़ाती जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यहां मामलों में वृद्धि के लिए विशेषज्ञ फ्लू के नए वैरिएंट को प्रमुख कारण मान रहे हैं। 

वैसे तो 9 जनवरी तक के डेटा के अनुसार कनाडा में संक्रमण के मामले कम हो रहे हैं, लेकिन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के डेटा के अनुसार, अमेरिका में अभी फ्लू का पीक आना बाकी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इस बढ़ते खतरे को लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।
विज्ञापन

2 of 5
फ्लू के नए वेरिएंट ने बढ़ाई टेंशन - फोटो : Adobe Stock Photos
सुपरफ्लू वैरिएंट बढ़ा रहा है टेंशन

जनवरी की शुरुआत में, न्यूयॉर्क में एक ही हफ्ते में फ्लू के मामलों ने हड़कंप मचा दी थी। फ्लू के मामलों में इस तेजी के लिए विशेषज्ञ "सुपरफ्लू" या सबक्लेड-के वैरिएंट को जिम्मेदार बताया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर साल इन्फ्लूएंजा वायरस के जो सबवेरिएंट सबसे ज्यादा फैलते हैं, उनमें थोड़ा बदलाव देखा जाता रहा है।
 
  • इस साल, सबसे ज्यादा फैलने वाला वेरिएंट सबक्लेड-के (Subclade-K) है, जो इन्फ्लूएंजा ए3एन2 का एक सबटाइप है।
  • सबक्लेड-के को पहली बार जुलाई 2025 में ऑस्ट्रेलिया में पाया गया था।
  • इस सीजन में अब तक यह अमेरिका में 91.5% तक संक्रमण के लिए जिम्मेदार माना जा रहा है। कनाडा में भी मामलों में बढ़ोतरी के लिए यही जिम्मेदार है।
विज्ञापन

3 of 5
बुखार और फ्लू के अन्य लक्षण - फोटो : Adobe Stock
सबक्लेड-के वेरिएंट के कारण क्या दिक्कतें हो रही हैं?
 
मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जिस तेजी से फ्लू के मामले बढ़े हैं, उससे स्पष्ट होता है कि सबक्लेड-के एक बहुत ज्यादा संक्रामक वेरिएंट साबित हुआ है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर मामलों में संक्रमितों में 104 या 105 डिग्री का तेज बुखार देखा जा रहा हैं, जबकि फ्लू में आमतौर पर हल्का बुखार होता है। यह अपने आप में खतरनाक नहीं है, लेकिन छोटे बच्चों में इससे डिहाइड्रेशन सहित कई अन्य जोखिमों को खतरा हो सकता है।

4 of 5
वैक्सीनेशन की सलाह - फोटो : Freepik.com
वैक्सीन लगवाने की सलाह

फ्लू के बढ़ते संक्रमण और इसके जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को जल्द से जल्द टीकाकरण कराने की सलाह दे रहे हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की गाइडलाइंस के अनुसार फ्लू की वैक्सीन गंभीर बीमारी, हॉस्पिटल में भर्ती होने और मौत का खतरे कम कम करने में मददगार हो सकती है। जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका होता है उनमें संक्रमण के लक्षण हल्के होते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
फ्लू संक्रमण के मामले - फोटो : Freepik.com
फ्लू के कारण जापान में घोषित करनी पड़ी था महामारी

फ्लू पिछले कुछ महीनों में वैश्विक स्तर पर कितनी मुश्किलें बढ़ा चुका है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जापान में फैले संक्रमण के कारण हालात इतनी तेजी से बिगड़े थे कि वहां पर इन्फ्लूएंजा महामारी तक घोषित करना पड़ गया था। 
  • सितंबर-अक्तूबर के महीने में जापान में फैले फ्लू के मामलों के चलते वहां स्थिति काफी बिगड़ गई थी। जापान में फ्लू के प्रकोप के चलते कई शहरों में स्कूल बंद कर दिए गए थे। साथ ही तेजी से बिगड़ते हालात के बीच जापान के सरकार ने देशव्यापी इन्फ्लूएंजा महामारी घोषित कर दी थी।
  • इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और दक्षिणी हेमिस्फेयर के दूसरे देशों में भी सबक्लेड-के वैरिएंट गंभीर चिंता बढ़ाता हुआ देखा जा चुका है। ज्यादातर विशेषज्ञों ने माना था कि नए म्यटेशंस पर फ्लू के मौजूदा टीके इस वायरस पर ज्यादा असरदार नहीं थे। 


-------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें