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कोरोना का कहर: डेल्टा के बाद अब इन दो नए वैरिएंट्स ने बढ़ाई मुसीबत, डब्ल्यूएचओ ने किया आगाह

Fri, 03 Sep 2021 12:13 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
जुलाई-अगस्त के महीने तक कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को दुनियाभर में वैज्ञानिक सबसे खतरनाक मान रहे थे। भारत में आई दूसरी लहर में तबाही मचाने के बाद कोरोना का यह वैरिएंट कई अन्य देशों के लिए बड़ी मुसीबत साबित हो रहा था। डेल्टा वैरिएंट से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन कर ही रहे थे कि पिछले दिनों सामने आए दो नए वैरिएंट्स ने वैज्ञानिकों को और गंभीर संकट में डाल दिया है। बीते दिनों कोरोना के दो नए वैरिएंट्स- साउथ अफ्रेकिन वैरिएंट सी.1.2 और म्यू (बी.1.621) ने दुनिया के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। कई रिपोर्टस में दावा किया जा रहा है कि यह दोनों वैरिएंट्स सबसे संक्रामक माने जा रहे डेल्टा वैरिएंट्स से भी अधिक घातक हो सकते हैं। 



विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि वह कोरोना के इन नए वैरिएंट्स की प्रकृति पर नजर रखे हुए है। म्यू को 'वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट' के रूप में वर्गीकृत किया गया है। डब्ल्यूएचओ ने कहा कि म्यू वेरिएंट में ऐसे म्यूटेशन देखे गए हैं जो शरीर में वैक्सीनेशन से बनी प्रतिरोधक क्षमता को चकमा दे सकते हैं,  साउथ अफ्रेकिन वैरिएंट भी कमोबेश ऐसी ही प्रकृति वाला बताया जा रहा है। आइए आगे की स्लाइडों में इन दोनों नए वैरिएंट्स के बारे में विस्तार से जानते हैं। 
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कोरोना का म्यू वैरिएंट (सांकेतिक) - फोटो : istock
कोरोना का म्यू वैरिएंट
कोरोना का म्यू वैरिएंट सबसे पहले इस साल जनवरी में कोलंबिया में सामने आया था। म्यू वैरिएंट को फिलहाल डब्ल्यूएचओ ने वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसका मतलब है कि स्वास्थ्य संगठन चरणबद्ध तरीके से इस वैरिएंट की प्रकृति की निगरानी करेगी। डब्ल्यूएचओ ने अपने साप्ताहिक महामारी बुलेटिन में इस नए वैरिएंट के बारे में बताया कि इसमें कई ऐसे म्यूटेशन देखे गए हैं जो टीकों के प्रतिरोध को मात देने की क्षमता रखते हैं, हालांकि इस बारे में विस्तार से जानने के लिए अध्ययन किया जा रहा है। डब्ल्यूएचओ ने अपने साप्ताहिक बुलेटिन में बताया कि यह नया वैरिएंट प्रतिरक्षा प्रणाली को मात दे सकता है। डेल्टा के बढ़ते मामलों के बीच म्यू वैरिएंट ने चुनौतियां और बढ़ा दी हैं।   
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कोरोना का वैरिएंट सी.1.2 (सांकेतिक) - फोटो : iStock
साउथ अफ्रीकन वैरिएंट सी.1.2
डेल्टा के बढ़ते मामलों के बीच पिछले दिनों वैज्ञानिकों ने कोरोना के एक नए वैरिएंट सी.1.2 के बारे में लोगों को सूचित किया था। दक्षिण अफ्रीका में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर कम्युनिकेबल डिजीज (एनआईसीडी) और क्वाज़ुलु-नेटल रिसर्च इनोवेशन एंड सीक्वेंसिंग प्लेटफॉर्म (केआरआईएसपी) के शोधकर्ताओं ने बताया है कि इसी साल मई में सबसे पहले यह वैरिएंट दक्षिण अफ्रीका में पाया गया है। अगस्त के मध्य तक कोरोना का अत्यधिक संक्रामक यह वैरिएंट कई अन्य देशों में भी फैल चुका है। वैज्ञानिकों ने बताया कि इस वैरिएंट में N440K और Y449H जैसे म्यूटेशनों का पता चला है। यह म्यूटेशन शरीर में बनीं प्रतिरक्षा को आसानी से मात देने की क्षमता रखते हैं। इस आधार पर इस नए वैरिएंट को वैज्ञानिक काफी चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं। 

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कोरोना ने बढ़ाई चिंता - फोटो : iStock
क्या भारत में भी इन वैरिएंट्स के केस हैं?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी डेटा में फिलहाल भारत में इन दोनों वैरिएंट्स के मिलने की सूचना नहीं है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को भी इन वैरिएंट्स के खतरे को लेकर विशेष सावधान रहने की आवश्कता है। चूंकि दोनों वैरिएंट्स में ऐसे म्यूटेशनों का पता चला है जो कि शरीर में बनी प्रतिरोधक क्षमता को मात दे सकते हैं, ऐसे में इनको लेकर अलर्ट रहना बेहद आवश्यक है। देश में अब भी बड़ी आबादी को वैक्सीन की एक भी डोज नहीं लगी है, यह चिंता को और भी बढ़ा देती है।  
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कोरोना से बचाव बेहद जरूरी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कैसे रहें इन नए वैरिएंट्स से सुरक्षित?
लखनऊ में कोरोना के मामलों पर विशेष नजर रखने वाले डॉ अफजल अंसारी कहते हैं, फिलहाल इन वैरिएंट्स की प्रकृति को जानने के लिए विस्तृत अध्ययन की आवश्यकता है। इन सब के बीच देश में दूसरी लहर के बाद फिर से व्यवसाय और स्कूल खोल दिए गए हैं, लोगों में कोरोना का डर एक बार फिर से कम देखा जा रहा है। यह लापरवाही गंभीर साबित हो सकती है। कोरोना से बचाव के लिए सभी लोगों को लगातार मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन करते रहना आवश्यक है। इन नियमों का पालन तब तक करते रहने की आवश्यकता है जबतक कोरोना के मामले बिल्कुल खत्म नहीं हो जाते। हमें हमेशा ध्यान रखना होगा कि अभी बस कोरोना के मामले कम हुए हैं, संक्रमण का खतरा कम नहीं हुआ है। 


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नोट:
यह लेख विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के साप्ताहिक महामारी बुलेटिन में साझा की गई जानकारियों और तमाम मीडिया रिपोर्टस के आधार पर तैयार तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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