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डिजिटल युग में हम सोशल तो हैं, लेकिन सिर्फ कंप्यूटर पर

Fri, 09 Feb 2018 06:12 PM IST
मानसी मल्होत्रा
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working on laptop
सोशल मीडिया पर ही रिश्ते निभाने की आदत हमें एकाकी तो बनाती ही है, स्वास्‍थ पर भी गंभीर असर डालती है। अगर आप चाहते हैं कि रिश्ते और सेहत दोनों बने रहें, तो सामाजिक बनिए। लंदन यूनिवर्सिटी में हुआ एक शोध के मुताबिक, नींद को प्रभावित करने वाले कारकों में खानपान में बदलाव, व्यायाम की कमी, दैनिक आदतों में परिवर्तन प्रमुख कारक हैं। लेकिन अगर आप सामाजिक नहीं हैं, तो भी आपकी नींद प्रभावित होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि जो लोग दोस्तों, परिवार व समाज के लोगों के साथ समय बिताते हैं, मेलजोल बनाए रखते हैं, उन्हें नींद भी अच्छी आती है और खुशी का अहसास भी होता है।
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peace of mind
दिमाग होता है शांत 

अगर हम समाज में घुलते-मिलते नहीं हैं, लोगों से बातचीत नहीं करते, तो अपनी परेशानी, मन की बात या लक्ष्य आदि को किसी के साथ साझा नहीं कर पाते और तनाव में रहने लगते हैं। सामाजिकता के भाव की कमी के कारण अनिद्रा, बेचैनी, चिंता, चिड़चिड़ापन जैसी समस्या को भी बढ़ाता है। जबकि समाज में उठने-बैठने वाले, रिश्तों को समय देने वाले लोग अपनी समस्याओं या मन की बात को एक-दूसरे से साझा करते हैं, तो तनाव कम होता है व दिमाग भी शांत रहता है।
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Friendship
रिश्तों में आती है मजबूती

सोशल मीडिया पर रिश्ते निभाने की बजाय यदि आप अपने दोस्तों, परिवार, सहकर्मियों को समय देते हैं, तो इससे रिश्तों में मजूबती आती है, मन प्रसन्न रहता है। प्रसन्न रहने से कार्यशैली भी सुधरती है और कुछ नया करने की ललक भी पैदा होती है। इससे उलट अगर आप एकाकी जीवन बिताएंगे, तो आपका व्यवहार भी खराब होगा और आप अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएंगे। 

यूनिवर्सिटी ऑफ मैक्सिको का एक शोध कहता है कि समाज में मेल-जोल बनाए रखने, दोस्तों, परिवार के साथ समय बिताने वाले लोग, अकेलेपन का शिकार लोगों के मुकाबले ज्यादा खुश रहते हैं व लंबी उम्र जीते हैं। समाजिकता का भाव रखने वाले लोगों का व्यवहार भी कोमल होता है और वह किसी भी परेशानी का हल भी आसानी से खोज लेते हैं। उन्हें गुस्सा भी कम आता है और बीमारियों का खतरा भी कम होता है। 
 
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सौहार्द बिगाड़ने वाली पोस्ट शेयर न करें
बेहतर बनना सीखते हैं

अगर आप किसी से मिलने-जुलने, बात करने में कंजूसी करते हैं, तो इससे आपके भीतर कुछ नया करने की ललक पैदा नहीं होती। आप अपनी दुनिया में ही सिमटकर खुद को बेहतर समझते रहते हैं। जबकि आपमें और सुधार की जरूरत होती है। आप समाज में उठेंगे-बैठेंगे, तो आपको पता चलेगा कि आपको खुद में क्या बदलाव करने की जरूरत है। अपने व्यक्तित्व को निखारने के लिए आप क्या नया कर सकते हैं, अपने लक्ष्य को कैसे प्राप्त किया जा सकता है। सामाजिक होना आपकी छवि को तो सुधारता ही है, परेशानियों को भी कम करता है।
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