सच बोलना है लाभकारी
हिंदुस्तान में प्रचलित सभी धर्मों में झूठ बोलने को पाप माना गया है। ऋग्वेद में कहा गया है कि 'सत्कर्मशील व्यक्ति को सत्य की नौका पार लगाती है। दुष्कर्मी, संयमहीन व छल-कपट करने वाले व्यक्ति की नौका मझधार में डूबकर उसके जीवन को निरर्थक कर देती है।' महर्षि चरक ने आचार रसायन में कहा है, 'सत्यवादी, क्रोध रहित, मन, कर्म व वचन से अहिंसक तथा विनय के पालन से मानव शारीरिक, मानसिक व आत्मिक रोगों से मुक्त रहता है। उन्होंने इसे सदाचार रसायन कहा है। सत्य-सदाचार जैसे तत्वों को त्यागने के कारण ही मानव अनेक रोगों का शिकार बनता है।'
झूठ बोलना एक ऐसा गुण है, जिसके लिए हमें बहुत कुछ प्रयास करने होते हैं, जबकि सत्य बोलने के लिए हमें कुछ भी करने कीजरूरत नहीं होती। सच बोलेंगे, तो उसे बनाए रखने के लिए मेहनत नहीं करनी होगी। झूठ बोलेंगे, तो उसकी देखभाल करने में समय और दिमाग दोनों खर्च होंगे। झूठ बोलना शुरुआत में तो, सुख प्रदान करता है, लेकिन भविष्य में इसे छिपाने के लिए बार-बार और झूठ का सहारा लेना पड़ता है, जिससे नई-नई परेशानियां सामने आती हैं।