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Disease X: वैज्ञानिकों ने 'अज्ञात महामारी' को लेकर जताई आशंका, 2018 में ही डब्ल्यूएचओ ने कर दिया था अलर्ट

Wed, 09 Aug 2023 12:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डिजीज एक्स का जोखिम और तैयारियां - फोटो : istock
पिछले दो दिनों से सोशल मीडिया पर 'डिजीज एक्स' ट्रेंड कर रहा है। यह अज्ञात बीमारी इन दिनों काफी चर्चा में है, रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि संभवत: यह नई महामारी का संकेत भी हो सकती है। फिलहाल अब तक यह ज्ञात नहीं है कि कौन से वायरस या रोगजनक के कारण यह बीमारी हो सकती है, क्या यह भी जानवरों से मनुष्यों में खतरा बनेगी और शायद एक और महामारी का कारण रूप भी ले सकती है?

इस अज्ञात और अप्रत्याशित महामारी के लगातार बढ़ते खतरे के बीच ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने इससे निपटने के लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं।  

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूके में 200 से अधिक वैज्ञानिकों की टीम ने इसके लिए वैक्सीन पर काम भी शुरू कर दिया है। यूके हेल्थ सिक्योरिटी एजेंसी और वैक्सीन निर्माताओं का कहना है कि हम 100 दिनों के भीतर इसके लिए सुरक्षात्मक टीके तैयार कर लेंगे, ताकि हमें एक बार फिर से कोविड-19 जैसी गंभीर समस्या का सामना न करना पड़े।
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नई संक्रामक बीमारी को लेकर चिंता - फोटो : iStock
डिजीज एक्स काे बारे में जानिए

जिस अज्ञात "डिजीज एक्स" को लेकर वैज्ञानिकों की टीम में चर्चा है, असल में वह कोई नया शब्द नहीं है। साल 2018 की भी एक रिपोर्ट में इस बात का जिक्र मिलता है कि डिजीज एक्स- हमारी दुनिया के लिए सबसे बड़ा संक्रामक खतरा बन सकती है। इतना ही नहीं कोविड-19 महामारी शुरू होने से लगभग दो साल पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ( डब्ल्यूएचओ) ने डिजीज एक्स को अपनी प्राथमिकता वाली बीमारियों की ब्लूप्रिंट सूची में जोड़ा था। यह उन बीमारियों की सूची थी जिनके लिए स्वास्थ्य संगठन ने त्वरित अनुसंधान और विकास की तत्काल आवश्यकता निर्धारित की थी। 
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अपरिभाषित प्रकृति वाली बीमारी - फोटो : Pixabay
डिजीज एक्स- क्या है वैज्ञानिकों की राय

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम कहती है, अस्पष्ट और अपरिभाषित प्रकृति के कारण इस बीमारी का उपनाम "डिजीज एक्स" रखा गया है। यह भविष्यवाणी करना कि कौन सा संभावित रोगजनक अगली महामारी को ट्रिगर करेगा, यह एक पहेली बनी हुई है। शोधकर्ताओं का इसको लेकर अलग-अलग मत है।

एक अध्ययन से पता चला है कि जलवायु परिवर्तन और जनसंख्या, नई महामारी की आशंका को बढ़ा रहे हैं। शहरीकरण और बदलते पारिस्थितिकी तंत्र ने क्रॉस-प्रजाति वायरल ट्रांसमिशन को बढ़ावा दे दिया है, बर्ड फ्लू इसका उदाहरण हैं। 
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कैसी होगी ये नई महामारी? - फोटो : istock
महामारी से बचाव को लेकर भी तैयारी

वैज्ञानिकों का कहना है, हम उन वायरस और बैक्टीरिया पर गौर कर रहे हैं, जिनके बारे में पहले से पता है कि वे खतरा पैदा कर सकते हैं। इन रोगजनकों के कारण होने वाली संभावित बीमारी को लेकर मौजूदा टीकों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन भी किया जा रहा है, जिससे इसके संभावित जोखिमों को कम करने में मदद मिल सके। 

मिडिल ईस्ट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम कोरोना वायरस (MERS-COV) और सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम (SARS), ये दोनों कोरोना वायरस पिछले दो दशकों के दौरान पहले ही प्रकोप का कारण बन चुके हैं। इन खतरों को ध्यान में रखते हुए हमें भविष्य की चुनौतियों को लेकर सतर्क रहने की आवश्यकता है। उम्मीद है कि हम संभावित महामारी के पहले से इससे बचाव के लिए सुरक्षात्मक उपाय कर लेंगे।


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स्रोत और संदर्भ
UK launches vaccine centre to help tackle new pandemic

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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