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जानना जरूरी: क्या पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है? अध्ययन में सामने आई यह जानकारी

Mon, 10 Jan 2022 05:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : iStock
पिछले एक दशक में दुनियाभर में जिन बीमारियों के मामले सबसे ज्यादा देखने को मिले हैं, हृदय रोग उनमें से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक हृदय रोग (सीवीडी) विश्वस्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हैं। साल 2019 में सीवीडी से अनुमानित 17.9 मिलियन लोगों की मृत्यु हो गई, जो कुल वैश्विक मौतों का 32 फीसदी है। इनमें से 85 फीसदी मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं। सीवीडी से होने वाली मौतों के तीन चौथाई से अधिक मामले निम्न और मध्यम आय वाले देशों में होते हैं। वैसे तो पहले हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी माना जाता था, हालांकि पिछले कुछ वर्षों में कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले देखने को मिले हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक जीवनशैली और आहार में गड़बड़ी को हृदय रोगों का प्रमुख कारण माना जाता है, यह किसी को भी हो सकता है। पर क्या लिंग के आधार पर हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है? क्या पुरुषों की तुलना में महिलाएं हृदय रोग की अधिक शिकार होती हैं? आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं, इस बारे में अध्ययन क्या कहते हैं?
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महिलाओं में हृदय रोगों के मामले - फोटो : iStock
महिलाओं में हृदय रोगों का खतरा अधिक
'न्यूरोलॉजी जर्नल' में प्रकाशित एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोग का जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा इसका सोच और याददाश्त पर भी महिलाओं में नकारात्मक असर होने की आशंका अधिक होती है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी की सदस्य और अध्ययन की लेखकों में से एक मिशेल एम. मील्के कहती हैं, इस अध्ययन से पता चलता है कि मिडलाइफ़ कार्डियोवैस्कुलर स्थितियां और जोखिम कारक, संज्ञानात्मक क्षमता से भी संबंधित होती हैं, इसका खतरा महिलाओं में अधिक देखा गया है।
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हृदय रोगों के मामले - फोटो : Pixabay
संज्ञानात्मक क्षमता पर असर
अध्ययन में 50- 69 वर्ष की आयु वाले 1,857 लोगों को शामिल किया। तीन साल तक हर 15 महीने में प्रतिभागियों की स्थिति का मूल्यांकन किया गया, जिसमें भाषा, मस्तिष्क के कार्य और सोचने-निर्णय लेने की क्षमता पर विशेष ध्यान दिया गया। इनमें से 1,465 या करीब 79 प्रतिशत प्रतिभागियों में कम से कम एक हृदय रोग या उससे संबंधित जोखिम कारक थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं के कारण संज्ञानात्मक क्षमता पर प्रभाव को जोखिम महिलाओं में अधिक देखने को मिला।
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कार्डियोवैस्कुलर डिजीज और संज्ञानात्मक क्षमता - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि मधुमेह, हृदय रोग और डिस्लिपिडेमिया जैसे कार्डियोवैस्कुलर समस्याओं का संज्ञानात्मक क्षमता में गिरावट का असर पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक पाया गया। प्रोफेसर मील्के कहती हैं, इस अध्ययन में लिंग आधारित हृदय रोगों के जोखिमों और इसके संज्ञानात्मक क्षमता पर असर के बारे में समझने को मिलता है। इन स्थितियों को स्पष्ट करने के लिए फिलहाल और अधिक अध्ययनों की आवश्यकता हो सकती है। फिलहाल, इस अध्ययन से मिले साक्ष्य महिलाओं को हृदय रोगों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की ओर इशारा करते हैं।

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स्रोत और संदर्भ
Sex Differences in the Association Between Midlife Cardiovascular Conditions or Risk Factors With Midlife Cognitive Decline

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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