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नवरात्रि व्रत: क्या डायबिटीज और बीपी के मरीज रख सकते हैं व्रत? क्या सावधानियां जरूरी

Sun, 11 Oct 2026 05:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Navratri Fasting: डायबिटीज और हाई बीपी के मरीजों को नवरात्रि व्रत से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए। उपवास के दौरान ब्लड शुगर और बीपी पर ध्यान देना जरूरी है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और संतुलित फलाहार जरूरी है। चक्कर, पसीना, कमजोरी या भ्रम होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह ले लें।
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नवरात्रि का व्रत - फोटो : Amarujala.com/AI
नवरात्रि के पर्व की पूरे देश में धूम देखी जा रही है। जगह-जगह मां के पंडाल सजाए गए हैं। आस्था के इस खास समय में लोग मां दुर्गा की पूजा-अर्चना करते हैं और नौ दिनों तक व्रत रखते हैं। कोई पूरे दिन बिना अन्न के रहता है, तो कोई फलाहार करता है या एक समय भोजन करता है। सेहत के लिहाज से तो व्रत को फायदेमंद माना जाता है, हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को पहले से कोई क्रॉनिक बीमारी जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर जैसी दिक्कत है उन्हें व्रत को लेकर सावधानी बरतना बहुत जरूरी है।

स्वस्थ व्यक्ति अपनी  दिनचर्या के अनुसार व्रत रख सकता है, लेकिन डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए यह थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। उपवास के दौरान भोजन का समय, खाने के बीच में गैप, पानी कम पीना और और दवाओं के शेड्यूल में गड़बड़ी का सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है।

अगर आपको भी डायबिटीज या शुगर की दिक्कत है और आप व्रत रखना चाह रहे हैं तो पहले कुछ सावधानियां जान लेना जरूरी है।
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व्रत को लेकर सावधानियां - फोटो : Adobe Stock Photos
डायबिटीज-बीपी के दौरान व्रत को लेकर रखें सावधानियां 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज के मरीजों में लंबे समय तक कुछ न खाने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव की दिक्कत हो सकती है, वहीं गलत खानपान या दवा छोड़ने से शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो सकता है। इसी तरह बीपी के मरीजों को ज्यादा समय तक डिहाइड्रेशन के कारण और ब्लड प्रेशर लो होने की परेशानी हो सकती है। इसलिए व्रत रखने से पहले अपनी सेहत और दवाओं को ध्यान में रखना जरूरी है।
 
  • अगर आपको डायबिटीज है, आप इंसुलिन या दवाएं लेते हैं तो बिना डॉक्टरी सलाह के व्रत शुरू न करें। 
  • टाइप-1 डायबिटीज या अक्सर शुगर लेवल कंट्रोल न रहने की स्थिति में ज्यादा देर कुछ न खाना-पीना आपके लिए मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकता है।
  • बीपी के मरीजों को भी नियमित रूप से दवा लेते रहने की जरूरत होती है। दवाओं में गैप, शरीर में पानी की कमी होने से आपके लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। 
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डायबिटीज का करते रहें जांच - फोटो : Freepik.com
व्रत के दौरान रखें बीपी-शुगर लेवल पर नजर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डायबिटीज-बीपी के मरीज अगर व्रत कर रहे हैं तो इस दौरान ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर की निरंतर जांच करते रहें।
 
  • कंपकंपी-पसीना, चक्कर आना, धड़कन तेज होना, लो ब्लड शुगर का संकेत हो सकता है। वहीं, बहुत ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब और असामान्य सी थकान को हुई शुगर से जुड़ा लक्षण माना जाता है। ये दोनों ही स्थितियां सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं। इसे कंट्रोल में रखने के लिए प्रयास करें।
  • अगर ब्लड शुगर 70 mg/dL से कम हो जाए, तो तुरंत डॉक्टर की बताई दवाएं लें। बीपी के मरीजों को भी चक्कर, कमजोरी या बेहोशी जैसा महसूस होने पर रक्तचाप की जांच करनी चाहिए।
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व्रत में खान-पान का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
खान-पान को लेकर बरतें सावधानी

डायबिटीज-ब्लड प्रेशर के दौरान व्रत कर रहे हैं तो इस दौरान अपने खान-पान पर ध्यान देते रहना जरूरी है। निर्जल व्रत दोनों ही स्थितियों में सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।
 
  • व्रत में आलू, साबूदाना, तली हुई पूरियां और मीठे पकवान बहुत ज्यादा खाने से बचें। इनमें हाई कार्बोहाइड्रेट और हाई कैलोरी होती है जिससे शुगर बढ़ने का खतरा हो सकता है। इसकी जगह फल, बिना चीनी के दही, थोड़ी मात्रा में मेवे का सेवन किया जा सकता है।
  • डायबिटीज में फलों का चुनाव भी सावधानी से करें जिससे अचानक शुगर न बढ़ने पाए। 
  • फलों का जूस पीने के बजाय साबुत फल खाएं। 
  • बीपी के मरीज सेंधा नमक को भी बहुत ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल न करें, क्योंकि उसमें भी सोडियम होता है। ज्यादा नमक रक्तचाप बढ़ा सकता है।

व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी न होने पाए इस बात का खास ध्यान रखें। व्रत पूरा करते समय एक साथ बहुत ज्यादा खाना खाने के बजाय संतुलित मात्रा में भोजन करें। व्रत के दौरान किसी भी समय सेहत गड़बड़ लगे तो तुरंत डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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