मिर्गी उन स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है जिसको लेकर देश में कई प्रकार का भ्रम और अंधविश्वास देखने को मिलता रहा है। मिर्गी के शिकार लोगों को दौरे पड़ने की दिक्कत हो सकती है, ग्रामीण क्षेत्रों में जानकारी के अभाव में अब भी लोग इसके लिए झाड़-फूंक जैसे उपाय करते रहते हैं। मिर्गी के इसी भ्रम को दूर करने और लोगों को इस बारे में जागरूक करने के लिए हर साल 17 नवंबर को नेशनल एपिलेप्सी डे मनाया जाता है।
डॉक्टर कहते हैं, मिर्गी की दिक्कत को इलाज के माध्यम से ठीक किया जा सकता है, झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्करों में पड़ना रोग की जटिलताओं को समय के साथ बढ़ाने का कारण हो सकता है।
मिर्गी, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (न्यूरोलॉजिकल) से संबंधित विकार है जिसमें मस्तिष्क की गतिविधि असामान्य हो जाती है। इसके कारण दौरे पड़ने, असामान्य व्यवहार, संवेदनाओं में कमी और कभी-कभी बेहोशी की समस्या भी हो सकती है। चूंकि यह एक न्यूरोलॉजिकल विकार है, ऐसे में इसका समय पर उपचार करके रोग की गंभीरता को कम करने और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिल सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मिर्गी के इलाज के लिए झाड़-फूंक और अंधविश्वास के चक्करों में न पड़ें, यह लाइलाज नहीं है, दवाइयों और उपचार के अन्य माध्यमों से इसे ठीक किया जा सकता है। आइए इस बारे में आगे विस्तार से समझते हैं।