डॉक्टर्स की सेहत का कौन रखेगा ध्यान?
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क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
राजधानी दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ रविंद्र चावला कहते हैं, सर्जरी के लिए औजारों को पकड़ने वाले मजबूत हाथ भी कई बार खामोशी में कांप सकते हैं। हमें एक बार खुद को उनकी जगह पर रखकर, डॉक्टर्स के दर्द को भी समझना चाहिए।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल, नई दिल्ली में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ और सर्जन डॉ. निरंजन हिरेमथ कहते हैं पिछले कुछ वर्षों में, हमने स्वास्थ्य सेवाओं में नाटकीय रूप से बदलाव देखा है, खासकर कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौरान, जिसने कई प्रकार की चुनौतियों को बढ़ा दिया था।
डॉक्टरों को भी देखभाल, करुणा और मानसिक सहानुभूति की आवश्यकता होती है। बर्नआउट एक साइलेंट पर गंभीर समस्या है, विशेष रूप से कार्डियोलॉजी जैसी उच्च दबाव वाले सेक्शन में, जहां हर सेकंड मायने रखता है। स्टेथोस्कोप और मशीनों से परे, हम इंसान हैं, किसी की मां-पिता, बेटे-बेटियां और पति-पत्नि, जो न केवल अपने रोगियों का हमेशा ख्याल रखते हैं बल्कि अपने लिए भी जिम्मेदारी का बोझ उठाते हैं।
इस साल के थीम केयरिंग फॉर केयरगिवर्स का मतलब है यह पहचानना कि सहानुभूति दोनों दिशाओं में होनी चाहिए। हमें ऐसी संस्कृति को बढ़ावा देना होगा जहां डॉक्टर्स को न केवल मरीजों के जीवन को बचाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता हो, बल्कि बिना किसी कलंक के भाव के वो भी अपनी समस्याओं के बारे में भी लोगों से बोल सकें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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