डाॅक्टरों के साथ मारपीट के बढ़ते मामले
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डाॅक्टर के खिलाफ हिंसा के बढ़ते मामले
हम डाक्टरों के सम्मान में 1 जुलाई को नेशनल डॉक्टर्स डे मनाते हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में डॉक्टर्स की स्थिति खतरे में हैं।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 75 फीसदी डॉक्टरों को अपने कार्य स्थल पर किसी न किसी तरह की हिंसा का सामना करना पड़ा। मरीज या उनके परिवार के लोग कभी भी डाॅक्टरों पर भड़क जाते हैं। ऊंची आवाज में बात करते हैं, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं, धमकी देते हैं और हाथ तक उठा देते हैं।
कोविड काल में जहां डॉक्टरों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लगातार मरीजों की सेवा की तो उन्हीं दिनों में डॉक्टरों के साथ सबसे ज्यादा हिंसा के मामले भी सामने आए। कोविड वार्ड में कई मरीजों ने डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ के साथ दुर्व्यवहार किया। जो मेडिकल टीम कोविड जांच के लिए फील्ड पर उतरी, उन्हें पिटाई और पथराव झेलना पड़ा।
डाॅक्टर के तनाव को नहीं समझते मरीज
डॉक्टरों के साथ होने वाली हिंसा पर मोहम्मद अरशद (पीजी रेजिडेंट, मनश्चिकित्सा विभाग) कहते हैं हम अगर डॉक्टर बने हैं तो इसका मतलब यह नहीं कि हम मरीज या उनके अटेंडेंट से मार खाने के लिए काम कर रहे हैं। एक डॉक्टर कई दिनों तक बिना सोए काम करता है। ऐसे में डॉक्टर पर मानसिक दबाव कितना होता है, ये बात आम लोगों को नहीं पता होती।
इसी मेंटल प्रेशर के साथ वह रोज मरीजों और उनके तीमारदारों को डील करते हैं।
हमारे लिए मरीजों का इलाज करना सिर्फ हमारे लिए पेशेवर काम नहीं है, यह भावनात्मक संतुष्टि भी देता है। मरीज को ठीक करने के लिए हम जी जान लगा देते हैं, ऐसे में बिना कुछ सोचे-समझे हमपर गुस्सा निकालना कहां जायज है? हमारी भी एक सीमा होती है, हम ईश्वर तो नहीं हैं न।
हिंसा के कारण डॉक्टरों की इच्छाशक्ति पर होता है नकारात्मक असर
लखनऊ स्थित एक चिकित्सा संस्थान में जूनियर रेजिडेंट डाॅ. अरफुल खान के मुताबिक, समाज में अब इतनी नकारात्मकता आ गई है कि लोगों को सकारात्मक चीजें दिखती ही नहीं। जैसे जहां मैं काम कर रहा हूं, वहां ओपीडी मुफ्त है लेकिन फिर भी बहुत सारे मरीजों का रवैया डॉक्टरों के साथ सही नहीं होता, फिर भी डॉक्टर अपनी ड्यूटी करता रहता है। लेकिन घंटों लगातार काम करने के बाद अगर कोई मरीज या तीमारदार डॉक्टर पर हाथ उठा देता है तो इससे डॉक्टर का दिल टूट जाता है।
वह जिस आत्मसंतुष्टि के लिए इतनी मेहनत कर रहा होता है, वह खत्म होने लगती है। इस तरह की हरकतों के कारण डॉक्टर के काम करने की इच्छा मर जाती है, इससे सीधा नुकसान समाज का ही है।