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Flood & Diseases: मुंबई में भारी बारिश-बाढ़ का अलर्ट, कई बीमारियों का बढ़ सकता है खतरा; डॉक्टरों ने किया अलर्ट

Mon, 06 Jul 2026 07:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बारिश के बाद कई बीमारियों के मामले एक साथ बढ़ने लगते हैं। कुछ बीमारियां मच्छरों से फैलती हैं, कुछ दूषित पानी से और कुछ गंदे पानी के सीधे संपर्क से। इसलिए यह समझना बेहद जरूरी है कि बाढ़ के बाद किन बीमारियों का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।
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बाढ़-बारिश का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
मुंबई इन दिनों भारी बारिश, जलजमाव और बाढ़ की चपेट में है। अलग-अलग जगहों से आ रही खबरों के अनुसार कई स्थानों पर बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है। सोमवार को मुंबई में भारी बारिश के कारण हवाई यात्रा बाधित हुई, जिससे नागपुर के कई मंत्री और विधायक फंस गए और महाराष्ट्र विधानसभा के मॉनसून सत्र के पहले दिन शामिल नहीं हो सके।

आपदा प्रबंधन मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि पिछले तीन-चार दिनों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 13 लोगों की मौत हुई है।  मुंबई और उसके पड़ोसी जिलों पालघर और रायगढ़ में रिकॉर्ड तोड़ बारिश हुई। इस बीच मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी अलर्ट किया है कि मंगलवार को भी स्थिति खराब रह सकती है, जिसे देखते हुए राज्य प्रशासन को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

बारिश और बाढ़ को स्वास्थ्य के नजरिए से भी काफी नुकसानदायक माना जाता रहा है। बाढ़ और जलजमाव के दौरान सीवर का पानी पीने के पानी में मिल जाता है, कचरा और गंदगी खुले में फैल जाती है जिससे बीमारियां फैलने का खतरा रहता है। 

आइए जानते हैं कि बाढ़ वाली जगहों पर किन बीमारियों का खतरा रहता है और सभी लोगों को बचाव के लिए क्या करना चाहिए?
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मुंबई में बारिश का अलर्ट - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स/ANI
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बाढ़ के दौरान और बाढ़ खत्म होने के बाद तक स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बने रहते हैं। ऐसे स्थानों पर मच्छरों और दूषित पानी के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। अगर आप भी ऐसे इलाके में रहते हैं जहां बारिश के बाद पानी भर जाता है, तो अपनी सेहत को लेकर सावधान रहना जरूरी है।


लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा

लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है जो संक्रमित चूहों, कुत्तों और अन्य जानवरों के मूत्र से दूषित पानी के संपर्क में आने से फैलता है। बारिश और बाढ़ के दौरान इस बीमारी के तेजी से फैलने का खतरा अधिक होता है।
 
  • यदि किसी व्यक्ति के शरीर पर कट या घाव हो और वह दूषित पानी में चले, तो बैक्टीरिया शरीर में प्रवेश कर सकता है। 
  • शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, आंखों का लाल होना और उल्टी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। 
  • गंभीर मामलों में किडनी, लिवर और फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
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डेंगू के मामलों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां

बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों को बढ़ावा देने वाली हो सकती है। ये एडीज एजिप्टी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल हो जाता है, इससे डेंगू का खतरा हो सकता है।
 
  • डेंगू के कारण तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में तेज दर्द तथा त्वचा पर लाल चकत्ते दिखाई दे सकते हैं। 
  • गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स कम होने लगते हैं और रक्तस्राव का खतरा बढ़ जाता है। 
  • डेंगू के अलावा बाढ़ वाली जगहों पर मलेरिया और चिकनगुनिया का भी खतरा हो सकता है।

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टाइफाइड का जोखिम - फोटो : Freepik.com
टाइफाइड संक्रमण का जोखिम

बाढ़ के दौरान पीने का पानी दूषित हो जाता है। दूषित पानी या उससे बने भोजन से टाइफाइड का खतरा हो सकता है। 
 
  • यह साल्मोनेला टाइफी बैक्टीरिया से होने वाला संक्रमण है। इसमें तेज बुखार, कमजोरी, पेट दर्द, कब्ज और दस्त जैसी दिक्कतें होती हैं।
  •  यदि समय पर इलाज न मिले तो आंतों में गंभीर संक्रमण हो सकता है। 
  • टाइफाइड के खतरे को कम करने के लिए केवल उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं, खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों से बचें और हाथों को साफ रखें।
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पाचन स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
इन बीमारियों को लेकर भी रहें सावधान 
 
  • बारिश और बाढ़ के दौरान दूषित पानी पीने से हेपेटाइटिस ए और ई का संक्रमण फैल सकता है। यह वायरस सीधे लिवर को प्रभावित करता है। 
  • बाढ़ के बाद पानी में विब्रियो कॉलेरी जैसे बैक्टीरिया मिल सकते हैं, जो हैजा का कारण बनते हैं। इसके अलावा कई अन्य बैक्टीरिया और वायरस भी दस्त की समस्या पैदा कर सकते हैं। 

यदि बारिश या बाढ़ के बाद तेज बुखार, लगातार दस्त-उल्टी, त्वचा पर चकत्ते, पीलिया, सांस लेने में परेशानी या कमजोरी हो तो इसे सामान्य वायरल बुखार मानकर नजरअंदाज न करें। समय पर जांच और इलाज गंभीर जटिलताओं से बचा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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