ऑटोइम्यून से संबंधित बीमारियों का जोखिम
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ये बीमारी होती क्यों है?
क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक इस बीमारी के कारणों को अभी तक समझा नहीं जा सका है। यह बीमारी आमतौर पर 20 से 40 वर्ष की उम्र के लोगों में अधिक देखी जाती है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में इसका खतरा अधिक देखा जाता है।
- स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों के परिवार में यह बीमारी पहले से मौजूद है, उनमें इसका जोखिम थोड़ा बढ़ जाता है।
- विटामिन डी की कमी, धूम्रपान, कुछ वायरल संक्रमण जैसे एप्सटीन-बार वायरस भी जोखिम कारक माने गए हैं।
इसे ठीक कैसे किया जाता है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इस समस्या का अभी तक कोई पक्का इलाज नहीं है, लेकिन दवाओं और इलाज के माध्यम से आपके लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। बीमारी को नियंत्रित करने के लिए डिजीज मॉडिफाइंग थेरेपी और दवाएं दी जाती हैं, जो इम्यून सिस्टम की असामान्य प्रतिक्रिया को कम करने में मदद करती हैं।
शरीर में विटामिन डी का लेवल ठीक बनाए रखना, धूम्रपान से बचना, संतुलित आहार लेना और नियमित व्यायाम आपके लिए मददगार हो सकती है। फिजियोथेरेपी और साइकोथेरेपी से मरीज की जीवन गुणवत्ता को सुधारने में मदद मिल सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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