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Mothers Day 2023: मां के भीतर बच्चे का सुरक्षा कवच प्लेसेंटा, जानें प्रसव और शिशु के लिए क्यों है जरूरी

Sun, 14 May 2023 09:54 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मदर्स डे स्पेशल- प्लेसेंटा - फोटो : Self
डॉ. निकिता रावल,
स्त्रीरोग व आईवीएफ विशेषज्ञ,
फैलोशिप, रॉयल कॉलेज ऑफ ऑबस्टिट्रिशियन्स एंड गायनोकोलॉजिस्ट्स, लंदन,
अनुभव 25 वर्ष


प्लेसेंटा यानी मां के गर्भ में बच्चे को सुरक्षा और पोषण दोनों उपलब्ध करवाने वाली जगह। सामान्य शब्दों में कहा जाए तो प्लेसेंटा वह स्थान है जो बच्चे को माँ से जोड़ता है। अक्सर महिलाओं को इस महत्वपूर्ण हिस्से के बारे में पूरी जानकारी नहीं होती। जिसके चलते कई तरह की भ्रांतियां और डर मां बनने के दौरान महिलाओं को परेशान करते हैं। वहीं कई बार यह भी होता है कि प्लेसेंटा के महत्व को ही नजरअंदाज कर दिया जाता है। जबकि इसकी सेहत और इसके सामान्य होने से जुड़ी होती है मां और बच्चे दोनों की सेहत भी। इस मदर्स डे पर जानिए क्या है प्लेसेंटा, क्यों है प्लेसेंटा का इतना महत्व और कैसे इसको पहुंचने वाला नुकसान गर्भ में पल रहे शिशु के लिए हो सकता है घातक। 
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प्लेसेंटा क्या है - फोटो : istock
प्लेसेंटा क्या है?

प्लेसेंटा एक बड़ा अंग होता है जो गर्भवस्था के दौरान शरीर के भीतर पनपता है और यह आमतौर पर यूटरस की दीवार पर ऊपर की ओर या साइड में जुड़ा होता है। कई बार रेयर केसेस में प्लेसेंटा बच्चेदानी के मुंह पर भी हो सकती है। यह स्थिति प्लेसेंटा प्रिविया कहलाती है और यह मां और बच्चे दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकती है। शिशु को प्लेसेंटा से जोड़ने का काम करती है अम्बलीकल कॉर्ड या गर्भनाल। मां के शरीर से खून प्लेसेंटा से होकर ही शिशु तक पहुंचता है और ऑक्सीजन, ग्लूकोज और अन्य पोषक तत्व फिल्टर होकर गर्भनाल द्वारा शिशु को मिलते हैं। 
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शिशु का बचाव - फोटो : istock
शिशु का हानिकारक तत्वों से बचाव:

प्लेसेंटा केवल पोषण को शिशु तक भेजने का जरिया ही नहीं बनती। यह हर उस तत्व को भी फिल्टर करती जाती है जो शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं और शिशु के खून से यह कार्बन डाइऑक्साइड व अन्य कचरे को भी हटा देती है। प्लेसेंटा के भीतर शिशु गर्म और सुरक्षित माहौल में रहता है।

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गर्भावस्था में जरूरी हार्मोंस - फोटो : istock
जरूरी हार्मोंस का उत्पादन:

गर्भावस्था के दौरान कुछ विशेष हार्मोन की जरूरत शिशु और मां दोनों के लिए होती है और प्लेसेंटा इनका उत्पादन कर मदद करती है। इन हार्मोंस में लेक्टोजन, एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रॉन जैसे महत्वपूर्ण हार्मोंस शामिल हैं। प्लेसेंटा की एक और खासियत है कि यह मां के खून को बच्चे के खून से अलग रखने का काम करती है और इस तरह बच्चे कई प्रकार के संक्रमणों से बच जाते हैं। इतना ही नहीं शिशु के जन्म बाद प्लेसेंटा कुछ एंटीबॉडीज भी शिशु की सुरक्षा के लिहाज से उसके साथ कर देती है। ताकि बच्चे का सुरक्षा कवच जन्म के बाद तक बरकरार रहे। 
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प्लेसेंटा की सेहत के लिए जरूरी बातें - फोटो : iStock
इन बातों का रखें ध्यान:

गर्भ में बच्चे के आकार लेने के साथ ही प्लेसेंटा की भूमिका बढ़ती जाती है। इसलिए जरूरी है कि शुरुआत से ही इसकी सुरक्षा और सेहत को लेकर भी ध्यान रखा जाए। कुछ चीजें हैं जो प्लेसेंटा को नुकसान पहुंचा सकती है और बच्चे को खतरा पहुंचा सकती हैं। उनको लेकर सतर्कता रखें और कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गौर करें। जैसे:

-अल्कोहल, सिगरेट या अन्य ड्रग्स का सेवन न करें। ये सभी हानिकारक चीजें प्लेसेंटा की दीवार आसानी से भेदकर शिशु तक पहुंच सकती हैं। 

-गर्भावस्था के दौरान पूरे समय पोषक तत्वों का सेवन करें और तनाव, एंग्जायटी व स्ट्रेस से दूर रहें। यह सभी आपकी प्लेसेंटा की हेल्थ को नुकसान पहुंचा सकते हैं। 

-अपने डॉक्टर की सलाह से नियमित सामान्य व्यायाम, डीप ब्रीदिंग और मेडिटेशन आदि जैसी गतिविधियों से जुड़ें। डीप ब्रीदिंग के बहुत फायदे हैं। इससे माँ के शरीर में तो ऑक्सीजन का स्तर सुचारू होता ही है। बच्चे के ऑक्सीजन स्तर में भी बहुत सुधार आता है।
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प्लेसेंटा की सेहत के लिए जरूरी बातें - फोटो : istock
-संगीत, पेंटिंग आदि जैसी रचनात्मक गतिविधियों में भी भाग लें। इससे आपका मन प्रफुल्लित रहेगा, शरीर में खून का बहाव अच्छा होगा और यह सम्पूर्ण स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर डालेगा।

-यदि आपकी पहली डिलीवरी के दौरान प्लेसेंटा संबंधी कोई समस्या आई थी तो इसे गर्भावस्था की शुरुआत में ही डॉक्टर को बताएं। इससे वह आगे आपकी प्लेसेंटा को खासतौर पर पूरे समय मॉनिटर कर सकेंगे। 

-किसी भी प्रकार की ओवर द काउंटर दवाई, सप्लीमेंट आदि अपने मन से न लें। 

-शिशु के जन्म के बाद करीब पांच मिनट से आधा घंटे के भीतर प्लेसेंटा को शरीर से अलग कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को प्रसव का तीसरा चरण यानी थर्ड स्टेज ऑफ लेबर कहा जाता है। यह जरूरी है कि प्रसव के बाद पूरा प्लेसेंटा बाहर आए। यदि इसका थोड़ा सा भी अंश शरीर के भीतर रह जाए और इसे न निकाला जाए तो संक्रमण और अधिक रक्तस्राव का खतरा पैदा हो सकता है। 
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स्त्री रोग व आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. निकिता रावल - फोटो : self
प्लेसेंटा संबंधी समस्या के लक्षण

प्लेसेंटा सम्बन्धी समस्याएं कुछ लक्षणों के साथ सामने आ सकती हैं। यदि आपको ऐसा कोई लक्षण दिखे तो अपने डॉक्टर से तुरन्त बात करें-

-पेट में या कमर में तेज दर्द हो
-अचानक बच्चेदानी के रास्ते से खून आने लगे या स्पॉटिंग (खून के धब्बों का दिखना) हो
-पेट में खिंचाव या जकड़न सी महसूस हो
-पेट को कोई भी अघात पहुंचे, आदि।
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नोट: यह लेख अनुभवी स्त्री रोग व आईवीएफ विशेषज्ञ, डॉ. निकिता रावल के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ. निकिता रावल रॉयल कॉलेज ऑफ ऑबस्टिट्रिशियन्स एंड गायनोकोलॉजिस्ट्स, लंदन में काम कर चुकी हैं। उनका इस क्षेत्र में 25 वर्ष का लंबा अनुभव है। 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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