महिलाओं में यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, इरिटेशन और संक्रमण आम समस्या बन चुकी है। जिसका सबसे बड़ा कारण अस्वच्छ शैचालयों का इस्तेमाल करना, अंग्रेजी स्टाइल के टॉयलेट और इसके सबसे आम कारणों में हमारी रोजमर्रा से जुड़ी बातें शामिल हैं। जिससे इस संक्रमण का जोखिम अधिक बढ़ जाता है। 15 से 40 की उम्र की महिलाओं के बीच यह समस्या अधिक देखी जाती है। ऐसे में साफ सफाई का ध्यान तो रखें ही और जान लें कि किस वजह से महिलाओं को ये समस्या झेलनी पड़ती है और इसे दुबारा न दोहराएं।
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महिलाओं में वजाइनल बैक्टीरियल इंफेक्शन 15 से 40 की उम्र की महिलाओं के बीच यह समस्या अधिक देखी जाती है। इस दौरान खुजली के साथ ही येलो या ग्रे रंग का डिस्चार्ज भी होता है। अगर आपको इस तरह की कोई दिक्कत हो रही है तो आपको डॉक्टर से संपर्क करने की जरूरत है।
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अगर बैक्टीरियल संक्रमण आपके यूरिन सिस्टम के किसी हिस्से में हुआ है तो आपको पेल्विक दर्द, यूरिन पास करते वक्त दर्द, वजाइना में तेज जलन जैसी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। इस तरह के संक्रमण को यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन के नाम से भी जाना जाता है। अगर ऐसा कोई भी लक्षण आपमें है तो गायनकोलॉजिस्ट की सलाह लें।
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अगर शारीरिक संबंध के दौरान आप हाइजीन का पूरा ध्यान नहीं रखते हैं तो इससे आपको क्लैमाइडिया,ट्राइकोमोनिएसिस, गोनोरिया जननांग में दाद, जननांग में मस्सा जैसी सेक्सुअली ट्रांसमिटेड डिजीज (एसटीडी) हो सकती है। इससे आपको जननांग में दर्द, खुजली और जलन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। कई शोध में यह बात साबित हो चुकी है कि ज्यादातर जननांग संक्रमण हाइजीन की कमी के कारण होते हैं।
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ऐसे मरीजों को कुछ चीजों से परहेज करना चाहिए क्योंकि आपकी डाइट का यूटीआई के लक्षणों पर सीधा असर पड़ता है। यूटीआई में या तो आपकी इम्यूनिटी कम हो जाती है या फिर यूरिन का पीएच बिगड़ जाता है। ऐसे में जब भी टॉयलेट होती है, तो दर्द होता है। अगर जलन बढ़ जाती है तो ब्लीडिंग भी हो सकती है। इस स्थिति में ज्यादा लिक्विड लें।
यूटीआई से पीड़ित मरीज को दूध, पानी, ओट्स, अंडा और खीरे जैसी चीजें खाने की सलाह दी जाती है। इसमें पानी खूब पीएं। नारियल पानी, सब्जियों का सूप पी सकते हैं, जिसमें ज्यादा टमाटर न डाला गया हो। यूटीआई में बिना शुगर वाला क्रैनबेरी जूस बेहद फायदा करता है।