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Monsoon Health Guide 2026: बारिश के मौसम में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा, रहें सतर्क

Tue, 16 Jun 2026 04:11 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Monsoon Health Guide 2026: मानसून ने दस्तक दे दी है। ऐसे में आपको अपनी सेहत का खास ध्यान रखने की जरूरत है। यहां हम आपको बताएंगे कि इस मौसम में कौन-कौन सी बीमारियों का खतरा रहता है। 
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बारिश के मौसम में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा - फोटो : AI
Monsoon Health Guide 2026: मानसून की दस्तक के साथ मौसम भले ही सुहावना हो जाता है, लेकिन यह अपने साथ कई स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आता है। बारिश के दौरान वातावरण में नमी बढ़ जाती है, जलभराव की समस्या पैदा होती है और मच्छरों व बैक्टीरिया के पनपने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन जाती हैं। यही वजह है कि इस मौसम में कई तरह की संक्रामक और मौसमी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। थोड़ी सी लापरवाही आपकी सेहत पर भारी पड़ सकती है। 

खासकर बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि मानसून में कौन-कौन सी बीमारियां सबसे ज्यादा फैलती हैं और उनसे बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। आइए जानते हैं बारिश के मौसम में होने वाली आम बीमारियों और उनसे बचने के आसान उपायों के बारे में।

 
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बारिश के मौसम में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
1. डेंगू

मानसून के दौरान डेंगू का खतरा काफी बढ़ जाता है। यह बीमारी एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलती है, जो आमतौर पर साफ और रुके हुए पानी में पनपता है। घरों की छतों, कूलर, गमलों और पानी की टंकियों में जमा पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन सकता है।

डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर मामलों में प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगते हैं, जिससे मरीज की हालत बिगड़ सकती है। इसलिए बारिश के मौसम में मच्छरों से बचाव करना बेहद जरूरी है।

 
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बारिश के मौसम में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा
 2. मलेरिया

मलेरिया भी मानसून के दौरान तेजी से फैलने वाली बीमारियों में शामिल है। यह संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है। मलेरिया में व्यक्ति को ठंड लगकर तेज बुखार आता है और इसके साथ अत्यधिक पसीना, कमजोरी तथा शरीर में दर्द महसूस हो सकता है।

समय पर इलाज न मिलने पर यह बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। घर और आसपास पानी जमा न होने देना तथा मच्छरदानी का उपयोग करना इससे बचाव के प्रभावी तरीके हैं।
 

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बारिश के मौसम में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा - फोटो : Adobe Stock

 3. टाइफाइड

बारिश के मौसम में दूषित पानी और संक्रमित भोजन के कारण टाइफाइड का खतरा बढ़ जाता है। यह एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो पाचन तंत्र को प्रभावित करता है। इसके लक्षणों में लगातार बुखार, पेट दर्द, सिरदर्द, कमजोरी और भूख कम लगना शामिल हैं।

सड़क किनारे खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ और गंदा पानी इसके प्रमुख कारण बन सकते हैं। इसलिए मानसून में खाने-पीने की चीजों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

 
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बारिश के मौसम में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा - फोटो : AI
 4. वायरल फीवर

मानसून में तापमान और नमी में बदलाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैलता है। वायरल फीवर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैल सकता है।

इसमें तेज बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है। कई बार यह संक्रमण कुछ दिनों तक व्यक्ति को बेहद थका हुआ भी महसूस करा सकता है। अच्छी इम्यूनिटी और साफ-सफाई का ध्यान रखकर इसके खतरे को कम किया जा सकता है।

 
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बारिश के मौसम में बढ़ जाता है इन बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
5. फूड पॉइजनिंग और दस्त

बरसात के मौसम में नमी अधिक होने के कारण भोजन जल्दी खराब हो जाता है। ऐसे में दूषित भोजन या संक्रमित पानी का सेवन करने से फूड पॉइजनिंग और दस्त की समस्या हो सकती है।

इसके कारण उल्टी, पेट दर्द, दस्त, जी मिचलाना और डिहाइड्रेशन जैसी परेशानियां हो सकती हैं। बाहर का खाना खाने से बचना, ताजा भोजन करना और साफ पानी पीना इस समस्या से बचने के सबसे आसान उपाय हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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