वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्लास्टिक के उपयोग से जनित बीमारियां बड़े चिंता का कारण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उपयोग से लेकर फसलों के उत्पादन को बढ़ाने तक के लिए की जाने वाली प्रक्रियाओं में प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग दीर्घकालिक समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए की जाने वाली मल्चिंग प्रक्रिया में प्रयोग की जाने वाले प्लास्टिक कवरिंग के कारण मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण का खतरा काफी बढ़ गया है। इसका असर अनाज के माध्यम से शरीर पर पड़ सकता है। अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को कई तरह की गंभीर रोगों के प्रमुख कारक के तौर पर देखा जाता है। इंसानों के खून में पहली बार माइक्रोप्लास्टिक के अंश पाए गए हैं।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कई फसलों के लिए पर्याप्त तापमान और नमी बनाए रखने के लिए मिट्टी को प्लास्टिक से कवर कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को मल्चिंग के रूप में जाना जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मल्चिंग के कारण मिट्टी में प्लास्टिक के छोटे कण अवशोषित हो जाते हैं जिसके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है।
माइक्रोप्लास्टिक्स, सामान्यतौर पर 5 मिमी से कम व्यास वाले प्लास्टिक के छोटे कण होते हैं, जिन्हें प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ने का प्रमुख कारण माना जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए लोगों को इसके वैकल्पिक उपायों पर ध्यान देने की आवश्कता है, वरना यह भविष्य में बड़ी मुश्किलों का कारण बन सकती है।