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अध्ययन: खून में पाया गया माइक्रोप्लास्टिक, कैंसर जैसे जानलेवा रोगों का हो सकता है खतरा, वैज्ञानिकों ने किया अलर्ट

Sun, 08 May 2022 03:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रक्त में पाया गया माइक्रोप्लास्टिक - फोटो : Pixabay
वैश्विक स्तर पर बढ़ते प्लास्टिक के उपयोग से जनित बीमारियां बड़े चिंता का कारण हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू उपयोग से लेकर फसलों के उत्पादन को बढ़ाने तक के लिए की जाने वाली प्रक्रियाओं में प्लास्टिक का बढ़ता उपयोग दीर्घकालिक समस्याओं का कारण बन सकता है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि फसलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए की जाने वाली मल्चिंग प्रक्रिया में प्रयोग की जाने वाले प्लास्टिक कवरिंग के कारण  मिट्टी में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण  का खतरा काफी बढ़ गया है। इसका असर अनाज के माध्यम से शरीर पर पड़ सकता है। अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को कई तरह की गंभीर रोगों के प्रमुख कारक के तौर पर देखा जाता है। इंसानों के खून में पहली बार माइक्रोप्लास्टिक के अंश पाए गए हैं।

अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि कई फसलों के लिए पर्याप्त तापमान और नमी बनाए रखने के लिए मिट्टी को प्लास्टिक से कवर कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया को मल्चिंग के रूप में जाना जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि मल्चिंग के कारण मिट्टी में प्लास्टिक के छोटे कण अवशोषित हो जाते हैं जिसके कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है।

माइक्रोप्लास्टिक्स, सामान्यतौर पर 5 मिमी से कम व्यास वाले प्लास्टिक के छोटे कण होते हैं, जिन्हें प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ने का प्रमुख कारण माना जाता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इससे होने वाले खतरे को ध्यान में रखते हुए लोगों को इसके वैकल्पिक उपायों पर ध्यान देने की आवश्कता है, वरना यह भविष्य में बड़ी मुश्किलों का कारण बन सकती है। 
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मिट्टी में बढ़ती विषाक्तता - फोटो : Istock
कृषि क्षेत्रों की मिट्टी का परीक्षण

इस शोध के लिए वैज्ञानिकों ने कर्नाटक और महाराष्ट्र में कुछ कृषि क्षेत्रों की मिट्टी का परीक्षण किया। अध्ययन में सैंपल में छोटे प्लास्टिक के कण पाए गए, जिसके लिए  मल्चिंग प्रक्रिया को प्रमुख कारण के तौर पर देखा जा रहा है। शोध की रिपोर्ट के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक न सिर्फ हमारे पर्यावरण के लिए घातक हैं, साथ ही यह रक्त और फेफड़ों में भी पहुंचकर कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ा सकते हैं।

शोधकर्ताओं का कहना है कि पहले से ही बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण की दिशा में यह नई जोखिमों को बढ़ावा देने वाला हो सकता है। इससे मिट्टी की गुणवत्ता खराब हो रही है जिसके कारण फसलों में विषाक्तता बढ़ने का जोखिम हो सकता है।
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माइक्रोप्लास्टिक है काफी खतरनाक - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता

टॉक्सिक्स लिंक की मुख्य कार्यक्रम समन्वयक प्रीति बंथिया महेश कहती हैं, मिट्टी में बढ़ता माइक्रोप्लास्टिक का स्तर पौधों या फसलों द्वारा पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। आधुनिक कृषि में प्लास्टिक का उपयोग हमारे पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी बहुत हानिकारक है। मल्चिंग के लिए उपयोग किया जाने वाला प्लास्टिक अपेक्षाकृत पतला होता है और कृषि क्षेत्र से इन प्लास्टिक फिल्मों को हटाना महंगा और चुनौतीपूर्ण होता है। नतीजतन, यह खेत में ही रह जाता है और अंततः मिट्टी में जमा होने वाले सूक्ष्म कणों (माइक्रोप्लास्टिक्स या एमपी) में विघटित हो जाता है। इसके कई तरह से दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम हो सकते हैं।
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माइक्रोप्लास्टिक के कारण गंभीर रोगों का खतरा - फोटो : Pixabay
माइक्रोप्लास्टिक्स से सेहत को होने वाले नुकसान

अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि माइक्रोप्लास्टिक्स के संपर्क में आने से स्वास्थ्य को कई तरह से गंभीर क्षति होने का जोखिम हो सकता है। यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, सूजन वाले घावों और विषाक्तता को बढ़ा सकता है। कई अध्ययनों में इसे मनुष्यों में मेटाबॉलिज्म संबंधी गड़बड़ी, न्यूरोटॉक्सिसिटी और कैंसर के खतरे के कारक के रूप में भी संदर्भित किया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि हमारे दैनिक जीवन में बढ़ता प्लास्टिक का उपयोग कई तरह से हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाता है। इसमें से कई समस्याओं से हम अनजान होते हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते कई प्रकार के कैंसर के खतरे के लिए माइक्रोप्लास्टिक्स को प्रमुख कारक के तौर पर देखा जाता रहा है। 


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नोट: यह लेख नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे रिपोर्ट से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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