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Microplastic: फेफड़े-मस्तिष्क और हड्डियां सब खतरे में, माइक्रोप्लास्टिक बनता जा रहा 'सेहत का दुश्मन'

Thu, 25 Sep 2025 07:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • रोजाना हमारे शरीर में अनजाने में ही सही, प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा होता जा रहा है।
  • साल 2022 में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पहली बार इंसानों के खून में माइक्रोप्लास्टिक कण पाए। अब वैज्ञानिकों ने बताया है कि माइक्रोप्लास्टिक, हड्डियों के लिए भी दिक्कतें बढ़ाती जा रही हैं।
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माइक्रोप्लास्टिक का फेफड़े और ब्रेन पर असर - फोटो : Freepik.com
प्लास्टिक की जब खोज की गई तो संभवत: माना गया था कि ये इंसानों की जिंदगी को आसान बना देगी। लेकिन अब यही प्लास्टिक हमारी सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। हर दिन हम पानी की बोतल, पैकेज्ड फूड, प्लास्टिक बैग जैसी कई प्लास्टिक वाली चीजों का इस्तेमाल करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ये सूक्ष्म कणों के रूप में हमारे शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। इसे माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है। प्लास्टिक के ये छोटे कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि नंगी आंखों से दिखते भी नहीं, लेकिन ये हवा, पानी और खाने के जरिए हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं।

शोध बताते हैं कि आजकल लगभग हर इंसान के शरीर में माइक्रोप्लास्टिक के कण मौजूद हैं। साल 2022 में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पहली बार इंसानों के खून में माइक्रोप्लास्टिक कण पाए। खून के अलावा ये छोटे-छोटे कण शरीर के अलग-अलग अंगों में जाकर वहां भी सूजन पैदा कर सकते हैं और धीरे-धीरे गंभीर बीमारियों की वजह बन सकते हैं।

एक हालिया रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि माइक्रोप्लास्टिक, हड्डियों के लिए भी दिक्कतें बढ़ाती जा रही हैं।
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शरीर में बढ़ता माइक्रोप्लास्टिक - फोटो : Freepik.com
हर दिन शरीर में जा रहा है माइक्रोप्लास्टिक

रोजाना हमारे शरीर में अनजाने में ही सही, प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा होता जा रहा है।

वैज्ञानिकों ने पाया कि हर इंसान एक हफ्ते में लगभग 5 ग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है। ये छोटे-छोटे माइक्रोप्लास्टिक के कण हमारी हवा, पानी, खाने और यहां तक कि नमक में भी मिल चुके हैं।

वैज्ञानिकों ने हाल ही में चेतावनी दी है कि माइक्रोप्लास्टिक केवल पर्यावरण और जलवायु को ही नहीं, बल्कि हड्डियों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रहे हैं। खून, दिमाग, प्लेसेंटा और यहां तक कि हड्डियों में भी इन कणों की मौजूदगी साबित हो चुकी है। नए शोध से खुलासा हुआ है कि माइक्रोप्लास्टिक अस्थि कोशिकाओं को कमजोर करते हैं, सूजन बढ़ाते हैं और हड्डियों के विकास को रोक सकते हैं।
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हड्डियों की समस्या - फोटो : Freepik.com
माइक्रोप्लास्टिक से हड्डियों को होने वाली समस्याएं

ब्राजील के वैज्ञानिकों ने 62 अध्ययनों की समीक्षा कर पाया कि माइक्रोप्लास्टिक हड्डी की मज्जा में मौजूद स्टेम सेल्स की क्षमता को नुकसान पहुंचाते हैं। यह हड्डियों को तोड़ने वाली कोशिकाओं की संख्या बढ़ा देते हैं, जिससे हड्डी का क्षय तेज होता है।

इंटरनेशनल ऑस्टियोपोरोसिस फाउंडेशन के अनुसार, साल 2050 तक ऑस्टियोपोरोसिस से जुड़ी हड्डी टूटने की घटनाएं 32 फीसदी तक बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि हड्डियों को मजबूत रखने के लिए आहार और व्यायाम जितने जरूरी हैं, उतना ही महत्वपूर्ण है माइक्रोप्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करना है।

अगर इसे समय रहते नियंत्रित किया गया, तो लाखों लोगों को भविष्य में अस्थि रोगों और फ्रैक्चर से बचाया जा सकता है।

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फेफड़ों की समस्याए - फोटो : Freepik.com
फेफड़ों की समस्या और कैंसर का खतरा

इससे पहले के शोधों में भी माइक्रोप्लास्टिक के कारण होने वाले गंभीर जोखिमों को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है। 

हवा में मौजूद माइक्रोप्लास्टिक कण हमारी सांसों के साथ फेफड़ों तक पहुंच जाते हैं। यह कण इतने सूक्ष्म होते हैं कि शरीर की प्राकृतिक फिल्टरिंग प्रक्रिया इन्हें रोक नहीं पाती। शोध के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक फेफड़ों में सूजन, एलर्जी और अस्थमा जैसी दिक्कतें पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक इनका असर फेफड़ों की क्षमता को घटा सकता है और सांस लेने में तकलीफ बढ़ा सकता है।

कुछ अध्ययनों ने यह भी संकेत दिया है कि माइक्रोप्लास्टिक कण फेफड़ों में जमा होकर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का खतरा बढ़ा सकते हैं।
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माइक्रोप्लास्टिक का सेहत पर असर - फोटो : freepik
बच्चे तक सुरक्षित नहीं

माइक्रोप्लास्टिक सिर्फ फेफड़ों के लिए खतरा नहीं बढ़ा रहा, इससे बच्चों की सेहत पर भी गंभीर असर हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से इस बात पर जोर देते रहे हैं कि प्लास्टिक की बोतलों का इस्तेमाल शिशु की सेहत के लिए बिल्कुल ठीक नहीं है। इससे न सिर्फ शरीर में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा बढ़ने की आशंका रहती है, बल्कि इससे क्रॉनिक बीमारियों का भी खतरा हो सकता है।


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स्रोत
Scientists find microplastics in human bones that are weakening our skeletons

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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