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Long Covid Effects: मासिक धर्म में अनियमितता ने कर दिया है परेशान? ये लॉन्ग कोविड का असर तो नहीं

Thu, 25 Sep 2025 07:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने एक और लॉन्ग कोविड के बारे में खुलासा किया है जिसका महिलाओं की सेहत पर गंभीर असर हो सकता है।
  • कोविड-19 संक्रमण के लंबे समय बाद भी बने रहने वाले लक्षण अब महिलाओं के मासिक धर्म पर गंभीर असर डालते दिख रहे हैं। 
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मासिक धर्म की समस्या - फोटो : Freepik.com
साल 2019 के आखिरी के दिनों में वैश्विक स्तर पर कोरोना महामारी की शुरुआत हुई थी, जिसका स्वास्थ्य पर गंभीर असर देखा गया। भले ही अब हालात सामान्य हैं और लोग बिना मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के आराम से जी रहे हैं, लेकिन सच यह है कि कोरोना का असर अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण से ठीक होने के बाद भी कई लोगों को लंबे समय तक इसकी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इस स्थिति को लॉन्ग कोविड कहा जाता है। कई अध्ययन बताते हैं कि लॉन्ग या पोस्ट कोविड का असर संक्रमण से ठीक होने के कुछ महीनों से लेकर एक साल से अधिक समय तक भी रह सकता है।

चिंताजनक बात यह है कि ये समस्या सिर्फ उन लोगों में नहीं देखी जा रही जो गंभीर रूप से बीमार हुए थे, बल्कि हल्के संक्रमण वाले मरीजों में भी यह देखने को मिल रही है। लॉन्ग कोविड के सबसे आम परेशानियों में थकान, सांस लेने में तकलीफ, दिमागी धुंधलापन, याददाश्त की समस्या, नींद की गड़बड़ी और सीने में दर्द जैसी समस्याएं लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। कई शोधों में यह भी पाया गया है कि लॉन्ग कोविड का असर दिल, फेफड़ों और यहां तक कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर रूप से पड़ सकता है।

इसी से संबंधित एक हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने एक और लॉन्ग कोविड के बारे में खुलासा किया है जिसका महिलाओं की सेहत पर गंभीर असर हो सकता है।
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लॉन्ग कोविड का सेहत पर असर - फोटो : Freepik.com
लॉन्ग कोविड का मासिक धर्म पर गंभीर असर

कोविड-19 संक्रमण के लंबे समय बाद भी बने रहने वाले लक्षण अब महिलाओं के मासिक धर्म पर गंभीर असर डालते दिख रहे हैं।

नेचर कम्युनिकेशन्स में प्रकाशित यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के अध्ययन के मुताबिक, लॉन्ग कोविड से पीड़ित महिलाओं में भारी रक्तस्राव, आठ दिन से अधिक लंबे पीरियड्स और बीच-बीच में खून आने जैसी समस्याएं आम पाई गईं। शोध से पता चला कि अंडाशय की कार्यप्रणाली सुरक्षित रहते हुए भी एंड्रोजन हार्मोनल बदलाव और सूजन इसका कारण बन सकते हैं।
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कोरोना संक्रमण के दीर्घकालिक दुष्प्रभाव - फोटो : Adobe Stock Photos
अध्ययन में क्या पता चला?

विशेषज्ञों ने कहा अगर किसी महिला को कोरोना का संक्रमण कभी भी हुआ है और अब इस तरह की दिक्कतें हो रही हैं तो समय रहते डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।

अध्ययन में 1,20,000 से अधिक महिलाओं की मासिक धर्म संबंधी जानकारी, मोबाइल ऐप पर दर्ज अनुभवों और जैविक परीक्षणों के आधार पर यह निष्कर्ष निकाला गया। टीम ने पाया कि लॉन्ग कोविड वाली महिलाओं में मासिक धर्म की शिकायतें सामान्य की तुलना में कहीं अधिक गंभीर हैं। कुछ महिलाओं में पीरियड्स मिस होना या पूरी तरह रुक जाना भी देखा गया। थकान जैसे लक्षण मासिक धर्म चक्र के खास चरणों में और तीव्र पाए गए। 

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मासिक धर्म की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञों का कहना है कि समस्या हार्मोनल कमी से नहीं, बल्कि एंड्रोजन नियमन और गर्भाशय की परत में सूजन से जुड़ी है। खून में ट्यूमर नेक्रोसिस फैक्टर का स्तर बढ़ा पाया गया और एंडोमेट्रियम में इम्यून कोशिकाओं के समूह मिले, जो असामान्य रक्तस्राव का कारण बन सकते हैं। भारत जैसे देशों में, जहां पहले से ही महिलाओं की प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच सीमित है, यह निष्कर्ष खास महत्व रखते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि लॉन्ग कोविड की स्क्रीनिंग और उपचार में मासिक धर्म से जुड़ी दिक्कतों को भी शामिल करना जरूरी है।

महामारी से पहले ही मासिक धर्म संबंधी समस्याएं व्यापक थीं।सिर्फ ब्रिटेन में हर साल आठ लाख महिलाएं भारी रक्तस्राव के इलाज के लिए अस्पताल पहुंचती थीं। अमेरिका में इन समस्याओं से जुड़े अप्रत्यक्ष खर्चे करीब 12 अरब डॉलर तक पहुंच चुके हैं।
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पोस्ट कोविड की समस्या - फोटो : Freepik.com
100 में से 6 संक्रमितों में लॉन्ग कोविड का असर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक हर 100 कोविड रोगियों में से लगभग 6 में संक्रमण के ठीक होने के बाद भी लॉन्ग कोविड की स्थिति विकसित होती है। इसी साल जून में प्रकाशित एक  रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने कहा है कि संक्रमण का शिकार रहे बच्चे भी लॉन्ग कोविड का शिकार हो सकते हैं।

विशेषज्ञों ने बताया कि छोटे बच्चों में लॉन्ग कोविड के कारण कई तरह की समस्याएं देखी जा रही हैं जिनमें सोने में परेशानी, चिड़चिड़ापन, भूख न लगना, सूखी खांसी और ऊर्जा में कमी सबसे आम है। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट



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स्रोत
The potential bidirectional relationship between long COVID and menstruation

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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