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Mental Health: बच्चों के डाइट में शामिल करें ये चीजें, कम कर सकती हैं कोर्टिसोल का स्तर

Sun, 08 Feb 2026 05:20 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज की आधुनिकता से भरी जिंदगी का नकारात्मक असर अब बच्चों में भी दिखने लगा है। हमारे समाज में ऐसे कई लोग हैं जो बच्चों के डिजिटल स्क्रीन के लिए टाइम लिमिट नहीं रखते हैं। कई अध्ययन में ये सामने आया है कि ऐसी स्थिति में बच्चों को मानसिक तनाव होता है। इसलिए आइए इस लेख में कोर्टिसोल लेवल को कम करने वाले फूड प्रोडक्ट के बारे में जानते हैं।
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बच्चों के मानसिक तनाव कम करने के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe stock
How to lower cortisol naturally in kids? गाजियाबाद में कोरियन कल्चर से प्रभावित तीन बहनों ने जो गलत कदम उठाया है उसके बाद से देशभर के कई अभिभावक बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंतित हैं। इस घटना के बाद कहीं न कहीं बच्चों के मेंटल हेल्थ को लेकर चर्चाएं बढ़ गई हैं। दरअसल, जब बच्चा लंबे समय तक स्क्रिन देखता है तो तनाव या दबाव महसूस करता है, तो उसके शरीर में 'कोर्टिसोल' नामक हार्मोन का लेवल बढ़ जाता है, जिसे 'स्ट्रेस हार्मोन' भी कहा जाता है। 

कोर्टिसोल का बढ़ा हुआ लेवल बच्चों में चिड़चिड़ापन, नींद की कमी, एकाग्रता में कमी और यहां तक कि कमजोर इम्युनिटी का कारण बन सकता है। माता-पिता अक्सर बच्चों के व्यवहार को केवल अनुशासन से जोड़कर देखते हैं, जबकि असली समाधान उनकी थाली में छिपा हो सकता है। 

पोषण विज्ञान के अनुसार, कुछ खास खाद्य पदार्थ मस्तिष्क की नसों को शांत करने और कोर्टिसोल को प्राकृतिक रूप से कम करने की क्षमता रखते हैं। बच्चों की डाइट में सही बदलाव करके हम न केवल उन्हें तनावमुक्त रख सकते हैं, बल्कि उनके बेहतर संज्ञानात्मक विकास को भी सुनिश्चित कर सकते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य की समस्या - फोटो : Freepik.com
कोर्टिसोल हार्मोन क्या है और यह शरीर में क्या कार्य करता है?
कोर्टिसोल एक स्टेरॉयड हार्मोन है जो एड्रिनल ग्लैंड्स द्वारा रिलीज होता है। यह शरीर के 'फाइट या फ्लाइट' रिस्पॉन्स को नियंत्रित करता है, लेकिन इसका लगातार हाई रहना बच्चों के सेहत के लिए नुकसानदायक होता है।
  • यह मेटाबॉलिज्म और ब्लड शुगर को रेगुलेट करता है।
  • तनाव के समय ऊर्जा को मैनेज करने में मदद करता है।
  • शरीर में सूजन को नियंत्रित करता है।
  • नींद और जागने के चक्र को प्रभावित करता है।
 
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विटामिन बी-12 - फोटो : Adobe Stock
विटामिन-बी वाले खाद्य पदार्थ जरूरी
विटामिन-बी, विशेष रूप से बी12 और फोलेट, मस्तिष्क के न्यूरोट्रांसमीटर को संतुलित रखने के लिए अनिवार्य हैं। इनकी कमी से बच्चों में घबराहट और मूड स्विंग्स बढ़ सकते हैं।
  • अंडे और चिकन: ये विटामिन-बी12 के बेहतरीन स्रोत हैं।
  • साबुत अनाज: दलिया और ब्राउन राइस एनर्जी के लेवल को स्थिर रखते हैं।
  • दालें और बीन्स: ये फोलेट प्रदान करते हैं जो दिमाग को शांत रखता है।
  • केला: यह विटामिन-बी6 का अच्छा स्रोत है जो डोपामाइन बढ़ाता है।

 
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अखरोट - फोटो : Freepik
ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीशियम जरूरी
ओमेगा-3 फैटी एसिड और मैग्नीशियम सीधे तौर पर कोर्टिसोल के उत्पादन को कम करने में मदद करते हैं। ये तत्व नसों की सूजन को घटाकर मानसिक स्पष्टता बढ़ाते हैं। इसके लिए नीचे बताई गई चीजों का सेवन बढ़ा सकते हैं।
  • अखरोट और अलसी के बीज: ये ओमेगा-3 से भरपूर होते हैं।
  • चिया सीड्स: बच्चों के चिया सीड्स एक अच्छा विकल्प है, इसमें भी पर्याप्त मात्रा में ओमेगा-3 फैटी एसिड होता है।
  • पालक और हरी सब्जियां: मैग्नीशियम का खजाना हैं जो मांसपेशियों को आराम देती हैं।
  • कद्दू के बीज: इनमें जिंक और मैग्नीशियम दोनों प्रचुर मात्रा में होते हैं।
  • दही: प्रोबायोटिक्स आंतों के जरिए दिमाग के तनाव को कम करते हैं।
 
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बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य - फोटो : Adobe stock
क्या डाइट में बदलाव से बच्चों का मूड सुधर सकता है?
जी हां, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य का गहरा संबंध है। जंक फूड और अत्यधिक चीनी बच्चों में कोर्टिसोल को बढ़ाती है, जबकि प्राकृतिक और पोषक तत्वों से भरपूर डाइट उसे कम करती है। बच्चों को हाइड्रेटेड रखें और उन्हें घर का बना ताजा भोजन दें। सही खान-पान के साथ शारीरिक खेलकूद और माता-पिता का भावनात्मक साथ मिलकर बच्चों को एक तनावमुक्त और खुशहाल भविष्य प्रदान कर सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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