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Year Ender 2022: मानसिक स्वास्थ्य के लिए सकारात्मक प्रयासों वाला साल, विशेषज्ञों से जानिए आगे और क्या जरूरी?

Fri, 23 Dec 2022 07:19 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मानसिक स्वास्थ्य 2022 - फोटो : istock
मानसिक स्वास्थ्य, मौजूदा समय की सबसे अहम प्राथमिकताओं में से एक है। कोरोना महामारी के बाद से वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी विकारों के मामले तेजी से बढ़े हैं। कम उम्र में ही लोग चिंता-तनाव विकारों के शिकार हो रहे हैं, जो आगे चलकर डिप्रेशन का कारण बन सकती है। भारत में भी इस तरह की समस्याओं का जोखिम बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।

मेडिकल साइंस कहता है कि हम स्वस्थ शरीर की कल्पना तभी कर सकते हैं जब हमारा मन स्वस्थ हो। चिंता-तनाव जैसी स्थितियां, ब्लड प्रेशर और दिल का दौरा पड़ने का कारण बन रही है, ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना संपूर्ण शरीर के लिए आवश्यक हो जाता है।

साल 2022 अपने आखिरी दिनों में है, इस पूरे साल मानसिक स्वास्थ्य को लेकर किए गए प्रयासों पर गौर करें तो निश्चित ही काफी कुछ सकारात्मक पहल देखे गए। जागरूकता कैंपेन के चलते लोगों ने टैबू को तोड़कर अपनी परेशानियों के बारे में खुलकर बात की और विशेषज्ञों के पास पहुंचे। सरकार ने भी इस विषय की गंभीरता को समझते हुए न सिर्फ इसके लिए बजट बनाया साथ ही आत्महत्या रोकथाम नीति बनाने की दिशा में भी पदार्पण किया। व्यक्तिगत रूप से भी कई संस्थानों ने लोगों की मदद के लिए कई तरह के प्रयास किए।

आइए मानसिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में साल 2022 में किए गए ऐसे ही कुछ प्रयासों पर नजर डालते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में बेहतर प्रयास - फोटो : istock
बजट में भी रहा मुद्दा

देश में बढ़ती मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने बजट 2022-23 में इस दिशा में सुधार के लिए प्रयास किए। केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश में नेशनल टेलीमेंटल सेंटर शुरू किए जाने की घोषणा की। इसमें स्वास्थ्य प्रदाताओं और स्वास्थ्य सुविधाओं की डिजिटल रजिस्ट्रियां, विशिष्ट स्वास्थ्य पहचान और लोगों तक बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच को सुनिश्चित करने की योजनाओं का जिक्र था।

बजट के दौरान किए गए इन घोषणाओं के अलावा स्वास्थ्य मंत्रालय ने देश में मानसिक स्वास्थ्य सुधार की आवश्यकताओं पर जोर दिया। स्वास्थ्य मंत्रालय ने आत्महत्या रोकथाम को लेकर रणनीति बनाने की घोषणा की।
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आत्महत्या रोकथाम के लिए सख्ती से काम करने की जरूरत - फोटो : istock

आत्महत्या रोकथाम रणनीति

आत्महत्या के बढ़ते मामलों पर रोक लगाने की दिशा में सराहनीय पहल करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने देश में अपनी तरह की पहली 'राष्ट्रीय आत्महत्या रोकथाम रणनीति' की घोषणा की है। इसके अंतर्गत साल 2030 तक आत्महत्या के कारण मृत्युदर को 10 फीसदी तक कम करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अगले तीन वर्षों के भीतर आत्महत्या रोकथाम के लिए प्रभावी निगरानी तंत्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है।

इसके अलावा अगले पांच वर्षों के भीतर सभी जिलों में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लोगों में आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता बढ़ाने और मनोरोग के शिकार लोगों के मानसिक स्वास्थ्य कल्याण को लेकर एकीकृत प्रयास का लक्ष्य है। अगले आठ वर्षों के भीतर सभी शिक्षण संस्थानों में इसे पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा, जिससे प्राथमिक स्तर पर बच्चों के इस बारे में शिक्षित किया जा सके। 

केंद्र सरकार की इस पहल के पहले मध्यप्रदेश सरकार ने 9 सितंबर 2022 को महत्वपूर्ण पहल करते हुए आत्महत्या रोकथाम के लिए रणनीति का डॉक्यूमेंट तैयार का ऐलान किया था। गौरतलब  है कि नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के मुताबिक साल 2021 में देश में 1.64 लाख से अधिक लोगों ने आत्महत्या की थी। 

मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी (मेंबर ऑफ सुसाइड प्रिवेंशन पॉलिसी ड्रॉफ्टिंग कमेटी, मध्यप्रदेश सरकार) कहते हैं-
 
''साल 2022 में मानसिक स्वास्थ्य पर सरकार का ध्यान गया और सराहनीय पहल की गई हैं। आत्महत्या रोकथाम रणनीति की घोषणा सरकार की इच्छाशक्ति को दिखाता है कि हम इस विषय को प्राथमिकता में रख रहे हैं। पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम को शामिल करके बच्चों में तनाव प्रबंधन की दक्षता विकसित करने में मदद मिलेगी, इससे आत्महत्या रोकथाम और बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के बारे में लोगों को शिक्षित किया जा सकेगा।''

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मानसिक स्वास्थ्य को ठीक कैसे रखें - फोटो : Pexels

टेली मानस सुविधा की शुरुआत

विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस (10 अक्टूबर, 2022) को भारत सरकार ने टेली-मानस पहल की शुरुआत की। इसके लिए 14416 या 1800-91-4416 पर कॉल करके रोगी, विशेषज्ञों की मदद ले सकते हैं। टेली-मानस राष्ट्रव्यापी मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की पहल है जिसमें विशेषज्ञ के साथ परामर्श और ई-प्रिस्क्रिप्शन प्राप्त किया जा सकता है।

आमतौर पर देश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर बने टैबू के कारण लोगों के लिए अपनी परेशानियों को खुल कर साझा करना काफी कठिन रहा है, ऐसे में टेली-मानस के माध्यम से आप सीधे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों से सहायता ले सकते हैं।

इंस्टीट्यूट ऑफ़ ह्यूमन बेहेवियर एंड अलाइड साइंसेज (इबहास) में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश बताते हैं-
 
''टेली-मानस भारत सरकार की एक पहल है जिससे जरूरतमंदों को समय रहते विशेषज्ञों से मदद मिल सके। दिल्ली केंद्र में रोजाना विशेषज्ञ, लोगों की कॉल का जबाव और उचित सलाह दे रहे हैं। मानसिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में देश में इससे बढ़िया पहल कोई दूसरा नहीं हो सकता, फिलहाल लोगों को इन टोल फ्री नंबरों के बारे में जानकारी कम है, इसके लिए लगातार जागरूकता के प्रयास किए जा रहे हैं।''
 
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मन को शांत और स्वस्थ रखने के लिए करें उपाय - फोटो : istock
साल 2023 के लिए क्या है विशेषज्ञों का राय?

साल 2023 को लेकर मनोचिकित्सकों की प्रतिक्रिया आशावादी रही है।

इबहास में मनोचिकित्सक डॉ ओमप्रकाश कहते हैं, उम्मीद है कि आने वाले साल में हमें मानसिक स्वास्थ्य सुधार की दिशा में और सकारात्मक प्रयास देखने को मिलेंगे। मानसिक स्वास्थ्य विषय काफी वृहद है इसे सिर्फ डिप्रेशन और एंग्जाइटी तक सीमित करके नहीं देखना चाहिए। दो बड़ी चुनौतियां हैं- सिजोफ्रेनिया और बाइपोलर डिसऑर्डर। सरकार से उम्मीद है कि बजट में इन गंभीर समस्याओं के शिकार लोगों के लिए अलग से विचार करके प्रोग्राम बनाए, जिससे इनके रोगियों को बेहतर इलाज प्राप्त हो सके।

मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं, अगले साल 2023 में उम्मीद है देश में व्यापक रूप से मानसिक स्वास्थ्य मामलों की स्क्रीनिंग बढ़ाई जाए, जिससे रोगियों की समय रहते पहचान कर उन्हें इलाज और काउंसिलिंग प्राप्त हो सके। मानसिक स्वास्थ्य सुधार के साथ आत्महत्या रोकथाम की दिशा में इसकी सख्त आवश्यकता है। मानसिक स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए बजट की कमी बड़ी चिंता रही है। सरकार ने 2022 में निश्चित ही अच्छे प्रयास किए हैं, उम्मीद है कि आने वाले साल में हम और बेहतर प्रयास कर पाएंगे।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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