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Hoarding Disorder: घर में बेकार सामानों का लगा ढेर, फिर भी फेंकने का नहीं होता मन? ये हो सकती है दिमागी बीमारी

Fri, 06 Mar 2026 07:55 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आपके घर में भी ढेर सारी पुरानी चीजें इकट्ठा हैं, इनमें से कई तो ऐसी ही जिनका वर्षों से कोई इस्तेमाल भी नहीं हुआ है? घर में बिना काम की चीजें हैं फिर भी उसे फेंकने की इच्छा नहीं होती तो संभव है कि ये मानसिक स्वास्थ्य विकार हो सकता है जिसे होर्डिंग डिसऑर्डर के नाम से जाना जाता है। 
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पुराने सामान जमा करते जाने की आदत - फोटो : Freepil.com
क्या आपके घर में भी पुरानी चीजों का ढेर लगा हुआ है? पुराने डब्बे, बिना काम के कपड़े, गत्ते आदि। इनमें से कई चीजें तो ऐसी हैं जिनका वर्षों से कोई इस्तेमाल भी नहीं हुआ है। घर में बिना काम की चीजें पड़ी हैं, फिर भी उन्हें फेंकने या किसी दूसरे को देने की इच्छा नहीं होती? 

आमतौर पर पहली नजर में ऐसा लग सकता है कि आप आलसी हैं, चीजों को हटाने के लिए जानबूझकर समय नहीं निकालते या फेंकना नहीं चाहते हैं। पर विशेषज्ञ इसे मेंटल हेल्थ की समस्या के तौर पर देखते हैं। जमाखोरी, पुरानी चीजों को इकट्ठा करते रहना उन्हें खाली न करना होर्डिंग डिसऑर्डर नामक समस्या की वजह से हो सकता है।

अगर आपके घर में भी बुजुर्ग या किसी अन्य में ऐसी आदत है तो उनपर चीखने-चिल्लाने या चीजों को न फेंकने के लिए गुस्सा न करें। मानसिक स्वास्थ्य की इस तरह की समस्याओं पर डॉक्टरी सलाह जरूर हो सकता है।
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स्ट्रेस - फोटो : Freepil.com
पुराने चीजों को इकट्ठा न करने की आदत- होर्डिंग डिसऑर्डर

मध्य प्रदेश में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ निधि जैन बुखारिया कहती हैं, अक्सर हम सभी के घरों में कोई ऐसा हो सकता है जिसे आपने भी पुराने चीजों को इकट्ठा करते रहने की आदत के लिए शिकायत की होगी।

ये कोई आलस ये गंदगी की इच्छा नहीं है, बल्कि ये साइकोलॉजिकल डिसऑर्डर हो सकता है। इनमें लोगों को पुरानी, बेकार पड़ी और जिनका इस्तेमाल भी नहीं हो पा रहा है उसे फेंकने या फेंकने का सोचने तक में घबराहट या दिक्कत होने लगती है।

 

उन्हें ऐसा लग सकता है कि ये सामान बाद में काम आ जाएगा, फेंक दिया तो दिक्कत आ सकती है या फिर इसके साथ कुछ यादें जुड़ी हैं। इस चक्कर में घर में पुराने सामान इकट्ठा होते रहते हैं और पूरा घर अव्यवस्थित सा लग सकता है।
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होर्डिंग डिसऑर्डर के कारण चीजें हो जाती हैं अव्यवस्थित - फोटो : Freepil.com
होर्डिंग डिसऑर्डर के बारे में जान लीजिए

जैसा कि बताया गया है कि होर्डिंग डिसऑर्डर एक ऐसी समस्या है जिसमें आपको अपनी चीजों को फेंकने या उनसे अलग होने में दिक्कत होती है।
  • आपको लगता है कि ये चीजें घर में रहनी ही चाहिए, कभी न कभी इनका इस्तेमाल हो सकता है। 
  • आप धीरे-धीरे बहुत सारी चीजें इकट्ठा करते जाते हैं। 
  • कुछ मामलों में, होर्डिंग डिसऑर्डर का आपके साथ रहने वालों की जिंदगी पर असर हो सकता है।
  • होर्डिंग डिसऑर्डर वाले लोग इसे समस्या नहीं मानते, हालांकि इसके कारण आसपास या साथ रहने वालों को दिक्कतें हो सकती हैं।
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डॉक्टरी मदद औऱ सलाह जरूरी - फोटो : Adobe stock
क्यों होती है ये दिक्कत?

विशेषज्ञ कहते हैं, ये स्पष्ट नहीं है होर्डिंग डिसऑर्डर होता क्यों है? हालांकि कुछ मामलों में इसे जेनेटिक, ब्रेन फंक्शन या स्ट्रेसफुल जिंदगी के कारण होने वाली समस्या माना जाता है।
  • होर्डिंग डिसऑर्डर की दिक्कत आमतौर पर 15 से 19 साल की उम्र के बीच शुरू होती है और उम्र के साथ यह बढ़ती जाती है।
  • अधिक उम्र वालों में ये समस्या ज्यादा देखी जाती है। 
  • जिन लोगों में ये डिसऑर्डर होता है उनमें से कई लोगों को आसानी से फैसले लेने में दिक्कत होती है।
  • जिंदगी की कोई स्ट्रेसफुल घटनाएं जैसे किसी अपने की मौत का सदमा, तलाक या दिमाग पर असर करने वाली समस्याओं के कारण भी ये दिक्कत हो सकती है।

इस डिसऑर्डर को ठीक कैसे किया जाता है? 

होर्डिंग डिसऑर्डर के बारे में लोगों को जानकारी कम है। कुछ लोग अपनी जिंदगी पर होर्डिंग के बुरे असर को नहीं पहचान पाते या उन्हें नहीं लगता कि उन्हें इलाज की जरूरत है। हालांकि अगर इसकी वजह से परिवार के दूसरे लोगों को मुश्किलें होने लगें तो ये समस्या गंभीर हो सकती है। ऐसे लोगों को मनोचिकित्सक के सलाह की जरूरत हो सकती है।

कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) के साथ कुछ तरह की दवाओं की मदद से लक्षणों को ठीक करने में मदद मिल सकती  है।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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