मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ी हैं। बच्चे हों या बुजुर्ग, महिला हों या पुरुष सभी इसका शिकार देखे जा रहे हैं। काम के दवाब और पारिवारिक-सामाजिक कारणों के चलते स्ट्रेस-एंग्जाइटी की दिक्कत होना काफी आम है, गंभीर स्थितियों में ये डिप्रेशन (अवसाद) का भी कारण बन सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डिप्रेशन मानसिक बीमारी की गंभीर समस्या है जो आपके सोचने और व्यवहार करने के तरीके को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। इसमें लगातार उदासी की भावना बनी रहती है और आप उन गतिविधियों में रुचि खो सकते हैं जिन्हें आप पहले पसंद किया करते थे। डिप्रेशन मेंटल हेल्थ की समस्या तो है ही पर इसका असर शारीरिक स्वास्थ्य पर भी गंभीर रूप से हो सकता है।
साल 2024 के डेटा से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर लगभग 264 मिलियन (26.4 करोड़) लोगों को प्रभावित करता है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण के डेटा से पता चला है कि भारत में लगभग 20 में से एक भारतीय अवसाद से पीड़ित हो सकता है। कोविड महामारी के बाद से डिप्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी हुई है।