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Heart Problem: क्या है ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम? बिल्कुल हार्ट अटैक जैसे होते हैं लक्षण, युवाओं में बढ़ रहे मामले

Tue, 01 Apr 2025 07:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षण हार्ट अटैक जैसे होते हैं, इसलिए अक्सर लोगों को लग सकता है कि ये हार्ट अटैक है। दोनों ही स्थितियों में सांस फूलने और सीने में दर्द भी होता है। फिर इन दोनों में कैसे अंतर किया जा सकता है?
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ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
हृदय रोगों की समस्याएं सभी उम्र के लोगों में बढ़ती हुई देखी जा रही हैं, बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। हार्ट अटैक-हार्ट फेलियर जैसी दिक्कतों के बारे में तो हम सभी अक्सर सुनते-पढ़ते रहते हैं पर क्या आप ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के बारे में जानते हैं? हाल के वर्षों में युवाओं में ये दिक्कत काफी तेजी से बढ़ी है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम भी क्या हृदय से संबंधित कोई दिक्कत है या फिर कुछ और, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम आमतौर पर तनावपूर्ण स्थितियों और भावनाओं के उतार-चढ़ाव के कारण होती है। इसमें लोगों को अचानक सीने में दर्द हो सकता है या ऐसा लगता है जैसे हार्ट अटैक हुआ है। ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को स्ट्रेस कार्डियोमायोपैथी या ताकोत्सुबो कार्डियोमायोपैथी के नाम से भी जाना जाता है।

ये दिक्कत होती क्यों है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है, आइए जानते हैं।
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स्ट्रेस और हार्ट की समस्या - फोटो : Freepik.com
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के बारे में जानिए

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम क्यों होता है अब तक इसके सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि माना जाता है कि कुछ स्थितियां जिनके कारण आपको गंभीर रूप से भावनात्मक क्षति होती है वे इसे बढ़ाने वाली हो सकती हैं। उदाहरण के लिए तलाक, कार दुर्घटना या नौकरी छूटने जैसी तनावपूर्ण घटनाएं इसका कारण बन सकती हैं।
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हार्ट अटैक जैसे लक्षणों वाली समस्या - फोटो : Freepik.com
हार्ट अटैक की तरह होते हैं इसके लक्षण

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षण हार्ट अटैक से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है आमतौर पर इसे हार्ट अटैक ही मान लिया जाता है। इसमें सीने में तेज दर्द हो सकता है, सांस फूलने या बेहोशी की समस्या हो सकती है। धड़कनें अनियमित या तेज हो सकती हैं। इसके साथ हाई ब्लड प्रेशर या लो ब्लड प्रेशर जैसे लक्षण भी नजर आ सकते हैं।

अगर आपके जीवन में कोई तनावपूर्ण घटना हुई है तो ये ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम को बढ़ा सकती है। असल में तनाव की स्थिति में स्ट्रेस हार्मोन का स्राव होता है जिससे आपके हृदय की मांसपेशियां अस्थायी रूप से अचेत हो सकती हैं,  यही कारण है कि ये दिल के दौरे जैसा लगता है।

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हार्ट अटैक और ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम - फोटो : Freepik.com
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम और हार्ट अटैक में क्या अंतर है?

अब सवाल उठता है कि जब ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षण हार्ट अटैक जैसे होते हैं तो इन दोनों में क्या अंतर है?

चूंकि ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम के लक्षण हार्ट अटैक जैसे होते हैं, इसलिए अक्सर लोगों को लग सकता है कि ये हार्ट अटैक है। दोनों ही स्थितियों में सांस फूलने और सीने में दर्द भी होता है। लेकिन ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम में आपकी धमनियां अवरुद्ध नहीं होती हैं और आमतौर पर हृदय को कोई क्षति नहीं होती है।

वहीं हार्ट अटैक तब होता है जब आपकी कोरोनरी आर्टरी ब्लॉक हो जाती हैं जिससे हृदय तक रक्त का संचार ठीक तरीके से नहीं हो पाता।
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डॉक्टर की सलाह जरूरी - फोटो : Adobe stock
ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का क्या इलाज है?

ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन अधिकांश लोग दवा लेने के बाद पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि गंभीर बात ये है कि चूंकि इसके लक्षण हार्ट अटैक जैसे होते हैं और घर पर ये पता नहीं लगाया जा सकता है कि आपको हार्ट अटैक हुआ है या ब्रोकन हार्ट सिंड्रोम, इसलिए समय रहते सही निदान के लिए डॉक्टर से जरूर मिलें। जैसे-जैसे तनाव की स्थिति कंट्रोल होती जाती है इसके लक्षण भी ठीक होने लगते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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