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Sickle Cell Disease: 2047 तक देश से सिकल सेल रोग के खात्मे की दिशा में बड़ी सफलता, भारत ने तैयार कर ली दवा

Mon, 18 Mar 2024 09:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन - फोटो : istock
भारत के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में जिन स्वास्थ्य समस्याओं का बोझ सबसे अधिक देखा जाता रहा है, सिकल सेल एनीमिया की समस्या उनमें शीर्ष पर है। एक अनुमान के मुताबिक सात करोड़ से अधिक आदिवासी लोगों में यह गंभीर बीमारी देखी जा रही है। इसके जोखिमों को ध्यान में रखते हुए वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023 भाषण के दौरान साल 2047 तक इस रोग को भारत से जड़ से खत्म करने का लक्ष्य निर्धारित किया था।

जुलाई 2023 में मध्यप्रदेश के शहडोल जिले में आयोजित एक कार्यक्रम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन 2047 की शुरुआत की थी। 

इस रोग की रोकथाम की दिशा में भारत को अब बड़ी कामयाबी मिली है। भारतीय कंपनी ने इस रोग के लिए दवा का निर्माण कर लिया है। सोमवार (18 मार्च) को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट कर इसकी जानकारी देते हुए लोगों को बधाई दी है। 
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सिकल सेल रोग की रोकथाम के लिए दवा - फोटो : पिक्साबे
स्वास्थ्य मंत्री ने दी जानकारी

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने सोशल मीडिया के माध्यम से कहा, सिकल सेल रोग की रोकथाम के लिए दवा विकसित करने के लिए आप सभी को बहुत-बहुत बधाई। पीएम मोदी ने 2023 में सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन की शुरुआत की थी। यह दवा विशेष रूप से हमारे आदिवासी बहनों, भाइयों और बच्चों के लिए वरदान साबित होगी और हम जल्द ही इस रोग छुटकारा पा सकेंगे।
 
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सिकल सेल के लिए दवा (सांकेतिक) - फोटो : istock
काफी कम कीमत पर दवा उपलब्ध

इससे पहले दवा निर्माता एकेयूएमएस ने घोषणा की थी कि उसने देश का पहला स्वदेशी हाइड्रोक्सीयूरिया ओरल सॉल्यूशन लॉन्च किया है, जिसका उपयोग बच्चों में सिकल सेल रोग के इलाज के लिए किया जा सकता है। कंपनी ने कहा कि यह दवा सरकार को 600 रु. प्रति वायल की कीमत पर उपलब्ध कराई जाएगी, जो वर्तमान में वैश्विक स्तर पर उपलब्ध दवा की कीमत 77,000 (प्रति वायल) का लगभग 1% है।

कंपनी का कहना है कि ये दवा कमरे के तापमान पर स्थिर रह सकती है, जबकि दुनियाभर में प्रयोग का जाने वाली अन्य दवाओं के भंडारण के लिए 2-8 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है।
 

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देश को सिकल सेल मुक्त बनाने का लक्ष्य - फोटो : iStock
सरकार के मिशन को मिलेगी गति

कंपनी ने फिलहाल बाजार में दवा की कीमत का उल्लेख नहीं किया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस दवा को बड़ी सफलता के तौर पर देख रहे हैं क्योंकि सरकार ने सिकल सेल रोग को खत्म करने का मिशन चलाया है जिससे आने वाले दो दशकों में देश को इस रोग से मुक्त किया जा सके। इस मिशन में लोगों की स्क्रीनिंग पर ध्यान दिया जाता है ताकि लक्षण वाले लोगों का समय पर उपचार हो सके। गौरतलब है कि सिकल सेल डिजीज के कारण कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के विकसित होने का खतरा देखा जाता रहा है।
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सिकलसेल एनीमिया - फोटो : Pixabay
सिकल सेल डिजीज के बारे में जानिए

सिकल सेल डिजीज एक वंशानुगत रक्त विकार है जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं विकृत हो जाती हैं और उनका ब्रेक डाउन शुरू हो जाता है। इसमें रक्त कोशिकाएं तेजी से डेड होने लग जाती हैं जिससे रोगी में स्वस्थ लाल रक्त कोशिकाओं की कमी (सिकल सेल एनीमिया) हो जाती है। ऐसे रोगियों को बार-बार संक्रमण होने, दर्द और थकान बने रहने की दिक्कत हो सकती है।

इस रोग का अगर समय रहते निदान हो जाए तो उपचार में दवाओं के अलावा, ब्लड ट्रांसफ्यूजन और कुछ गंभीर स्थितियों में बोन-मैरो ट्रांसप्लांट की जरूरत हो सकती है। अब इस स्वदेशी दवा के आने से रोगियों के इलाज में आसानी होने की उम्मीद जताई जा रही है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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