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Alert: आपको भी ठंड लगने के साथ हो रहा है बुखार? तुरंत करा लें खून की जांच; थोड़ी सी लापरवाही पड़ सकती है भारी

Fri, 22 Aug 2025 08:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मलेरिया स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती रही है जिसको लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहना चाहिए। ये मच्छरजनित रोग है जो मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है।
  • उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विशेषज्ञों ने इससे बचाव के लिए कुछ जरूरी टिप्स साझा किए हैं।
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ठंड के साथ बुखार की दिक्कत - फोटो : Adobe Stock
मानसून का ये मौसम और इसके बाद के कुछ महीनों में भारत में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा सबसे अधिक देखा जाता रहा है। डेंगू-मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों के कारण हर साल लाखों लोगों को अस्पतालों में भर्ती होने की जरूरत पड़ती है। डॉक्टर कहते हैं, मलेरिया बीमारी स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौती रही है जिसको लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहना चाहिए।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की नवीनतम विश्व मलेरिया रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में दुनियाभर में मलेरिया के अनुमानित 263 मिलियन (26.3 करोड़) मामले सामने आए और 5.97 लाख लोगों की मौत हो गई। वहीं डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मलेरिया के अनुमानित मामलों की संख्या 2017 में 64 लाख से घटकर 2023 में 20 लाख रह गई, जो 69% की गिरावट है। इसी प्रकार, इसी अवधि में मलेरिया से होने वाली मौतें 11,100 से घटकर 3,500 हो गई, जो 68% की कमी है। 
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारी - फोटो : Freepik.com
भारत में मलेरिया का खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में पहले मलेरिया के लाखों मामले आते थे। 2015 में लगभग 12 लाख लोग बीमार पड़े थे लेकिन अब हालात में काफी सुधरी है। सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक पूरे देश से मलेरिया खत्म कर दिया जाए।

मलेरिया मच्छरजनित रोग है। यह मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है। ये मच्छर गंदे और ठहरे हुए पानी (जैसे कूलर, टंकी, टायर या गड्ढ़ों) में पैदा होते हैं। जब यह मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति का खून पीता है और फिर किसी दूसरे को काटता है, तो बीमारी फैल जाती है।
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मलेरिया से बचाव कैसे करें? - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने साझा किए जरूरी टिप्स

उत्तर प्रदेश के राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के विशेषज्ञ कहते हैं, बरसात के मौसम में मच्छरों के कारण संचारी रोगों का खतरा बढ़ जाता है। इन बीमारियों से बचने के लिए, मच्छरों से बचाव करना जरूरी है। इसके अलावा साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें ताकि आप और आपका परिवार इन रोगों से सुरक्षित रह सकें।

मलेरिया से बचाव में भी स्वच्छता का ध्यान देना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है।  विशेषज्ञों ने इसके लिए 6 उपाय बताए हैं।
  • पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें।
  • खिड़की- दरवाजों पर जाली लगवाएं ताकि मच्छर घर में न आएं।
  • सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
  • घर के आस-पास पानी जना न होने दें।
  • जानवर के बाड़ों की नियमित सफाई करें।
  • पानी की टंकी पूरी तरह से ढक कर रखें।
 

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मलेरिया और इसके जोखिम कारक - फोटो : Freepik.com
मलेरिया का खतरा किसे ज्यादा, कैसे करें पहचान?

डॉक्टर कहते हैं, समय पर अगर मलेरिया की पहचान हो जाए तो इसके कारण होने वाले गंभीर जोखिमों को कम किया जा सकता है। कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक देखा गया है ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।

छोटे बच्चे, गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के साथ खदान या बरसाती इलाकों में रहने वाले लोगों में मलेरिया का खतरा अधिक हो सकता है।

अगर आपको मलेरिया के इनमें से 2-3 लक्षण दिख रहे हैं तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
बरसात के समय अगर 2-3 दिन से बुखार हो, तो तुरंत खून की जांच कराएं।
  • तेज बुखार, बार-बार आना-जाना
  • ठंड लगकर बुखार चढ़ना और फिर पसीना आना
  • सिरदर्द, थकान, बदन दर्द
  • उल्टी या दस्त
  • गंभीर हालत में बेहोशी, सांस लेने में तकलीफ, पीलिया या खून की कमी
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मलेरिया की रोकथाम के लिए वैक्सीन - फोटो : Freepik.com
भारत ने तैयार कर ली मलेरिया की पहली स्वदेशी वैक्सीन

19 जुलाई को प्रकाशित रिपोर्ट में अमर उजाला ने बताया था कि भारत ने मलेरिया की रोकथाम के लिए अपना पहला टीका तैयार कर ली है। जल्द ही टीके के उत्पादन के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) निजी कंपनियों के साथ समझौता करने की तैयारी में है। विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि इससे न सिर्फ अस्पतालों पर पड़ने वाले दवाब को कम किया जा सकेगा बल्कि रोगियों की जान बचाने में भी मदद मिल सकेगी।

इसे फिलहाल एडफाल्सीवैक्स नाम दिया है, जो मलेरिया परजीवी प्लास्मोडियम फाल्सीपेरम के खिलाफ पूरी तरह असरदार पाया गया है। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट


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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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