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Hypoxemia: 90% से कम ऑक्सीजन लेवल है खतरे की घंटी, डॉक्टर से जानिए इसका कारण और ये कितना खतरनाक

Sun, 24 Aug 2025 08:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • शरीर का ऑक्सीजन लेवल गिरना एक गंभीर संकेत है जो हमें बताता है कि अंदर कहीं न कहीं गड़बड़ी है। अगर इसे समय रहते न समझा जाए तो इससे गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।
  • सामान्य तौर पर ब्लड ऑक्सीजन लेवल 95% से ऊपर होना चाहिए। 90 से कम की रीडिंग खतरे की घंटी है।
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ऑक्सीजन लेवल कम होने का कारण? - फोटो : Freepik.com
Hypoxemia & Low Oxygen Saturation: शरीर को स्वस्थ रखने, सभी अंगों के कार्यों को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए हमें निरंतर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। शरीर में ऑक्सीजन का संचार बाधित होना कई प्रकार की गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। यही वजह है कि ऑक्सीजन को प्राणवायु भी कहा जाता है। क्या आपने कभी सोचा कि शरीर में अगर ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाए तो इसका सेहत पर क्या असर हो  सकता है?

शरीर में ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कम होने को मेडिकल की भाषा में हाइपोक्सीमिया कहा जाता है। ऑक्सीजन हमारे शरीर के लिए वैसी ही है जैसे आग के लिए ईंधन। बिना इसके शरीर का कोई भी अंग काम नहीं कर सकता।

सामान्य तौर पर ब्लड ऑक्सीजन लेवल 95% से ऊपर होना चाहिए। अगर यह इससे कम होने लगे तो शरीर कई गंभीर संकेत देने लगता है जिसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लगातार ऑक्सीजन का स्तर सामान्य से कम बने रहने से ब्रेन, हार्ट और किडनी जैसे अंगों पर नकारात्मक असर हो सकता है।
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लो ऑक्सीजन कितना खतरनाक? - फोटो : Freepik.com
शरीर में ऑक्सीजन की कमी

अब सवाल ये है कि आखिर किन स्थितियों में शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है? अमर उजाला से बातचीत में श्वसन और फेफड़ों से संबंधित रोगों के विशेषज्ञ डॉ प्रशांत कुमार बताते हैं, कई ऐसी स्थितियां हैं जिसके कारण ऑक्सीजन का स्तर प्रभावित हो सकता है।
  • फेफड़ों की बीमारियां जैसे अस्थमा, निमोनिया, सीओपीडी की समस्या से परेशान लोगों में ये दिक्कत अधिक देखी जाती रही है।
  • इसके अलावा  दिल की कमजोरी जिससे खून ठीक से पंप नहीं हो पाता इस वजह से भी कई लोगों में ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाता है।
  • जिन लोगों में खून की कमी (एनीमिया) की दिक्कत है उनमें सभी अंगों तक ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन की मात्रा घट जाती है, जिसके कारण भी हाइपोक्सीमिया होने का खतरा बढ़ जाता है।
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फेफड़ों की समस्या - फोटो : Freepik.com
ऑक्सीजन लेवल गिरना एक गंभीर संकेत

डॉक्टर कहते हैं, शरीर का ऑक्सीजन लेवल गिरना एक गंभीर संकेत है जो हमें बताता है कि अंदर कहीं न कहीं गड़बड़ी है। अगर इसे समय रहते न समझा जाए तो इससे गंभीर समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है।

डॉ प्रशांत बताते हैं, हमारे शरीर में ऑक्सीजन लेवल (SpO₂) फेफड़ों पर सबसे ज्यादा निर्भर करता है। जब हम सांस लेते हैं, तो फेफड़े हवा से ऑक्सीजन लेकर उसे खून तक पहुंचाते हैं। लेकिन अगर फेफड़ों में कोई बीमारी हो तो ये प्रक्रिया बाधित हो जाती है।

निमोनिया रोगियों में फेफड़ों की थैली में तरल पदार्थ भर जाता है, जिससे ऑक्सीजन का खून में घुलना मुश्किल हो जाता है। इस तरह की बीमारियां हाइपोक्सीमिया बढ़ा सकती हैं।

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हृदय रोगों के कारण लो हो सकता है ऑक्सीजन - फोटो : adobe stock photos
ऑक्सीजन कम रहना दिल की बीमारी का संकेत

ऑक्सीजन कम रहना फेफड़ों की समस्या तो है ही इसके अलावा कुछ लोगों में ये हार्ट की बीमारी का भी इशारा हो सकता है।

फेफड़े ऑक्सीजन को खून तक पहुंचाते हैं, लेकिन उस ऑक्सीजन को पूरे शरीर में पहुंचाने का काम हृदय करता है। अगर दिल सही तरीके से रक्त पंप नहीं कर पा रहा है, तो शरीर के हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंचता है। यही कारण है कि हार्ट फेलियर, हार्ट अटैक या जन्मजात हृदय रोगों के शिकार लोगों में ऑक्सीजन कम हो जाता है। 
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ऑक्सीजन का स्तर कम रहना खतरनाक - फोटो : Freepik.com
लो ऑक्सीजन लेवल के इन कारणों को भी जानिए

शरीर का ऑक्सीजन लेवल गिरना कई अन्य कारणों का परिणाम भी हो सकता है इसलिए इसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • खून की कमी (एनीमिया) से पीड़ित लोगों में लो ऑक्सीजन की समस्या बहुत आम है। एनीमिया में रक्त के माध्यम से ऑक्सीजन ले जाने वाले हीमोग्लोबिन की मात्रा घट जाती है।
  • द लैंसेंट मेडिकल जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, जो लोग अधिक वायु प्रदूषण वाले इलाकों में रहते हैं उनमें भी हाइपोक्सीमिया की दिक्कत अधिक देखी जाती रही है।
  • स्लीप एपनिया वाले मरीजों में अक्सर ऑक्सीजन लेवल गिरने की समस्या देखी जाती रही है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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