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Health Alert: घटती जा रही हैं मांसपेशियां, कमजोर हो गया है शरीर? कहीं आपको सार्कोपेनिया तो नहीं

Sat, 21 Mar 2026 08:14 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सार्कोपेनिया उम्र के साथ-साथ मांसपेशियों के मात्रा और ताकत में होने वाली कमी की समस्या है। इस स्थिति का मुख्य लक्षण मांसपेशियों में कमज़ोरी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहना और अस्वस्थ आहार लेना इस बीमारी को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।
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मांसपेशियों के कम होने की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या आप भी बिल्कुल दुबले-पतले, कमजोर दिखने लगे हैं? ऐसा लग रहा है जैसे शरीर की मांसपेशियां तेजी से गायब होती जा रही हैं, अगर हां तो सावधान हो जाइए कहीं ये सार्कोपेनिया तो नहीं है?

उम्र बढ़ने के साथ शरीर में इस तरीके का बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन अगर बिना कोशिश किए शरीर तेजी से दुबला दिखने लगे, ताकत कम हो जाए, सीढ़ियां चढ़ने या चलने-दौड़ने में भी कठिनाई होने लगे तो आपको सावधान हो जाना चाहिए। इसे सिर्फ सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, ये सार्कोपेनिया का संकेत हो सकता है।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सार्कोपेनिया उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों की कमी, ताकत और कार्यक्षमता कम होने की समस्या है। 60 की उम्र के बाद हर साल 1-2% मांसपेशियां कम होती जाती हैं। हालांकि कई रिपोर्ट्स में अलर्ट किया जाता रहा है कि ये समस्या 30 की उम्र में ही शुरू हो जाती है। 

डॉक्टर कहते हैं, यह सिर्फ दिखने में दुबलेपन की बात नहीं है, बल्कि ऐसे लोगों में गिरने का खतरा, हड्डी टूटने और चलने में अस्थिरता जैसी दिक्कतें भी काफी बढ़ जाती हैं।
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मांसपेशियों और शरीर की ताकत में कमी - फोटो : Freepik.com
सार्कोपेनिया की समस्या को जानिए

क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार सार्कोपेनिया उम्र के साथ-साथ मांसपेशियों और शरीर की ताकत में होने वाली कमी की समस्या है। इसे एक प्रकार का मसल एट्रोफी (मांसपेशियों का क्षरण) भी कहा जा सकता है, जो मुख्य रूप से उम्र बढ़ने की प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण होता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि जो लोग शारीरिक रूप से निष्क्रिय रहते हैं, खान-पान ठीक नहीं रहता ऐसे लोगों में सार्कोपेनिया होने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

डॉक्टर कहते हैं, आजकल लोगों की शारीरिक गतिविधि कम हो गई है, खान-पान गड़बड़ हो गया है जो कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को बढ़ाती जा रही है। सार्कोपेनिया के बढ़ते खतरे को लेकर भी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।
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थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com
कैसे की जाती है इसकी पहचान?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर शरीर दुबला दिख रहा है लेकिन ताकत सामान्य है तो यह जरूरी नहीं कि सार्कोपेनिया हो। लेकिन अगर दुबलापन के साथ कमजोरी भी है, तो जांच कराना जरूरी है। इसके अलावा आपको लगातार कुछ अन्य लक्षणों पर भी गंभीरता से नजर बनाए रखने की जरूरत होती है। 
 
  • सार्कोपेनिया धीरे-धीरे बढ़ती है, इसलिए शुरुआत में इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं। 
  • विशेषकर हाथों और पैरों की मांसपेशियां कम होना इसका आम संकेत है। 
  • भारी सामान उठाने में पहले से ज्यादा कठिनाई होने लगती है। 
  • कुर्सी से उठते समय सहारे की जरूरत पड़ना, चलने की रफ्तार धीमी हो जाना, बार-बार संतुलन बिगड़ना भी इसका संकेत हो सकता है।

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मांसपेशियों की कमी के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
सार्कोपेनिया होने की वजह क्या है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि उम्र के साथ शरीर में हार्मोन जैसे टेस्टोस्टेरोन और कई अन्य हार्मोन कम हो जाते हैं जिस वजह से शरीर की मांसपेशियां तेजी से कम होती जाती हैं। 
 
  • शारीरिक गतिविधि की कमी को भी इसका एक कारण माना जाता है। लंबे समय तक बैठकर काम करना मांसपेशियों को कमजोर बनाता है।
  • जिन लोगों में प्रोटीन की कमी होती है उनमें भी मांसपेशियों की क्षति होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • डायबिटीज, किडनी रोग, कैंसर और क्रोनिक बीमारियां भी मांसपेशियों को प्रभावित करती हैं।
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नियमित योग-व्यायाम को बनाएं आहार का हिस्सा - फोटो : Adobe Stock
सार्कोपेनिया से बचे रहने के लिए क्या करना चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सार्कोपेनिया उम्र के साथ स्वाभाविक रूप से होने वाली समस्या है, ऐसे में इससे बचना मुश्किल हैं। हालांकि कम उम्र से ही कुछ उपाय किए जाएं तो इसके जोखिमों को थोड़ा टाला जा सकता है। 
 
  • नियमित रूप से एक्सरसाइज जैसे रनिंग-वॉकिंग जैसे व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत करते हैं।  
  • आहार में पर्याप्त मात्रा में प्रोटीन लेना जरूरी है। दालें, अंडे, दूध, पनीर और नट्स जरूर खाएं। 
  • विटामिन डी और कैल्शियम लेना हड्डियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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