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Long Covid: क्या होता है लॉन्ग कोविड, क्या हैं लक्षण और इसे क्यों कहा जा रहा कोरोना के बाद नया खतरा?

Sat, 24 Oct 2020 04:08 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अबतक लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा तय नहीं है - फोटो : Pixabay
कोरोना से उबरने के बाद भी लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं देखने को मिल रही हैं। बहुत सारे लोगों के हार्ट और फेफड़े ठीक से काम नहीं कर रहे हैं और उन्हें सांस संबंंधी परेशानियां हो रही है। कोरोना से ठीक होने के महीनों बाद भी मरीज खुद को पहले की तरह पूरी तरह स्वस्थ और तंदुरुस्त महसूस नहीं कर रहे हैं। उनमें थकान, मांसपेशियों में दर्द, डिप्रेशन और एंग्जाइटी जैसी समस्या भी देखने को मिल रही है। ऐसी स्थिति को लॉन्ग कोविड कहा जा रहा है। हालांकि अबतक लॉन्ग कोविड की न तो कोई मेडिकल परिभाषा तय है और न ही इसके लक्षण एक जैसे होते हैं। इस संबंध में कई तरह के शोध अध्ययन हुए हैं और आगे भी हो रहे हैं। आइए, लॉन्ग कोविड को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं: 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
दरअसल, बहुत सारे मरीजों में कोरोना से ठीक होने के बाद भी इसके कुछ लक्षण रह जाते हैं, जो लंबे समय तक परेशान कर सकती है। दो से तीन महीने बाद भी लोगों में कोरोना का साइड इफेक्ट दिख रहा है और उन्हें कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो जा रही हैं। इस स्थिति को लॉन्ग कोविड कहा जा रहा है।  लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में कई अलग-अलग लक्षण हो सकते हैं लेकिन 'थकान' इसका एक आम लक्षण है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए शोध अध्ययन के मुताबिक, कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों में कई महीनों तक कोरोना वायरस का असर दिख रहा है। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में थकान की शिकायत कॉमन है, जबकि इसके अन्य लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, देखने-सुनने की समस्याएं, गंध और स्वाद महसूस करने की क्षमता का कम हो जाना आदि शामिल हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में डिप्रेशन और एंग्जाइटी की समस्या भी दिखती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना संक्रमण के बाद दिल, फेफड़ों, किडनी और लिवर को भी नुकसान होने की संभावना रहती है। लॉन्ग कोविड को लेकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि,
  • कोरोना से रिकवरी के बाद भी मरीजों में समस्याएं बरकरार हैं
  • ठीक से नहीं काम कर रहे हैं फेफड़े और दिल
  • 64 फीसदी मरीजों को सांस लेने में तकलीफ
  • 26 फीसदी मरीजों को हार्ट संबंधी दिक्कतें
  • 29% को किडनी और 10% को लिवर संबंधी समस्या
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के एक जर्नल में रोम के एक अस्पताल से ठीक होकर घर लौटे 143 मरीजों पर की प्रकाशित एक शोध अध्ययन के मुताबिक, 87 फीसदी लोगों में दो महीने बाद भी कम से कम एक लक्षण दिखा। करीब आधे लोगों को थकान की शिकायत महसूस हुई है। हालांकि, यह अध्ययन अस्पताल में भर्ती हुए लोगों यानी कि कोरोना के गंभीर मरीजों पर हुई है। लेकिन घरों में आइसोलेट रहकर और डॉक्टरी सलाह से दवा लेकर ठीक होने वाले मरीजों के साथ भी ऐसा हो सकता है।
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Coronavirus Survive - फोटो : Pixabay
ब्रिटेन में 'द कोविड सिम्टम्प ट्रैकर एप' का इस्तेमाल कर रहे 40 लाख लोगों में से 12 फीसदी मरीजों को 30 दिन के बाद भी कोई न कोई लक्षण रहा। वहीं, इसी एप्लिकेशन का नया आंकड़ा बताता है कि दो फीसदी लोगों में तीन महीने बाद भी कोविड के लक्षण देखे गए। हालांकि अबतक यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि कोरोना वायरस किस तरह लॉन्ग कोविड का कारण बन रहा है। इसके बारे में दावे तो कई हैं, लेकिन तथ्य नहीं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अनुमान लगाया जा रहा है कि वायरस शरीर के ज्यादातर हिस्सों से निकल जाने के बाद भी शरीर के पॉकेट्स में बना रहता है और कोशिकाओं को संक्रमित कर सकता है। एक दावा यह भी किया जा रहा है कि कोविड के बाद भी इम्यून सिस्टम एकदम से नॉर्मल नहीं हो पाता और मरीज खुद को बीमार महसूस करता है। संक्रमण से व्यक्ति के शरीर में अंगों के काम करने का तरीका भी बदल रहा है और खासकर फेफड़ों और हार्ट में पड़ने वाला दुष्प्रभाव लंबे समय तक परेशान कर सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
किग्स क़ॉलेज लंदन के प्रोफेसर टिम स्पेक्टर का कहना है कि लंबे समय तक दस्त रहने पर हो सकता है कि आपके आंत में वायरस मौजूद हो। सूंघने की क्षमता कम हो गई हो तो हो सकता है कि वायरस नसों में रह गया हो। ब्रिटिश मेडिकल जर्नल से जुड़े डॉक्टर और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप कोविड से पूरी तरह रिकवर नहीं हो पा रहे हैं, लक्षण अब भी बने हुए हैं तो तत्काल विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना श्रेयस्कर है। 
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