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Corona Vaccine Tracker: भारत, अमेरिका समेत दुनियाभर से कोरोना वैक्सीन को लेकर कई अच्छी खबरें

Sat, 24 Oct 2020 12:15 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Vaccine - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के लोगों को इसकी एक सुरक्षित और कारगर वैक्सीन का इंतजार है। रूस और चीन ने तीसरे चरण के ट्रायल से पहले ही अपनी वैक्सीन को मंजूरी दे दी है और आपातकालीन इस्तेमाल के तहत उच्च जोखिम वर्ग के लोगों को टीका लगाया जाने लगा है। वहीं, इंडोनेशया में भी अगले महीने ऐसा किया जाना है। इधर भारत, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी समेत कई देश वैक्सीन पर सफलता से बस एक कदम दूर हैं। उम्मीद की जा रही है कि आने वाले कुछ ही महीनों में टीकाकरण अभियानों के लिए एक से ज्यादा वैक्सीन उपलब्ध होगी। भारत में देसी वैक्सीन Covaxin के अलावा सीरम इंडिया की Covishield और जायडस कैडिला की Zycov-D वैक्सीन से भी काफी उम्मीदें हैं। आइए जानते हैं भारत समेत दुनियाभर में विकसित हो रही वैक्सीन पर क्या है ताजा अपडेट: 
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देसी कोरोना वैक्सीन (Covaxin) - फोटो : निलेश कुमार, अमर उजाला ग्राफिक्स
शुरुआत करते हैं भारत के देसी टीके से
देश में कोरोना टीके की रेस में तीन वैक्सीन कैंडिडेट्स आगे चल रहे हैं। आईसीएमआर के सहयोग से भारत बायोटेक द्वारा विकसित की जा रहे देसी टीके Covaxin को तीसरे चरण के ट्रायल की अनुमति मिल चुकी है। प्रोटोकॉल में थोड़े बहुत संशोधन के साथ करीब 26 हजार वॉलेंटियर्स पर अंतिम चरण के ट्रायल अगले महीने होंगे। कंपनी के मुताबिक, Covaxin का आखिरी ट्रायल दिल्ली के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, महाराष्ट्र और असम में किया जा सकता है। आखिरी चरण के ट्रायल के परिणाम फरवरी तक आने की उम्मीद है। इसके बाद कंपनी वैक्सीन के मंजूरी और मार्केटिंग की अनुमति के लिए आवेदन करेगी। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : twitter
एस्ट्राजेनेका और जॉनसन एंड जॉनसन का ट्रायल 
अमेरिकी कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन और एस्ट्राजेनेका जल्द ही तीसरे चरण का ट्रायल फिर से शुरू करेगी। दोनों कंपनियों के वैक्सीन कैंडिडेट्स के ट्रायल के दौरान साइड इफेक्ट सामने आने पर ट्रायल रोक दिए गए थे। ब्रिटेन के साथ मिलकर वैक्सीन विकसित करने वाली कंपनी एस्ट्राजेनेका ने सितंबर में तब ट्रायल रोक दिया था, जब एक ब्रिटिश वॉलेंटियर की रीढ़ की हड्डी में साइड इफेक्ट दिखा था। वहीं, जॉनसन एंड जॉनसन ने भी एक वॉलेंटियर में साइड इफेक्ट दिखने के बाद बीते 12 अक्तूबर को ट्रायल रोक दिया था। यूएस स्वास्थ्य एवं जनसेवा विभाग के उप मुख्य अधिकारी(नीति) पॉल मैंगो के मुताबिक, दोनों वैक्सीन का ट्रायल फिर से जारी रहेगा। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
फाइजर का दावा- नवंबर तक वैक्सीन
अमेरिका की फाइजर इंक कंपनी ने घोषणा की है कि वह नवंबर तक वैक्सीन की मंजूरी के लिए अमेरिकी प्राधिकरण के पास आवेदन कर सकता है। फाइजर जर्मन कंपनी बायोएनटेक के साथ मिलकर वैक्सीन बना रही है। नैदानिक परीक्षणों में शामिल करीब 44 हजार वॉलेंटियर्स पर वैक्सीन के प्रभाव का डाटा नवंबर से पहले उपलब्ध होने की संभावना नहीं है। फाइजर के मुख्य कार्यकारी अल्बर्ट बोर्ला के मुताबिक, नवंबर के तीसरे हफ्ते तक हमारे पास अंतिम आंकड़े होंगे और वैक्सीन सुरक्षित साबित होगी। 
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CoronaVirus Vaccine - फोटो : iStock/Amar Ujala
भारत में रूसी वैक्सीन Sputnik-V का ट्रायल
रूस की पहली कोरोना वैक्सीन स्पुतनिक-वी(Sputnik-V) के बड़े पैमाने पर आखिरी चरणों के ट्रायल को भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई ने यह तर्क देते हुए रोक दिया था कि रूस या अन्य देशों में भी बड़े पैमाने पर इंसानों पर वैक्सीन का ट्रायल नहीं हुआ है। इसके बाद विषय विशेषज्ञ समिति (SEC) ने परीक्षण के साथ आगे बढ़ने की अनुमति देने के लिए नियामक के पास सिफारिश की थी। खबरों के मुताबिक, Sputnik-V वैक्सीन का बड़े पैमाने पर ट्रायल से पहले 100 वॉलेंटियर्स पर ट्रायल होगा। शनिवार को कंपनी ने कहा कि भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई से दूसरे और तीसरे चरणों के ट्रायल की अनुमति मिल गई है। 100 लोगों पर ट्रायल के परिणामों को समर्पित करने के बाद बड़े पैमाने पर ट्रायल को हरी झंडी मिल सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
जर्मनी में इसी साल टीकाकरण की शुरुआत! 
जर्मनी इस साल के अंत से पहले ही टीकाकरण शुरू करने की तैयारी में है। जर्मन मीडिया बिल्ड डेली की एक रिपोर्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य मंत्रालय ने 60 विशेष टीकाकरण केंद्र बनाने की योजना तैयार की है, जहां वैक्सीन के उचित तापमान पर स्टोरेज की सुविधा हो सके। तैयारी ऐसी कि इन केंद्रों से देश के 16 राज्यों को उनकी जरूरत के अनुसार, वैक्सीन पहुंचाई जा सके। बिल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, इसी सप्ताह एक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के दौरान स्वास्थ्य मंत्री जेन्स स्पैन ने बायोएनटेक कंपनी की वैक्सीन के सफलता के करीब होने की चर्चा की थी। बता दें कि बायोएनटेक कंपनी फाइजर के साथ वैक्सीन विकसित कर रही है। 
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Adar Poonawala, CEO, Serum Institute of India - फोटो : Social Media @AdarPoonawala
कोरोना का mAbs से इलाज के लिए सीरम ने की मर्क और IAVI संग साझेदारी
भारतीय दिग्गज कंपनी सीरम इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया ने कोरोना संक्रमितों के इलाज के लिए जर्मनी की दिग्गज फार्मा कंपनी मर्क (Merck) और न्यूयॉर्क स्थित गैरलाभकारी स्वास्थ्य अनुसंधान संगठन IAVI के साथ करार किया है। तीनों मिलकर मोनोक्लोनल एंटीबॉडी (mAbs) पर काम कर रहे हैं। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ड्रग्स नेचुरल इम्यून सिस्टम को और ज्यादा सक्षम बनाती है ताकि बीमारी से लड़ा जा सके। मोनोक्लोनल एंटीबॉडी ड्रग को एंटीबॉडी के सबस्टीट्यूट की तरह दिया जाएगा ताकि शरीर के इम्यून सिस्टम को पहले से और बेहतर बनाया जा सके। तीन साझेदारों ने कहा है कि वे इसे पूरी दुनिया तक पहुंचाना चाहते हैं। खासकर निम्न और मध्यम आय वाले उन देशों तक जहां यह इलाज लोगों की पहुंच से बाहर है। 

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CoronaVirus Vaccine China - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
चीन में 60 डॉलर में कोरोना वैक्सीन
चीन में कोरोना वैक्सीन विशेष वर्ग के लिए 60 डॉलर में उपलब्ध है। पूर्वी चीन के झेजियांग प्रांत के जियाशिंग शहर में प्रायोगिक तौर पर उच्च जोखिम समूह के लोगों के लिए कोरोना वैक्सीन की बिक्री शुरू की गई है। हालांकि अभी वैक्सीन की आधिकारिक बिक्री की मंजूरी नहीं मिली है। आपातकालीन टीकाकरण कार्यक्रम के तहत वैक्सीन की कीमत 60 डॉलर यानी करीब 4400 रुपए रखी गई है। सिनोवैक बायोटेक की ओर से विकसित की गई CoronaVac वैक्सीन को 18 से 59 साल के स्वास्थ्यकर्मी, महामारी रोकथाम में जुटे लोग और अन्य उच्च जोखिम वर्ग के लोग 400 युआन (59.5 डॉलर) में खरीद सकेंगे। 
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Dr. Suresh Jadhav, Serum Institute of India - फोटो : LinkedIn@Suresh Jadhav
सीरम की वैक्सीन कबतक?
ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और एस्ट्राजेनेका कंपनी द्वारा विकसित किए जा रहे कोरोनो वैक्सीन का उत्पादन करने वाली कंपनी सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया ने उम्मीद जताई है कि अंतिम चरण के ट्रायल में सबकुछ ठीक रहा और भारतीय दवा नियामक डीसीजीआई की हरी झंडी मिल जाती है तो देश में मार्च 2021 तक वैक्सीन उपलब्ध होगी। कंपनी के कार्यकारी निदेशक डॉ. सुरेश जाधव ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में बताया है कि दो वैक्सीन उन्नत परीक्षण के चरणों से गुजर रही है। मार्च तक वैक्सीन आ सकती है। डॉ. जाधव का मानना है कि वैक्सीन के लिए कई कंपनियां काम कर रही हैं। अगले साल की शुरुआत में भारत में कोरोना का टीका उपलब्ध होगा।
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