लीची उगाने वाले एक स्थानीय किसान भोला झा को लगता है कि लीची को बदनाम करने के पीछे 'आम' के व्यापारियों की लॉबी का हाथ है। बीबीसी से बातचीत में वह कहते हैं, "बच्चों का मरना हम सबके लिए दुखद है। लेकिन इसके सही कारण को ढूँढा जाना चाहिए। लीची यहां के बच्चे सदियों से खाते आ रहे हैं। लेकिन कुछ मीडिया संस्थानों के साथ मिलकर चेन्नई, हैदराबाद और मुंबई की मैंगो लॉबी इस तरह से लीची को बदनाम करने की कोशिश कर रही है क्योंकि सीजन में उनका मैंगो बिकता है 10-12 रुपए के रेट पर, वहीं भारत के महानगरों में लीची 250 रुपए तक के रेट पर बेचा जाता है। इसीलिए लीची किसानों को इस तरह से बदनाम करने की कोशिशें की जा रही है। कोई भी सबूतों के साथ कुछ नहीं कह रहा, सिर्फ़ क़यासों के आधार पर एक पूरी फ़सल को बदनाम किया जा रहा है"।