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Leptospirosis: यूपी-एमपी सहित 11 राज्यों में फैली ये संक्रामक बीमारी, रोगियों में लिवर-किडनी फेलियर का खतरा

Tue, 11 Jun 2024 07:31 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमणके मामले - फोटो : istock
तेज गर्मी और कुछ स्थानों पर हुई बारिश ने देश में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ा दिया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान सहित करीब 11 राज्यों में इन दिनों लेप्टोस्पाइरता संक्रमण के मामले बढ़ते जा रहे हैं। इंसानों में ये संक्रमण जानलेवा हो सकता है। बढ़ते संक्रमण के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने राज्यों को अलर्ट जारी कर बचाव के निरंतर उपाय करते रहने की अपील की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने पत्र लिखकर कहा है कि प्रभावित राज्यों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। इन इलाकों का दौरा करते समय स्वास्थ्य टीमों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण का कारण बनने वाले बैक्टीरिया मुख्यरूप से पानी या फिर मिट्टी में मौजूद हो सकते हैं। सभी राज्य प्रभावी ड्रेनेज की व्यवस्था भी सुनिश्चित करें जिससे कि दूषित जल के माध्यम से होने वाले संक्रमण के जोखिमों को कम किया जा सके। 
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बैक्टीरिया संक्रमण (सांकेतिक) - फोटो : freepik.com
क्या है लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण?

लेप्टोस्पायरोसिस एक प्रकार की संक्रामक बीमारी है जो लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होती है। त्वचा पर खरोंच या कट के माध्यम से या आंखों, नाक या मुंह के माध्यम से आप लेप्टोस्पाइरा से संक्रमित हो सकते हैं। लेप्टोस्पायरोसिस एक जूनोटिक बीमारी है, जिसका अर्थ है कि यह जानवरों और मनुष्यों के बीच संचारित होती है।

बरसात कि दिनों में जलजमाव वाली जगहों पर ये बैक्टीरिया अधिक पाए जाते हैं। संक्रमित जानवरों के मूत्र या प्रजनन द्रव के सीधे संपर्क में आने या फिर दूषित पानी-मिट्टी के संपर्क में आने, दूषित भोजन या पानी के जरिए भी आप इसके शिकार हो सकते हैं।
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गंभीर कि़डनी रोगों का खतरा - फोटो : istock
जानलेवा साबित हो सकती है बीमारी

एक अखबार में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की केरल इकाई के डॉ. राजीव जयदेवन बताते हैं, लेप्टोस्पायरोसिस से संक्रमित 10 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए जिन लोगों में संक्रमण के लक्षण नजर आ रहे हों उन्हें समय रहते डॉक्टर से मिलकर उपचार प्राप्त करना जरूरी है। समय पर बीमारी की पहचान न हो पाने की स्थिति में रोग के गंभीर रूप लेने और जानलेवा होने का खतरा भी अधिक हो सकता है।

गंभीर संक्रमण वाले लोगों में किडनी-लिवर के संक्रमण का भी खतरा अधिक देखा जाता रहा है।

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संक्रमण के लक्षणों का करें पहचान - फोटो : istock
ऐसे लक्षणों पर गंभीरता से दें ध्यान

लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की स्थिति में रोगियों में शुरुआत में फ्लू जैसे लक्षण नजर आते हैं हालांकि गंभीर मामलों में इससे आंतरिक रक्तस्राव और अंगों की क्षति का खतरा हो सकता है। संक्रमण की शुरुआती स्थिति में तेज बुखार, आंखों में संक्रमण-लालिमा, सिरदर्द, ठंड लगने, मांसपेशियों में दर्द, दस्त और पीलिया जैसी समस्या होती है। वहीं गंभीर स्थितियों में खांसी के साथ खून आने (हेमोप्टाइसिस), छाती में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पेशाब में खून आने जैसे आंतरिक रक्तस्राव के लक्षण हो सकते हैं।

कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में इस संक्रामक रोग का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। 
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संक्रमण से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : istock
कैसे रहें संक्रमण से सुरक्षित?

जिन लोगों में इस संक्रामक रोग का निदान किया जाता है उन्हें इलाज के लिए एंटीबायोटिक दवाएं दी जाती हैं। गंभीर लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण की स्थिति में अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत भी हो सकती है।

संक्रमण के जोखिमों से बचे रहने के लिए सबसे जरूरी है कि आप दूषित जल के संपर्क में आने से बचें। जानवरों के संपर्क से भी दूरी बनाकर रखें। पीने के लिए साफ पानी का इस्तेमाल करें या फिर पानी को उबालकर उसे ठंडा करके पिएं। अगर आपके शरीर में कहीं घाव है तो उसकी उचित देखभाल करें। केंद्र सरकार ने राज्यों को लिखे पत्र में कहा है कि प्रभावित इलाकों में काम कर रहे स्वास्थ्य कर्मियों को भी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए।

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स्रोत और संदर्भ
Leptospirosis: Causes, Symptoms, Diagnosis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत या फिर शोधपत्र के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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