आपने लाफिंग गैस के बारे में तो सुना ही होगा, जिसे सूंघ लेने पर इंसान काफी देर तक हंसता ही रहता है। इसका वैज्ञानिक नाम नाइट्रस ऑक्साइड है। ये एक रंगहीन और गंधहीन गैस है, जिसकी खोज एक अंग्रेज वैज्ञानिक जोजफ प्रीस्टली ने वर्ष 1793 में की थी। बाद में ब्रिस्टल के न्यूमैटिक इंस्टीट्यूट के हम्फ्री डेवी ने इसको लेकर कुछ प्रयोग किए, जिसमें ये सामने आया कि जो लोग इसे सूंघते हैं, वो हंसने लगते हैं। इसके बाद हम्फ्री डेवी ने ही इस गैस का नाम लाफिंग गैस रखा था। वैसे तो डॉक्टर इस गैस का इस्तेमाल बेहोश करने वाली दवा के रूप में दांतों के इलाज में करते हैं, लेकिन एक नए अध्ययन में पता चला है कि लाफिंग गैस डिप्रेशन को भी कम कर सकता है। स्टडी में इसके सकरात्मक परिणाम देखने को मिले हैं। अध्ययन के मुताबिक, डिप्रेशन के शिकार जिन लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया गया था, उन्हें लाफिंग गैस की छोटी खुराक दी गई थी। इसके दो हफ्ते बाद यह पाया गया कि उन्हें काफी बेहतर महससू हुआ, यानी उन्हें डिप्रेशन से बाहर निकलने में मदद मिली।