दुनियाभर में पिछले दो साल से अधिक समय से कोरोना का कहर जारी है। यह बेहद खतरनाक वायरस, वैश्विक स्तर पर अब तक लाखों लोगों की मौत का कारण बन चुका है। इस बीच एक
हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने जो दावा किया है, उसने लोगों की चिंता काफी बढ़ा दी है। वैज्ञानिकों के मुताबिक बेहद घातक माना जाने वाला इबोला वायरस इलाज के बाद भी पूरी तरह से खत्म नहीं होता है। इतनी ही नहीं इलाज से ठीक होने के बाद भी कई संक्रमितों के दिमाग में यह वायरस सालों तक छिपा रह सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में दुनिया के कई देशों में इबोला का कहर देखने को मिला है, ऐसे में इससे संक्रमित रह चुके लोगों को डॉक्टर की सलाह पर जांच करा लेनी चाहिए।
इबोला वायरस रोग (ईवीडी) एक दुर्लभ और घातक बीमारी है। उप-सहारा अफ्रीका वाले हिस्सों में इसके संक्रमण के मामले ज्यादा देखे जाते रहे हैं। कोरोना की तरह ही यह भी ज्यादातर चमगादड़ों के कारण फैलता है। इसके अलावा इबोला वायरस से संक्रमित या मृत व्यक्ति के सीधे संपर्क में आने से भी लोगों में ईवीडी होने की आशंका बढ़ जाती है। हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इसके मस्तिष्क में वर्षों तक मौजूद रहने के संकेत गंभीर समस्याओं का कारण बन सकते हैं।