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Health Alert: प्लास्टिक की चीजें करते हैं इस्तेमाल तो सावधान, गर्भावस्था में हो सकते हैं इसके गंभीर दुष्परिणाम

Tue, 13 Feb 2024 01:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्लास्टिक के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : amarujala.com
खाने-पीने की चीजों को रखने के लिए क्या आपके घरों में भी प्लास्टिक वाली चीजों का इस्तेमाल किया जाता है? अगर हां तो सावधान हो जाइए, ये शरीर के लिए कई प्रकार से हानिकारक हो सकता है। अब तक के अध्ययनों में प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से होने वाली समस्याओं को लेकर अलर्ट किया जाता रहा था, हालांकि नए शोध में वैज्ञानिकों ने बताया है कि फूड पैकिजिंग वाली कई चीजों का इस्तेमाल भी इतना नुकसानदायक हो सकता है कि इसके कारण समय से पहले बच्चों के जन्म का खतरा बढ़ता जा रहा है। 

प्लास्टिक और इसका दैनिक जीवन में इस्तेमाल कितना हानिकारक है, इस बारे में किए गए हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने सभी लोगों को अलर्ट किया है, विशेषकर महिलाओं को इसके गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।

नए अध्ययन के अनुसार, खाद्य कंटेनर और कॉस्मेटिक पैकेज जैसी रोजमर्रा की प्लास्टिक की वस्तुएं बच्चों के जन्म संबंधी समस्याओं का कारक हो सकती हैं। 
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समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा - फोटो : istock
बढ़ रहा है समय से पहले बच्चे के जन्म का खतरा

द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने प्लास्टिक वाली चीजों के बढ़ते इस्तेमाल के कारण समय से पहले बच्चों के जन्म की घटनाओं के भी बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट किया है। समय से पहले जन्म का मतलब गर्भावस्था के 37वें सप्ताह से पहले बच्चों का जन्म होना है। सीडीसी ने इस महीने की शुरुआत में चेतावनी दी थी कि दुनियाभर में ऐसे मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

अध्ययन के लिए, शोधकर्ताओं ने लगभग 5,000 अमेरिकी महिलाओं में गर्भावस्था के दौरान विभिन्न बिंदुओं पर विश्लेषण किया जिसमें पाया गया है कि प्लास्टिक मां-बच्चे दोनों के लिए हानिकारक प्रभावों वाले हो सकते हैं।
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प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल हो सकता है हानिकारक - फोटो : Istock
प्लास्टिक में पाए गए हानिकारक रसायन

शोध में गर्भवास्था के दौरान नियमित अंतराल पर महिलाओं का यूरिन सैंपल लिया गया। इसमें शोधकर्ताओं ने थैलेट्स नामक रसायन की पुष्टि की गई। इस रसायन को पहले के अध्ययनों में भी  हार्मोन कार्यों को प्रभावित करने वाला पाया गया है जो शरीर की अन्य प्रक्रियाओं को भी प्रभावित कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि थैलेट्स के संपर्क में आने से समय से पहले जन्म का खतरा काफी बढ़ सकता है। अनुमानित यह सालाना 56,595 समय से पहले जन्मों का कारण बन रहा है।

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प्लास्टिक में हो सकते हैं खतरनाक रसायन - फोटो : pixabay
प्लास्टिक की चीजों का उपयोग हो सकता है हानिकारक

रिपोर्ट के लेखकों ने बताया कि प्लास्टिक की चीजों को लचीला बनाने के लिए इस रसायन का इस्तेमाल किया जाता रहा है। फर्नीचर, पाइप, बेबी पैंट, खिलौने और मेडिकल ट्यूबिंग सहित कई अन्य उत्पादों में भी इसका उपयोग किया जाता है। समय के साथ ये रसायन प्लास्टिक में रिसकर शरीर के संपर्क में आ सकते हैं, जिसके कारण कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन रसायनों के कारण होने वाले जोखिमों से बचाव के लिए निर्माताओं को इसके अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए। वैश्विक स्वास्थ्य के लिए ये रसायन गंभीर समस्याकारक हो सकते हैं।
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गर्भवती बरतें विशेष सावधानी - फोटो : pexels
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?

शोध के निष्कर्ष में एनवाईयू ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन में प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखक लियोनार्डो ट्रैसांडे बताते हैं, हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि प्लास्टिक बनाने के लिए प्रयोग में लाए जाने वाले ये रसायन समय से पहले जन्म के खतरे को बढ़ा रहे हैं। समय से पहले बच्चों के जन्म के कारण उनमें भविष्य में शरीरिक और मानसिक विकारों का खतरा हो सकता है। थैलेट्स रसायन को पहले के अध्ययनों में भी मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हुए देखा गया है।

जोखिमों को देखते हुए सुरक्षित प्लास्टिक सामग्री का उपयोग करना या संभव हो तो प्लास्टिक का उपयोग पूरी तरह से कम करना बहुत आवश्यक हो गया है।


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स्रोत और संदर्भ
Prenatal phthalate exposure and adverse birth outcomes in the USA: a prospective analysis of births and estimates of attributable burden and costs

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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