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Covid-19: वैक्सीनेटेड लोगों में लॉन्ग कोविड और इसकी जटिलताओं का कितना खतरा? अध्ययन में वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा

Thu, 26 May 2022 04:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वैक्सीनेटेड लोगों में भी हो सकता है लॉन्ग कोविड - फोटो : Istock
दुनियाभर में पिछले दो साल से अधिक समय से कोरोना संक्रमण का कहर जारी है। इस समय लोगों के लिए बड़ी चिंता का कारण बने ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामकता दर काफी अधिक बताई जा रही है, जिसने कई देशों में एक बार फिर से संक्रमण के मामलों को बढ़ा दिया है। संक्रमण के बढ़ते मामलों के साथ-साथ इस समय लॉन्ग कोविड भी एक बड़ी समस्या का कारण बनी हुई है।

अध्ययनों में यहां तक भी दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या एक से दो साल तक भी बनी रह सकती है। संक्रमण का शिकार रह चुके सभी लोगों को लॉन्ग कोविड के खतरे को देखते हुए अलर्ट रहने की सलाह दी जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक के अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि जिन लोगों का टीकाकरण पूरा हो चुका है, उनमें कोरोना संक्रमण के कारण गंभीर रोग और मृत्यु का खतरा काफी कम होता है। हालांकि ऐसे लोगों में भी लॉन्ग कोविड विकसित होने का खतरा बना हुआ है। हाल ही में हुए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि वैक्सीनेटेड लोगों में भी पोस्ट कोविड की जटिलताएं हो सकती हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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गंभीर रोग से सुरक्षा देती है वैक्सीन - फोटो : Pixabay
वैक्सीनेशन और लॉन्ग कोविड

नेचर मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि वैक्सीनेटेड लोगों को अगर संक्रमण हो जाता है, तो उनमें भी लॉन्ग कोविड विकसित होने का खतरा हो सकता है, हालांकि अन्य लोगों की तुलना में ऐसे लोगों में जटिलताएं जरूर कम देखी गई हैं।

जिन लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ है, ऐसे लोगों की तुलना में वैक्सीनेशन करा चुके लोगों में संक्रमण के कारण मृत्यु का खतरा  34 प्रतिशत और लॉन्ग कोविड का जोखिम 15 प्रतिशत कम जरूर होता है। पर चूंकि वैक्सीनेशन आपको लॉन्ग कोविड से पूरी सुरक्षा देती हुई नहीं देखी जा रही है, ऐसे में इस बारे में सभी को सावधानी जरूर बरतते रहना चाहिए। 
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लॉन्ग कोविड की जटिलताएं - फोटो : Pixabay
अध्ययन में क्या पता चला?

इस अध्ययन के लिए यूएस डिपार्टमेंट ऑफ वेटरन्स अफेयर्स के शोधकर्ता ने 1 जनवरी से 31 अक्टूबर, 2021 तक कोरोना संक्रमण की चपेट में आए 13 मिलियन से अधिक लोगों के डेटा का अध्ययन किया। इसमें से 113,474 लोगों का टीकाकरण नहीं हुआ था जबकि 33,940 लोग वैक्सीनेशन करा चुके थे। कई स्तर पर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि लॉन्ग कोविड की खतरा दोनों समूह के लोगों में हो सकता है, हालांकि जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है, उनमें लॉन्ग कोविड में गंभीर समस्याओं का खतरा जरूर कम पाया गया है।

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लॉन्ग कोविड के खतरे को जानिए - फोटो : iStock
टीकाकरण करा चुके लोगों में भी खतरा

अध्ययन में पाया गया कोविड वैक्सीन, संक्रमण के दौरान गंभीर रोग के कारण अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को कम कर देती है, बावजूद इसके लोगों में लॉन्ग कोविड का खतरा बना हुआ देखा जा रहा है।

वैक्सीन, लॉन्ग कोविड में फेफड़े और रक्त के थक्के बनने से संबंधित विकारों को कम करने में मददगार जरूर हो सकती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि वैक्सीनेशन करा चुके लोगों को भी लॉन्ग कोविड के खतरे को लेकर सावधानी बरतते रहना चाहिए।
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लॉन्ग कोविड के खतरे को जानिए - फोटो : iStock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के बारे में वाशिंगटन विश्वविद्यालय में महामारी विज्ञानी डॉ अल-एली कहते हैं, लॉन्ग कोविड मौजूदा समय में इस महामारी से संबंधित बड़ी समस्या बनी हुई है। वैक्सीनेशन से सुरक्षा के बारे में जानने के लिए किए गए इस अध्ययन से पता चलता है कि टीकाकरण करा चुके लोगों में लॉन्ग कोविड की गंभीर जटिलताओं का जोखिम जरूर कम होता है, पर टीके, आपको लॉन्ग कोविड से पूरी तरह से सुरक्षित नहीं करते हैं। सभी लोगों को इस बारे में ध्यान देते रहना आवश्यक है।
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लॉन्ग कोविड से बचाव जरूरी - फोटो : iStock
अध्ययन का निष्कर्ष?

वैक्सीनेशन और लॉन्ग कोविड के जोखिम के बारे में जानने के लिए किए गए इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि आपका कोविड टीकाकरण हो चुका है या नहीं, दोनों ही स्थितियों में लॉन्ग कोविड की जटिलताओं को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके सभी लोगों को अपने स्वास्थ्य की निगरानी करते रहना चाहिए, जिससे लक्षणों की समय रहते पहचान कर लॉन्ग कोविड के खतरे से बचाव किया जा सके। 


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स्रोत और संदर्भ
Long COVID after breakthrough SARS-CoV-2 infection

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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