फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Lancet study: तीन दशकों में 123% तक बढ़े इस बीमारी के मामले, कहीं आप भी तो नहीं हैं लिस्ट में?

Sat, 23 May 2026 06:50 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारत में 1990 के बाद एंग्जायटी से जुड़े मामलों में 123 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। यह केवल मानसिक परेशानी नहीं बल्कि शरीर, व्यवहार, नींद, हार्मोन और दिल की सेहत तक को प्रभावित करने वाली गंभीर स्थिति बनती जा रही है। कहीं आप भी तो इस समस्या का शिकार नहीं हैं?
विज्ञापन
1 of 5
मेंटल हेल्थ की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
बीते दशकों में बढ़ी कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियां वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का कारण बनी हुई हैं। इनमें सिर्फ डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और कैंसर जैसी शारीरिक स्वास्थ्य की समस्याएं भर नहीं हैं, मानसिक स्वास्थ्य की दिक्कतें भी खतरा बढ़ाती जा रही हैं। भारतीय आबादी पर द लैंसेट की हालिया रिपोर्ट इसी तरह की गंभीर चिंताओं को लेकर है।

द लैंसेट में प्रकाशित 'ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी के विश्लेषण में भारतीय आबादी में बढ़ती मेंटल हेल्थ की समस्याओं को लेकर अलर्ट किया गया है।
 
  • रिपोर्ट के अनुसार भारत में तीन दशकों (1990 और 2023 के बीच) में एंग्जाइटी डिसऑर्डर के मामलों में 123.5 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई है।
  • साल 1990 में एंग्जाइटी के शिकार प्रति लाख 2591 मामले थे, वह बढ़कर 2023 में प्रति लाख 5792 हो गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में युवा आबादी इस समस्या का शिकार होती जा रही है, जो गंभीर चिंता का कारण है। विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये गंभीर शारीरिक बीमारियों का भी कारण बन सकती है। कहीं आप भी तो एंग्जाइटी का शिकार नहीं हो गए हैं?
विज्ञापन

2 of 5
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com
मेंटल हेल्थ की समस्याओं का बढ़ता खतरा

इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ मेट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (आईएचएमई) के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के साथ किए गए इस अध्ययन के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 1.2 अरब लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के साथ जी रहे हैं।
 
  • यह संख्या 1990 की तुलना में लगभग दोगुनी है। 
  • साल 2023 में सभी देशों में मानसिक विकारों के कारण स्वास्थ्य पर एक बड़ा बोझ पड़ा है, चाहे वहां स्वास्थ्य संसाधन कितने भी उपलब्ध क्यों न हों। 
  • मानसिक विकार अब विश्व स्तर पर विकलांगता का सबसे बड़ा कारण बन गए हैं।
  • मेंटल हेल्थ की समस्याओं ने अब हृदय रोग, कैंसर और मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशियों और हड्डियों से संबंधित) दिक्कतों को भी पीछे छोड़ दिया है।
विज्ञापन

3 of 5
एंग्जाइटी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
एंग्जाइटी के साथ कई अन्य समस्याएं भी बढ़ रहीं
 
भारतीयों में एंग्जाइटी के अलावा भी कई अन्य मानसिक विकारों के मामले भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं।  
 
  • साल 1990 में प्रति एक लाख लोगों पर सिजोफ्रेनिया के 316 मामले थे, जो 2023 में बढ़कर 321 हो गए। 
  • मेजर डिप्रेसिव डिसऑर्डर के मामले भी 1990 में हर प्रति लाखों लोगों पर 2,147 से बढ़कर 2,799.6 हो गए। 
  • डिस्थीमिया (लंबे समय तक रहने वाला डिप्रेशन) के मामले 1990 में हर एक लाख लोगों पर 902 से बढ़कर 2023 में 948 हो गए हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड-19 के बाद एंग्जायटी और डिप्रेशन के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। इसके अलावा पर्यावरणीय स्थितियों, बदलती जीवनशैली और बढ़ती जागरूकता के कारण अब मामलों की रिपोर्टिंग बेहतर हुई है। इस वजह से भी संख्या बढ़ गई है।

4 of 5
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photo
क्यों बढ़ रहे हैं एंग्जाइटी के मामले?

क्वींसलैंड सेंटर फॉर मेंटल हेल्थ रिसर्च के एसोसिएट प्रोफेसर औरअध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. डेमियन सैंटोमौरो कहते हैं, कोविड महामारी से जुड़े तनाव के लंबे समय तक बने रहने के साथ गरीबी, असुरक्षा, दुर्व्यवहार, हिंसा और घटते सामाजिक जुड़ाव जैसे कारणों ने एंग्जाइटी और मानसिक स्वास्थ्य समस्या के मामलों को काफी बढ़ाया है।

इस बढ़ती चुनौती से निपटने के लिए मानसिक स्वास्थ्य प्रणालियों में लगातार निवेश, लोगों तक देखभाल तक बेहतर पहुंच बनाने और ज्यादा जोखिम वाली आबादी को बेहतर सहायता देने पर जोर देना बहुत जरूरी है।

निष्कर्षों से पता चलता है कि मानसिक समस्याओं का बोझ 15-19 वर्ष की आयु के लोगों में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मेंटल हेल्थ समस्याओं का बढ़ता खतरा - फोटो : Freepik.com
कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?

एंग्डाइटी की स्थिति, स्ट्रेस यानी तनाव के प्रति शरीर की एक स्वाभाविक प्रतिक्रिया है। इसमें बहुत ज्यादा डर, घबराहट और शारीरिक तनाव जैसी भावनाएं महसूस होती हैं, भले ही सामने कोई वास्तविक खतरा न हो।
 
  • अमेरिकन साइकियाट्रिक एसोसिएशन के अनुसार एंग्जायटी में दिमाग लगातार अलर्ट मोड में रहता है। इससे व्यक्ति को हर समय खतरे का एहसास हो सकता है। 
  • कई बार मरीजों को सांस फूलना, सीने में दर्द, दिल की धड़कन तेज होने के साथ नींद की समस्या भी महसूस हो सकती है। 
  • पढ़ाई का दबाव, करियर की चिंता, सोशल मीडिया, साइबर बुलिंग युवाओं में एंग्जाइटी की समस्या बढ़ाती जा रही है।
  • विशेषज्ञों के अनुसार नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त नींद मानसिक स्वास्थ्य ठीक रखने के लिए जरूरी हैं। सोशल मीडिया और स्क्रीन टाइम सीमित करना भी आवश्यक है।

अगर आपको भी एंग्डाइटी के कोई भी लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।


--------------
स्रोत:
The burden of mental disorders across the states of India: the Global Burden of Disease Study 1990–2017


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें