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Heart Health: इन बातों पर अक्सर नहीं जाता लोगों का ध्यान, पर इससे भी हो सकता है हार्ट अटैक

Mon, 27 Jan 2025 02:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आप जानते हैं कि हम दिनभर में जाने-अनजाने कई ऐसे काम करते हैं जिसके कारण भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है? इसको लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। आइए जानते हैं कि हमारी कौन सी आदतें हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं?
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हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Freepik.com
हृदय रोग (हार्ट अटैक) दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल  हार्ट अटैक के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। कुछ दशकों पहले तक हृदय की समस्याओं को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली बीमारी के रूप में देखा जाता था हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। 

हृदय की समस्याएं किन कारणों से होती हैं इसपर एक नजर डालें तो पता चलता है कि लोगों की गड़बड़ होती दिनचर्या जैसे दिनभर बैठे रहना, व्यायाम की कमी, धूम्रपान की आदत के साथ आहार पर ध्यान न देना हार्ट अटैक का कारण बन सकती है। जिन लोगों का ब्लड प्रेशर, शुगर या कोलेस्ट्रॉल लेवल अक्सर बढ़ा रहता है उनमें भी हार्ट अटैक का जोखिम अधिक होता है, इसको लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

क्या आप जानते हैं कि हम दिनभर में जाने-अनजाने कई ऐसे काम करते हैं जिसके कारण भी हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है? इसको लेकर भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
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हार्ट अटैक की समस्या - फोटो : Adobe Stock
हार्ट अटैक के बारे में जानिए

दिल का दौरा (हार्ट अटैक) तब पड़ता है जब हृदय में रक्त का प्रवाह कम या पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाता है। यह रुकावट आमतौर पर हृदय (कोरोनरी) की धमनियों में फैट, कोलेस्ट्रॉल और अन्य पदार्थों के जमाव के कारण होती है। इस जमाव को प्लाक कहा जाता है। 

यदि आपके सीने में दर्द, दबाव, जकड़न महसूस हो रहा हो, ये दर्द कंधे, हाथ, पीठ, गर्दन, जबड़े तक फैल जाए तो इस तरह के लक्षण हार्ट अटैक का संकेत हो सकते हैं। इन लक्षणों के अलावा ठंडा पसीना आना, थकान या बेहोशी, उल्टी आना या सांस लेने में दिक्कत हो रही हो तो आपको विशेष सावधान हो जाना चाहिए।

आइए जानते हैं कि हमारी कौन सी आदतें हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए?
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नींद न आने की समस्या - फोटो : Freepik.com
आपको नींद की समस्या तो नहीं?

नींद न आना या नींद पूरी न होने की स्थिति को शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत के लिए हानिकारक माना जाता है, पर क्या आप जानते हैं कि लंबे समय तक बनी रहने वाली ये दिक्कत हार्ट अटैक का भी कारण बन सकती है?  एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि जो लोग आमतौर पर रात में 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें दिल का दौरा पड़ने की आशंका उन लोगों की तुलना में दोगुनी होती है जो 6 से 8 घंटे सोते हैं। 

अनिद्रा या स्लीप एप्निया जैसी नींद संबंधी बीमारियां रक्तचाप और शरीर में सूजन बढ़ाने लगती हैं। इससे हार्मोन संतुलन भी बिगड़ने का खतरा रहता है। ये सभी दिल पर दबाव डालकर हार्ट अटैक को ट्रिगर करने वाली हो सकती हैं।

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ठंड का हृदय पर असर - फोटो : Freepik.com
ठंड के मौसम में रहें सावधान

मौसम का भी आपके हृदय स्वास्थ्य पर सीधा असर होता है। ठंड का मौसम हृदय रोग के शिकार लोगों के लिए कई प्रकार की दिक्कतों को बढ़ाने वाला हो सकता है। ठंड के कारण आपकी धमनियां संकरी हो सकती हैं, जिससे दिल तक रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है। इसके अलावा, ठंड के दिनों में आपके शरीर को गर्म रखने के लिए हृदय को अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इस तरह की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। ठंड से बचाव करते रहना सभी के लिए जरूरी है।
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जिम में व्यायाम के दौरान बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
तीव्र स्तर के व्यायाम भी नुकसानदायक

माना जाता रहा है कि नियमित व्यायाम की आदत आपके दिल को स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरूरी है, लेकिन फिट रहने के लिए बहुत तीव्रता वाले व्यायाम करना या क्षमता से अधिक वजन उठाना भी खतरनाक हो सकता है।

आंकड़ों से पता चलता है कि लगभग 6% हार्ट अटैक के मामले अत्यधिक शारीरिक मेहनत के कारण होते हैं। यही कारण है कि सभी लोगों को अपनी क्षमता और सहनशक्ति के अनुसार ही व्यायाम करना चाहिए। हल्के एरोबिक अभ्यास जैसे रनिंग, वॉकिंग भी आपके हार्ट को स्वस्थ रखने में सहायक हो सकते हैं।



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स्रोत और संदर्भ
The dangers of sleep deprivation


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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